COBALT Platform: अब स्मार्टफोन से दुनिया के किसी भी कोने से कंट्रोल कर सकेंगे रोबोटिक आर्म

Georgia Tech का COBALT प्लेटफॉर्म स्मार्टफोन से रिमोट रोबोटिक आर्म कंट्रोल करने की सुविधा देता है और AI ट्रेनिंग के लिए डेटा जुटाने में मदद करता है।

Georgia Tech के शोधकर्ताओं ने COBALT नाम का नया प्लेटफॉर्म विकसित किया है, जो स्मार्टफोन के जरिए रोबोटिक आर्म को रिमोटली कंट्रोल करने की सुविधा देता है। यह तकनीक रोबोटिक्स को आसान बनाने के साथ AI ट्रेनिंग के लिए डेटा जुटाने में भी मदद करेगी।

Tech: Georgia Institute of Technology के शोधकर्ताओं ने COBALT नाम का एक नया प्लेटफॉर्म विकसित किया है, जो स्मार्टफोन को रोबोट कंट्रोलर में बदल देता है। इस तकनीक की मदद से यूजर्स इंटरनेट के जरिए दूर बैठे रोबोटिक आर्म को नियंत्रित कर सकते हैं। इसका उद्देश्य रोबोटिक्स को आम लोगों के लिए सुलभ बनाना और AI सिस्टम्स के लिए बेहतर ट्रेनिंग डेटा जुटाना है।

स्मार्टफोन बना रोबोट कंट्रोलर

Georgia Tech के People, AI & Robotics (PAIR) Lab द्वारा विकसित COBALT प्लेटफॉर्म रोबोटिक्स की दुनिया में एक नया कदम माना जा रहा है। यह सिस्टम स्मार्टफोन को मोशन कंट्रोलर की तरह इस्तेमाल करता है, जिससे यूजर्स केवल फोन को मूव करके रोबोटिक आर्म को नियंत्रित कर सकते हैं। रोबोट यूजर के मूवमेंट को रियल टाइम में फॉलो करता है और वस्तुओं को उठाने, स्थान बदलने तथा छोड़ने जैसे काम आसानी से कर सकता है।

COBALT Platform: अब स्मार्टफोन से दुनिया के किसी भी कोने से कंट्रोल कर सकेंगे रोबोटिक आर्म

शोधकर्ताओं ने सिस्टम को इस तरह डिजाइन किया है कि रोबोटिक्स का कोई अनुभव न रखने वाला व्यक्ति भी इसे आसानी से इस्तेमाल कर सके। परीक्षणों के दौरान भारत, इंडोनेशिया और पाकिस्तान समेत कई देशों के प्रतिभागियों ने अपने स्मार्टफोन के जरिए Georgia Tech में मौजूद रोबोटिक आर्म को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया।

AI ट्रेनिंग के लिए जुटाया जाएगा बड़ा डेटा

COBALT का एक प्रमुख उद्देश्य केवल रिमोट रोबोट कंट्रोल उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल्स को ट्रेन करने के लिए जरूरी डेटा एकत्र करना भी है। आधुनिक रोबोट्स को किसी कार्य को सही ढंग से सीखने के लिए बड़ी मात्रा में प्रशिक्षण डेटा की आवश्यकता होती है।

शोधकर्ताओं का मानना है कि यदि दुनिया भर के स्मार्टफोन यूजर्स इस प्लेटफॉर्म से जुड़ते हैं, तो विभिन्न प्रकार के मानव व्यवहार और नियंत्रण पैटर्न का विशाल डेटासेट तैयार किया जा सकता है। इससे भविष्य के AI-संचालित रोबोट अधिक सक्षम और कुशल बन सकेंगे।

शिक्षा और उद्योग में दिख रहा बड़ा अवसर

Georgia Tech ने हाल ही में हाई स्कूल छात्रों के सामने भी इस तकनीक का प्रदर्शन किया। छात्रों ने अपने स्मार्टफोन की मदद से दूर मौजूद रोबोटिक आर्म को नियंत्रित किया। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह तकनीक उन स्कूलों और संस्थानों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है, जहां महंगे रोबोटिक्स उपकरण उपलब्ध नहीं हैं।

भविष्य में इसका उपयोग उद्योगों में भी किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि फैक्ट्री, वेयरहाउस और घरों में काम करने वाले रोबोट कई कार्य स्वतः कर सकेंगे, जबकि जटिल परिस्थितियों में वे मानव सहायता मांग सकते हैं। ऐसे मामलों में लोग दूर बैठकर स्मार्टफोन के जरिए रोबोट को निर्देश दे सकेंगे।

पारंपरिक कंट्रोलर्स से बेहतर रहा अनुभव

शोधकर्ताओं के अनुसार, परीक्षणों में शामिल अधिकांश यूजर्स ने स्मार्टफोन कंट्रोल को वर्चुअल रियलिटी हेडसेट, कीबोर्ड और पारंपरिक कंट्रोलर्स की तुलना में अधिक सहज और सुविधाजनक बताया। स्मार्टफोन के जरिए नियंत्रण करना लोगों को अधिक स्वाभाविक महसूस हुआ, जबकि इससे उच्च गुणवत्ता वाला कंट्रोल डेटा भी प्राप्त हुआ।

यह प्लेटफॉर्म WebRTC तकनीक पर आधारित है, जिसका उपयोग वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सेवाओं में भी किया जाता है। यही तकनीक नेटवर्क विलंबता को कम रखने और रोबोट की गतिविधियों को रियल टाइम में प्रतिक्रिया देने योग्य बनाती है।

COBALT परियोजना को हाल ही में ऑस्ट्रिया की राजधानी Vienna में आयोजित IEEE International Conference on Robotics and Automation में प्रस्तुत किया गया, जहां शोधकर्ताओं ने इस तकनीक और इसके वैश्विक रिमोट ऑपरेशन नेटवर्क का प्रदर्शन किया।

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