हजारीबाग के चौपारण थाना क्षेत्र में 12 वर्षीय बच्चे की सांप काटने से मौत हो गई। इसके बाद परिजनों ने अंधविश्वास में उसे तंत्र-मंत्र और गोबर-गौमूत्र में रखा, जिससे इलाज में देरी हुई और दुखद स्थिति बनी रही।
हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग जिले में एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली घटना सामने आई है। चौपारण थाना क्षेत्र के रैंबो करमा गांव में 12 वर्षीय बच्चे की सांप के काटने से मौत हो गई। यह हादसा उस समय हुआ जब बच्चा अपनी मां के साथ घर के अंदर जमीन पर सो रहा था।
रविवार तड़के करीब 4 बजे बच्चा अचानक चीखने लगा। आवाज सुनकर मां की नींद खुली और जैसे ही उन्होंने लाइट जलाई, उन्हें एक जहरीला करैत सांप बच्चे के पास दिखाई दिया। यह देखकर परिवार में अफरा-तफरी मच गई और तुरंत समझ आ गया कि बच्चे को सांप ने काट लिया है।
अस्पताल ले जाने के बाद डॉक्टरों ने किया मृत घोषित
परिजन बिना देरी किए बच्चे को बरही स्थित अनुमंडल अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। बच्चे की पहचान प्रवीण रविदास के पुत्र ऋषि कुमार रविदास के रूप में हुई है।
डॉक्टरों के अनुसार, सांप के काटने के बाद समय पर इलाज न मिलने के कारण बच्चे की जान नहीं बचाई जा सकी। अस्पताल में मृत घोषित होने के बाद परिवार गहरे सदमे में चला गया।
घर लौटने के बाद अंधविश्वास के चक्कर में फंसा परिवार
अस्पताल से निराश होकर लौटते समय परिवार को कुछ लोगों ने एक तांत्रिक के बारे में जानकारी दी, जो सांप के जहर को “ठीक” करने का दावा करता था। इस उम्मीद में परिजनों ने उस तांत्रिक से संपर्क किया और उसे गांव बुला लिया। इसके बाद जो हुआ, उसने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया।
12 घंटे तक चला तंत्र-मंत्र और “इलाज” का दावा
गांव में पहुंचे तांत्रिक ने मृत बच्चे को एक गड्ढे में रखा और उसके शरीर पर गोबर और गोमूत्र का लेप लगाया। उसने दावा किया कि वह तंत्र-मंत्र के जरिए बच्चे को 12 घंटे के भीतर जीवित कर देगा।
इस दौरान गांव में बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए। कई लोग इस “चमत्कार” को देखने के लिए वहां मौजूद रहे, जबकि परिवार उम्मीद और अंधविश्वास के बीच झूलता रहा।
लगभग 12 घंटे तक यह प्रक्रिया चलती रही, लेकिन बच्चे की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया। बाद में तांत्रिक ने यह कहकर वहां से निकलने की कोशिश की कि सांप का जहर अधिक फैल जाने के कारण अब कुछ नहीं किया जा सकता।
अंत में शव को दफनाया गया, गांव में मातम
तांत्रिक के चले जाने के बाद परिवार को आखिरकार सच्चाई स्वीकार करनी पड़ी। देर रात परिजनों ने बच्चे के शव को गांव के ही एक खेत में ले जाकर अंतिम संस्कार कर दिया।
पूरे गांव में शोक और मातम का माहौल फैल गया। मासूम बच्चे की मौत और उसके बाद चले अंधविश्वास ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया।
करैत सांप: भारत के सबसे जहरीले सांपों में से एक
विशेषज्ञों के अनुसार करैत सांप भारत के अत्यधिक विषैले सांपों में शामिल है। इसका जहर तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) को प्रभावित करता है और समय पर इलाज न मिलने पर यह जानलेवा साबित हो सकता है।
चिकित्सकों का कहना है कि सांप काटने के मामलों में सबसे महत्वपूर्ण है तुरंत अस्पताल पहुंचना और एंटी-स्नेक वेनम का समय पर उपयोग। किसी भी प्रकार का घरेलू उपचार, झाड़-फूंक या देरी जानलेवा साबित हो सकती है।
झाड़-फूंक और अंधविश्वास ने बढ़ाई त्रासदी
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र कितनी गहराई तक फैला हुआ है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि बच्चे को तुरंत अस्पताल ले जाया गया होता, तो उसकी जान बचाई जा सकती थी।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार यह अपील करते हैं कि सांप काटने की स्थिति में किसी भी प्रकार की देरी या तांत्रिक उपायों पर भरोसा करना बेहद खतरनाक है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी
डॉक्टरों का कहना है कि भारत में सांप काटने से होने वाली मौतों का एक बड़ा कारण समय पर इलाज न मिलना और झाड़-फूंक में समय बर्बाद करना है। सही समय पर एंटी-वेनम और मेडिकल देखभाल मिलने से अधिकतर मामलों में मरीज की जान बचाई जा सकती है।
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि सांप काटने के बाद मरीज को शांत रखना, हिलने-डुलने से रोकना और तुरंत अस्पताल पहुंचाना सबसे जरूरी कदम है।











