CMR रिपोर्ट: हाईवे पर 79% स्मार्टफोन यूजर्स को कॉल ड्रॉप की समस्या, बिजनेस पर पड़ रहा असर

CMR रिपोर्ट के अनुसार हाईवे पर 79% स्मार्टफोन यूजर्स कॉल ड्रॉप और नेटवर्क समस्याओं से जूझ रहे हैं, जिससे बिजनेस और उत्पादकता प्रभावित हो रही है।

CMR की नई रिपोर्ट के अनुसार भारत में हाईवे पर सफर करने वाले 79% स्मार्टफोन यूजर्स को कॉल ड्रॉप और नेटवर्क समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इससे प्रोफेशनल्स की उत्पादकता, क्लाइंट कम्युनिकेशन और बिजनेस अवसरों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

Tech: CyberMedia Research (CMR) की ताजा रिपोर्ट में सामने आया है कि भारतीय हाईवे पर यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में स्मार्टफोन यूजर्स नेटवर्क कनेक्टिविटी की समस्याओं से जूझ रहे हैं। सर्वे में शामिल अधिकांश प्रतिभागियों ने बताया कि कॉल ड्रॉप और कमजोर सिग्नल की वजह से न केवल उनकी बातचीत बाधित होती है, बल्कि कई मामलों में बिजनेस अवसर और क्लाइंट रिलेशनशिप भी प्रभावित होते हैं।

हाईवे यात्रा के दौरान नेटवर्क बना बड़ी चुनौती

CyberMedia Research (CMR) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के हाईवे पर सफर करने वाले करीब 79 प्रतिशत स्मार्टफोन यूजर्स को कॉल ड्रॉप या नेटवर्क कनेक्टिविटी की समस्या का सामना करना पड़ता है। सर्वे नई दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और कोलकाता के 18 से 35 वर्ष आयु वर्ग के 2,000 स्मार्टफोन यूजर्स के बीच किया गया। रिपोर्ट से पता चलता है कि मोबाइल नेटवर्क का विस्तार होने के बावजूद यात्रा के दौरान लगातार और भरोसेमंद कनेक्टिविटी अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

CMR रिपोर्ट: हाईवे पर 79% स्मार्टफोन यूजर्स को कॉल ड्रॉप की समस्या, बिजनेस पर पड़ रहा असर

CMR के इंडस्ट्री रिसर्च ग्रुप के वाइस प्रेसिडेंट प्रभु राम के अनुसार, भारत ने मोबाइल कवरेज बढ़ाने में महत्वपूर्ण प्रगति की है, लेकिन हाईवे, मेट्रो और इनडोर लो-सिग्नल क्षेत्रों में नेटवर्क की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करना अभी भी टेलीकॉम इंडस्ट्री के लिए चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

कॉल ड्रॉप से प्रभावित हो रहे प्रोफेशनल और बिजनेस यूजर्स

रिपोर्ट में सामने आया कि बिजनेस कम्युनिकेशन के लिए फोन का उपयोग करने वाले 64 प्रतिशत प्रतिभागियों ने कॉल ड्रॉप की वजह से बिक्री के अवसर या संभावित क्लाइंट डील खोने की बात स्वीकार की। वहीं लगभग तीन में से दो लोगों का मानना था कि कमजोर नेटवर्क या बार-बार कॉल कटने के कारण वे ऐसे ग्राहकों को खो बैठे, जिनके साथ कारोबार की संभावना थी।

नेटवर्क समस्याओं का असर केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं है। सर्वे में शामिल 83 प्रतिशत लोगों ने कहा कि महत्वपूर्ण बातचीत के दौरान कॉल कटने से उन्हें निराशा और असहायता महसूस होती है। इसके अलावा 71 प्रतिशत प्रतिभागियों को कॉल ड्रॉप के बाद ग्राहकों या संपर्कों को दोबारा कॉल करना पड़ा, जिससे उनकी पेशेवर छवि पर भी असर पड़ने की चिंता सामने आई।

स्मार्टफोन डिजाइन और तकनीक से मिल सकती है राहत

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि यात्रा के दौरान बेहतर नेटवर्क अनुभव देने में स्मार्टफोन की हार्डवेयर क्षमता महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। विशेष रूप से ट्रिपल-सिग्नल चिपसेट तकनीक वाले स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले हाईवे यात्रियों ने बेहतर परिणाम दर्ज किए हैं।

सर्वे में शामिल ऐसे 81 प्रतिशत यूजर्स ने कहा कि नया डिवाइस अपनाने के बाद उन्हें पहले की तुलना में बेहतर सिग्नल प्रदर्शन मिला। वहीं 74 प्रतिशत लोगों ने हाईवे यात्रा के दौरान अधिक भरोसेमंद कॉलिंग अनुभव की जानकारी दी। इसके अलावा 72 प्रतिशत प्रतिभागियों ने बताया कि कमजोर कवरेज वाले क्षेत्रों से गुजरने के बाद उनके फोन में सिग्नल तेजी से वापस आने लगे।

स्मार्टफोन बाजार पर भी दिख रहा दबाव

CMR की एक अन्य रिपोर्ट में भारतीय स्मार्टफोन बाजार की स्थिति पर भी चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, DRAM और NAND फ्लैश मेमोरी की बढ़ती कीमतों के कारण 2026 की पहली तिमाही में स्मार्टफोन शिपमेंट्स में सालाना आधार पर 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

मेमोरी कंपोनेंट्स की लागत बढ़ने से कंपनियों को स्मार्टफोन की कीमतों में वृद्धि करनी पड़ी है। इसका असर खासतौर पर कीमत को लेकर संवेदनशील ग्राहकों पर पड़ा है, जिनमें से कई लोगों ने फिलहाल नया स्मार्टफोन खरीदने या अपग्रेड करने का फैसला टाल दिया है। रिपोर्ट संकेत देती है कि आने वाले समय में नेटवर्क अनुभव और डिवाइस कीमत दोनों भारतीय स्मार्टफोन बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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