ग्वालियर में डिजिटल अरेस्ट के जरिए 1.58 करोड़ रुपये की साइबर ठगी मामले में पुलिस ने पहली गिरफ्तारी की है। महाराष्ट्र के नासिक से एक कारोबारी को पकड़ा गया, जिसके बैंक खाते में ठगी की रकम का हिस्सा ट्रांसफर हुआ था। मामले में अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
ग्वालियर: ग्वालियर में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 1.58 करोड़ रुपये की साइबर ठगी के मामले में क्राइम ब्रांच को पहली बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने महाराष्ट्र के नासिक से एक कारोबारी को गिरफ्तार किया है, जिसके बैंक खाते में ठगी की रकम का हिस्सा पहुंचा था। जांच एजेंसियां अब पूरे साइबर नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।
33 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर महिला से कराई करोड़ों की ट्रांसफर

क्राइम ब्रांच की जांच में सामने आया कि ग्वालियर के लश्कर क्षेत्र में रहने वाली 69 वर्षीय रिटायर्ड लैब टेक्नीशियन को साइबर ठगों ने खुद को टेलीकॉम विभाग, आईपीएस और सीबीआई अधिकारी बताकर अपने जाल में फंसा लिया। ठगों ने दावा किया कि उनके नाम से जारी मोबाइल नंबर का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में किया जा रहा है। गिरफ्तारी और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर महिला को लगातार 33 दिनों तक मानसिक दबाव में रखा गया और अलग-अलग बैंक खातों में कुल 1.58 करोड़ रुपये ट्रांसफर करा लिए।
नासिक से पहली गिरफ्तारी, बैंक खाते में पहुंचे थे 19.50 लाख रुपये
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने बैंक ट्रांजैक्शन की पड़ताल की तो पता चला कि ठगी की रकम का 19.50 लाख रुपये का हिस्सा महाराष्ट्र के नासिक स्थित एक निजी कंपनी के आईसीआईसीआई बैंक खाते में भेजा गया था। जांच के आधार पर क्राइम ब्रांच की टीम नासिक पहुंची और कंपनी से जुड़े कारोबारी बिट्ठल फलसे को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर ग्वालियर लाया जा रहा है, जहां उससे पूरे नेटवर्क के संबंध में पूछताछ की जाएगी।
पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि आर्थिक तंगी के कारण उसने इंटरनेट पर लोन की तलाश की थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात एक म्यूल अकाउंट एजेंट से हुई, जिसने बैंक खाता इस्तेमाल करने के बदले कमीशन देने का प्रस्ताव दिया। आरोपी का कहना है कि उसे यह जानकारी नहीं थी कि खाते में आने वाली रकम साइबर ठगी से जुड़ी है। पुलिस उसके इस दावे की भी जांच कर रही है।
चार राज्यों में भेजी गई थी ठगी की रकम, नेटवर्क की जांच जारी
जांच में यह भी सामने आया कि ठगी की पूरी रकम चार अलग-अलग राज्यों के बैंक खातों में ट्रांसफर की गई थी। इनमें केरल, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के खाते शामिल हैं। पुलिस इन खातों के संचालकों, संबंधित कंपनियों और म्यूल अकाउंट नेटवर्क की विस्तृत जांच कर रही है।
क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के अनुसार यह एक संगठित साइबर ठगी गिरोह का मामला है, जिसमें कई राज्यों के लोग शामिल हो सकते हैं। डिजिटल ट्रेल, बैंकिंग रिकॉर्ड और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अन्य आरोपियों की पहचान की जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि जल्द ही इस मामले में और गिरफ्तारियां होंगी तथा पूरे साइबर नेटवर्क का खुलासा किया जाएगा।









