BSF ने छह माह बाद ओडिशा के लापता युवक को परिवार से मिलाया, मानवीय पहल की हुई सराहना

BSF ने छह महीने से लापता ओडिशा के मानसिक रूप से अस्वस्थ युवक को खोजकर परिवार से मिलाया। इस मानवीय पहल की हर ओर सराहना हो रही है।

सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने छह महीने से लापता ओडिशा के एक मानसिक रूप से अस्वस्थ युवक को खोजकर उसके परिवार से मिलाया। पहचान स्थापित करने के बाद युवक को उसके पिता और भाई के सुपुर्द किया गया। इस मानवीय पहल की हर ओर सराहना हो रही है।

अमृतसर: सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए छह महीने से परिवार से बिछड़े ओडिशा के एक युवक को उसके परिजनों से मिलाने में सफलता हासिल की है। मानसिक रूप से अस्वस्थ युवक की पहचान स्थापित करने के बाद उसके पिता और भाई को अमृतसर बुलाया गया और सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उसे सुरक्षित परिवार के हवाले कर दिया गया।

छह महीने बाद परिवार को मिला बेटा

सीमा सुरक्षा बल (BSF) की इस पहल ने एक परिवार की बिछड़ी खुशियां वापस लौटा दीं। ओडिशा के बालासोर निवासी बिकाश देहुरी करीब छह महीने पहले मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण अपने घर से भटकते हुए अमृतसर पहुंच गए थे। रेलवे स्टेशन से भटकने के बाद वह गांव मुल्लाकोट क्षेत्र में रहने लगे। परिवार लगातार उनकी तलाश कर रहा था, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिल पा रहा था।

जब युवक के सुरक्षित मिलने की सूचना उसके परिजनों तक पहुंची तो उसके पिता और भाई तुरंत ओडिशा से अमृतसर पहुंचे। लंबे समय बाद बेटे को सुरक्षित देखकर परिवार भावुक हो गया और BSF के अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।

BSF ने पहचान कर परिवार से कराया संपर्क

मामले की जानकारी मिलने के बाद BSF की 100वीं बटालियन ने युवक की पहचान और उसके परिवार का पता लगाने के लिए विशेष अभियान शुरू किया। जांच के दौरान टीम गांव मुल्लाकोट पहुंची, जहां युवक सुरक्षित मिला। इसके बाद उसकी पहचान की पुष्टि की गई और उपलब्ध जानकारियों के आधार पर उसके परिवार से संपर्क स्थापित किया गया।

परिजनों के अमृतसर पहुंचने के बाद आवश्यक दस्तावेजों और पहचान संबंधी औपचारिकताएं पूरी की गईं। इसके बाद युवक को उसके पिता और भाई के सुपुर्द कर दिया गया।

अधिकारियों और जवानों की टीम ने निभाई अहम भूमिका

यह पूरा अभियान BSF की 100वीं बटालियन के कमांडेंट अजय कुमार तिवारी के निर्देशन में चलाया गया। अभियान का नेतृत्व सहायक कमांडेंट अमित पांडेय ने किया। उनके साथ अधीनस्थ अधिकारियों, जवानों और यूनिट निरीक्षक की टीम ने भी सक्रिय भूमिका निभाई।

BSF अधिकारियों के अनुसार युवक मानसिक रूप से अस्वस्थ था और इसी वजह से अपने घर से दूर भटक गया था। समय पर मिली सूचना और टीम के लगातार प्रयासों से उसकी पहचान संभव हो सकी, जिसके बाद परिवार तक पहुंचना आसान हुआ।

सामाजिक जिम्मेदारी निभाने की मिसाल बनी BSF

सीमा सुरक्षा बल ने एक बार फिर यह साबित किया कि उसकी भूमिका केवल अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं है। जरूरतमंद लोगों की सहायता करना और मानवीय जिम्मेदारियों का निर्वहन करना भी उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है।

इस अभियान ने दिखाया कि सुरक्षा बलों की संवेदनशील पहल किसी परिवार की बिछड़ी खुशियां वापस लौटा सकती है। छह महीने बाद बेटे को सुरक्षित अपने बीच पाकर परिवार ने BSF के सभी अधिकारियों और जवानों का धन्यवाद किया। स्थानीय लोगों ने भी इस मानवीय कार्य की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी पहल समाज में विश्वास और मानवता का संदेश देती है।

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