आज की दुनिया 'इंस्टेंट' है हमें दो मिनट में नूडल्स चाहिए, तुरंत मैसेज का रिप्लाई चाहिए और रातोंरात सफलता चाहिए। हम इंतजार करना भूल गए हैं। लेकिन, जीवन की सबसे बड़ी और महान उपलब्धियां वक्त मांगती हैं। यह कहानी चीन के एक अनोखे बांस के पेड़ की है, जो प्रकृति का सबसे बड़ा उदाहरण है कि धैर्य का फल कितना मीठा और विशाल होता है।
मुख्य कहानी
चीन के एक सुदूर गाँव में एक मेहनती किसान रहता था। एक दिन, उसे एक बहुत ही खास किस्म के 'चीनी बांस' (Chinese Bamboo) के बीज मिले। उसने सुना था कि यह बांस बहुत अद्भुत होता है।
किसान ने अपने खेत की सबसे उपजाऊ जमीन चुनी और वहां उन बीजों को बो दिया। उसने बहुत लगन से उनकी देखभाल शुरू की। वह रोज उन्हें पानी देता, समय पर खाद डालता और यह सुनिश्चित करता कि उन्हें पर्याप्त धूप मिले।
पहला साल बीत गया। किसान रोज उम्मीद भरी नजरों से जमीन को देखता, लेकिन वहां एक छोटा सा अंकुर भी नहीं फूटा। जमीन वैसी की वैसी बंजर दिख रही थी।
दूसरा साल आया। किसान ने अपनी मेहनत में कोई कमी नहीं की। वह रोज पानी और खाद देता रहा। लेकिन नतीजा वही शून्य। जमीन के ऊपर कुछ भी दिखाई नहीं दिया।
तीसरा और चौथा साल भी ऐसे ही बीत गया। अब गाँव के लोग किसान का मजाक उड़ाने लगे। वे कहते, 'अरे मूर्ख! तू क्यों इस बंजर जमीन पर अपना समय और पानी बर्बाद कर रहा है? चार साल हो गए, अगर कुछ उगना होता तो अब तक उग जाता। मान ले कि तेरे बीज खराब थे।'
किसान को भी कभी कभी निराशा होती थी। उसे भी लगता कि शायद लोग सही कह रहे हैं। लेकिन उसके अंदर एक अटूट विश्वास था। उसने लोगों की बातों पर ध्यान नहीं दिया और अपना कर्म करता रहा।
पांचवां साल आया। अब तक किसान की जगह कोई और होता तो शायद हार मान चुका होता। लेकिन किसान ने धैर्य नहीं छोड़ा।
और फिर, पांचवें साल के एक दिन, उसकी तपस्या रंग लाई। उसे जमीन पर एक बहुत ही नन्हा सा, हरे रंग का अंकुर दिखाई दिया। किसान की खुशी का ठिकाना नहीं था। गाँव वालों ने देखा तो बोले, 'अरे! पांच साल में बस इतना सा?'
लेकिन असली चमत्कार तो अब शुरू होने वाला था।
उस छोटे से अंकुर के निकलने के बाद, अगले सिर्फ 6 हफ्तों (डेढ़ महीने) के अंदर, वह बांस का पौधा देखते ही देखते बढ़कर 90 फीट (लगभग एक 8-9 मंजिला इमारत के बराबर) ऊंचा हो गया!
यह दृश्य अभूतपूर्व था। जिन लोगों ने किसान का मजाक उड़ाया था, वे अब अपनी आँखों पर विश्वास नहीं कर पा रहे थे। एक विशाल और घना बांस का जंगल वहाँ खड़ा था।
सब हैरान थे कि जो पौधा 5 साल तक दिखा ही नहीं, वह 6 हफ्तों में इतना विशाल कैसे हो गया?
सच्चाई यह थी कि उन पहले 5 सालों में, जब जमीन के ऊपर कुछ नहीं दिख रहा था, तब वह पौधा सो नहीं रहा था। वह जमीन के नीचे अपनी 'जड़ें' (Roots) मजबूत कर रहा था। वह एक ऐसा विशाल और गहरा जाल बिछा रहा था जो भविष्य में 90 फीट ऊंचे तने के भारी वजन को संभाल सके।
अगर वह पौधा अपनी जड़ें मजबूत किए बिना पहले साल ही ऊपर बढ़ जाता, तो हवा का पहला झोंका ही उसे उखाड़ फेंकता।
सीख
यह कहानी सिखाती है कि बड़ी सफलता समय और धैर्य मांगती है। जैसे बांस का पेड़ 5 साल तक जमीन के नीचे अपनी जड़ें मजबूत करता है, वैसे ही हमें भी संघर्ष के दिनों में निराश नहीं होना चाहिए। निरंतर मेहनत करते रहें, जब आपकी नींव मजबूत होगी, तो सफलता भी आसमान छुएगी।













