ब्रिटेन में मंत्री मियाट्टा फाहनबुलेह ने इस्तीफा देकर पीएम कीर स्टारमर की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाए। उन्होंने सरकार पर वादे पूरे न करने का आरोप लगाया। इस घटनाक्रम से लेबर पार्टी में आंतरिक विवाद और राजनीतिक संकट बढ़ गया है।
लंदन: ब्रिटेन की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की सरकार में मंत्री मियाट्टा फाहनबुलेह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह इस्तीफा ऐसे समय पर आया है जब लेबर पार्टी के भीतर नेतृत्व और नीतियों को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है।
मियाट्टा फाहनबुलेह को स्टारमर सरकार में ‘विकेंद्रीकरण, आस्था और समुदायों की मंत्री’ के रूप में जिम्मेदारी दी गई थी। उनका इस्तीफा इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वह इस सरकार से इस्तीफा देने वाली पहली मंत्री बन गई हैं, जिससे राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है।
सोशल मीडिया पर दिया इस्तीफा, नेतृत्व पर उठाए सवाल
मियाट्टा फाहनबुलेह ने अपने इस्तीफे की घोषणा सोशल मीडिया के माध्यम से की। उन्होंने अपने बयान में कहा कि सरकार जनता से किए गए वादों को पूरा करने में असफल रही है और अब लोगों का विश्वास कमजोर हो गया है।
उन्होंने प्रधानमंत्री की नेतृत्व क्षमता पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता को यह भरोसा नहीं रह गया है कि कीर स्टारमर देश की जरूरतों के अनुसार प्रभावी बदलाव ला सकते हैं। हालांकि, उन्होंने सीधे तौर पर उनके इस्तीफे की मांग नहीं की, लेकिन एक व्यवस्थित नेतृत्व परिवर्तन की आवश्यकता पर जोर दिया।
पार्टी नेतृत्व में बदलाव की मांग तेज
फाहनबुलेह ने अपने बयान में यह भी सुझाव दिया कि लेबर पार्टी को एक स्पष्ट समयसीमा तय करनी चाहिए, जिसके तहत नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हो सके। उनका कहना था कि एक नई नेतृत्व टीम ही पार्टी के वादों को सही तरीके से लागू कर सकती है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, लेबर पार्टी के भीतर पहले से ही असंतोष की लहर चल रही है और लगभग 78 से अधिक सांसद नेतृत्व परिवर्तन की मांग उठा चुके हैं। यह संख्या पार्टी के कुल सांसदों का लगभग 20 प्रतिशत बताई जा रही है, जो एक गंभीर आंतरिक विभाजन की ओर इशारा करता है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि और फाहनबुलेह का करियर
मियाट्टा फाहनबुलेह 2024 में सांसद बनी थीं और राजनीति में आने से पहले वह एक प्रमुख नीति संस्थान ‘न्यू इकोनॉमिक्स फाउंडेशन’ का नेतृत्व कर चुकी थीं। यह संस्था आर्थिक और सामाजिक मुद्दों पर काम करती है और इसे वामपंथी नीतियों के लिए जाना जाता है।
लेबर पार्टी की सरकार बनने के बाद उन्हें पहले ऊर्जा सुरक्षा और नेट जीरो विभाग में मंत्री बनाया गया था, बाद में उन्हें आवास, समुदाय और स्थानीय सरकार मंत्रालय में स्थानांतरित किया गया।
उनकी राजनीतिक पहचान पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री एड मिलिबैंड की करीबी सहयोगी के रूप में भी मानी जाती है, जिससे उनका इस्तीफा और भी महत्वपूर्ण राजनीतिक संकेत देता है।
स्टारमर का रुख: इस्तीफे की मांगों को खारिज
बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने अपने पद से इस्तीफा देने की मांगों को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन के लिए एक औपचारिक प्रक्रिया मौजूद है, लेकिन अभी तक ऐसी कोई प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है।
एक कैबिनेट बैठक में उन्होंने मंत्रियों से कहा कि सरकार का मुख्य ध्यान शासन और प्रशासन पर होना चाहिए, न कि आंतरिक राजनीतिक विवादों पर। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका इस्तीफा देने का कोई इरादा नहीं है और वे अपनी जिम्मेदारियों पर काम जारी रखेंगे।
लेबर पार्टी के लिए बढ़ती चुनौती
फाहनबुलेह का इस्तीफा केवल एक व्यक्तिगत निर्णय नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे लेबर पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और नेतृत्व संकट का संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पार्टी के भीतर मतभेद इसी तरह बढ़ते रहे, तो आने वाले समय में सरकार की स्थिरता पर असर पड़ सकता है।











