लंदन हाई कोर्ट ने बैंक ऑफ इंडिया के बकाया लोन मामले में भगोड़े हीरा व्यापारी नीरव मोदी की याचिका को शुक्रवार को खारिज कर दिया। इस याचिका में मोदी ने दृष्टिहीनता, अवसाद और जेल में मौजूद बाध्यताओं का हवाला देते हुए अपने मुकदमे को स्थगित करने का अनुरोध किया था, जिसे अदालत ने स्वीकार नहीं किया।
लंदन: भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी को लंदन हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। ब्रिटिश अदालत ने बैंक ऑफ इंडिया से जुड़े बकाया ऋण मामले में मुकदमा स्थगित करने की उसकी याचिका को शुक्रवार को खारिज कर दिया। मोदी ने दृष्टिहीनता, नैदानिक अवसाद और जेल की परिस्थितियों का हवाला देते हुए कार्यवाही टालने का अनुरोध किया था, जिसे अदालत ने स्वीकार नहीं किया।
यह फैसला ऐसे समय में आया है जब मोदी पहले से ही भारत प्रत्यर्पण का सामना कर रहा है और पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) से जुड़े लगभग 2 अरब डॉलर (करीब 16,000 करोड़ रुपये) के घोटाले में मुकदमे का सामना करने के लिए भारत भेजे जाने के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहा है।
बैंक ऑफ इंडिया मामला क्या है?
नीरव मोदी पर बैंक ऑफ इंडिया से जुड़े लगभग 80 करोड़ अमेरिकी डॉलर के बकाया ऋण से संबंधित दीवानी मामला चल रहा है। इसी मामले में वह उत्तरी लंदन की एचएमपी पेंटनविले जेल से वीडियोलिंक के जरिए मुकदमा-पूर्व समीक्षा सुनवाई में पेश हुआ था। इस मामले में आठ दिवसीय ट्रायल 23 मार्च से शुरू होना है।
मोदी ने अदालत से सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध करते हुए कहा था कि उसकी स्वास्थ्य स्थिति और जेल की परिस्थितियां उसे ठीक से बचाव तैयार करने से रोक रही हैं।
जज ने याचिका को “देरी की रणनीति” बताया
जस्टिस साइमन टिंकलर ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि मोदी को ट्रायल में “समान अवसर” मिलेगा और उसे कोई “महत्वपूर्ण नुकसान” नहीं होगा।उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा, “दुर्भाग्य से, मैं इस आवेदन को नीरव मोदी द्वारा देरी करने के पैटर्न का हिस्सा मानता हूं। अदालत का यह बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मोदी पहले भी कई मौकों पर कानूनी प्रक्रियाओं में देरी के लिए अलग-अलग आधार उठा चुका है।
मोदी के बैरिस्टर जेम्स किनमैन ने अदालत में कहा कि उनके मुवक्किल को गंभीर “पूर्वाग्रह” का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि पिछले साल अक्टूबर में उसे एचएमपी थेम्साइड जेल (दक्षिण लंदन) से पेंटनविले स्थानांतरित किए जाने के बाद से उसे कानूनी दस्तावेजों तक पर्याप्त पहुंच नहीं मिल पाई। उन्होंने यह भी बताया कि मोदी अपनी 60 प्रतिशत दृष्टि खो चुका है, गंभीर रूप से दृष्टिहीन है और नैदानिक अवसाद से पीड़ित है। इसके कारण वह लंबे समय तक दस्तावेज पढ़ने या ध्यान केंद्रित करने में असमर्थ है।
वकील ने यह भी कहा कि हाल तक उसे एक ऐसे कैदी के साथ कोठरी साझा करनी पड़ी जो दोपहर तक सोता रहता था, जिससे उसके मानसिक स्वास्थ्य पर और असर पड़ा।

ऑनलाइन सुनवाई में क्या सामने आया?
सुनवाई के दौरान यह जानकारी सामने आई कि मोदी को वर्तमान में जेल के शिक्षा विभाग में रखा गया है, जहां वह अपनी नई प्रत्यर्पण अपील की तैयारी कर रहा है। इस अपील पर मार्च में सुनवाई होने की संभावना है। बैंक ऑफ इंडिया की ओर से पेश बैरिस्टर टॉम बेस्ली ने अंतिम क्षणों में दायर स्थगन याचिका पर आपत्ति जताई और कहा कि इससे प्रक्रिया में अनावश्यक देरी होगी।
नीरव मोदी मार्च 2019 में जारी प्रत्यर्पण वारंट के तहत लंदन में हिरासत में है। तब से उसकी कई अपीलें और जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं। भारत में नीरव मोदी के खिलाफ तीन प्रमुख आपराधिक कार्यवाही चल रही हैं:
- सीबीआई का मामला — पंजाब नेशनल बैंक में धोखाधड़ी से जुड़े आरोप।
- ईडी का मामला — कथित धन शोधन और अवैध लेन-देन।
- साक्ष्य से छेड़छाड़ का मामला — सीबीआई जांच में गवाहों और सबूतों को प्रभावित करने के आरोप।
अप्रैल 2021 में ब्रिटेन की तत्कालीन गृह मंत्री प्रीति पटेल ने मोदी के प्रत्यर्पण को मंजूरी दी थी, यह कहते हुए कि उसके खिलाफ प्रथम दृष्टया मजबूत मामला है और उसे भारतीय अदालतों में मुकदमे का सामना करना चाहिए।










