हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के तीन उपडाकघरों में डाक जीवन बीमा और ग्रामीण डाक जीवन बीमा की प्रीमियम राशि में कथित गड़बड़ी के मामले में सीबीआई ने तत्कालीन उपडाकपाल राजीव कुमार के खिलाफ तीन एफआईआर दर्ज की हैं। विभागीय जांच में लाखों रुपये की अनियमितता सामने आई है।
Shimla: चंबा जिले के भलेई, सलूणी और सुल्तानपुर उपडाकघरों में डाक जीवन बीमा प्रीमियम राशि में कथित गड़बड़ी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा ने तत्कालीन उपडाकपाल राजीव कुमार के खिलाफ तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं। आरोप है कि ग्राहकों से प्राप्त बीमा प्रीमियम और ऋण पुनर्भुगतान की रकम को रिकॉर्ड में दर्ज करने के बावजूद पूरी राशि सरकारी खाते में जमा नहीं कराई गई।
ग्राहकों से राशि लेने के बाद सरकारी खाते में नहीं हुई पूरी जमा
सीबीआई के अनुसार, राजीव कुमार ने भलेई, सलूणी और सुल्तानपुर उपडाकघरों में उपडाकपाल के रूप में कार्यरत रहते हुए ग्राहकों से डाक जीवन बीमा (PLI) और ग्रामीण डाक जीवन बीमा (RPLI) की प्रीमियम राशि तथा ऋण पुनर्भुगतान की रकम नकद प्राप्त की थी। आरोप है कि इन भुगतानों को संबंधित पॉलिसियों में दर्ज तो किया गया, लेकिन पूरी धनराशि सरकारी लेखा प्रणाली में जमा नहीं कराई गई।
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विभागीय जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने के बाद मामला सीबीआई को सौंपा गया। इसके बाद भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए गए।
भलेई उपडाकघर में सबसे बड़ी अनियमितता
भलेई उपडाकघर में अप्रैल 2022 से सितंबर 2023 के बीच छह मामलों में प्रारंभिक जांच के दौरान 6.14 लाख रुपये से अधिक का अंतर पाया गया। बाद में विभागीय जांच में कथित गड़बड़ी की कुल राशि बढ़कर 17.94 लाख रुपये से अधिक आंकी गई।
डाक विभाग के अनुसार, इस मामले में आरोपित से ब्याज सहित 19.15 लाख रुपये से अधिक की राशि वसूल की जा चुकी है। हालांकि जांच एजेंसियां अब भी पूरे मामले की विस्तृत पड़ताल कर रही हैं।
सलूणी और सुल्तानपुर में भी सामने आए मामले
सलूणी उपडाकघर में वर्ष 2018 के चार मामलों को एफआईआर का आधार बनाया गया है। शुरुआती जांच में 1.25 लाख रुपये से अधिक का अंतर मिला था, जबकि विस्तृत जांच में कथित अनियमितता 3.31 लाख रुपये तक पहुंच गई। इस मामले में भी ब्याज सहित 3.75 लाख रुपये से अधिक की वसूली की जा चुकी है।
वहीं सुल्तानपुर उपडाकघर में मार्च 2019 से सितंबर 2021 के बीच के चार मामलों की जांच में 37 हजार रुपये से अधिक की प्रारंभिक गड़बड़ी सामने आई। बाद में यह राशि बढ़कर 1.06 लाख रुपये से अधिक आंकी गई। विभाग ने आरोपित से ब्याज सहित लगभग 1.44 लाख रुपये की वसूली कर ली है।
जांच अभी जारी, और मामले सामने आने की आशंका
डाक विभाग का कहना है कि कई मामलों की जांच अभी भी जारी है। कुछ प्रकरणों को आरोपपत्र में शामिल किया जाना बाकी है, जबकि अन्य मामलों की पड़ताल चल रही है। विभाग और जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि सरकारी खाते में जमा न हुई कुल राशि कितनी थी और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया।
अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने के साथ अन्य संबंधित मामलों का भी खुलासा हो सकता है। फिलहाल सीबीआई दर्ज एफआईआर के आधार पर मामले की विस्तृत जांच कर रही है और उपलब्ध दस्तावेजों तथा वित्तीय रिकॉर्ड की पड़ताल की जा रही है।









