ईरान ने अमेरिका पर सीजफायर तोड़ने का गंभीर आरोप लगाया है। तेहरान का कहना है कि अमेरिकी हमलों से क्षेत्रीय सुरक्षा खतरे में है। जवाबी कार्रवाई और ड्रोन हमलों से पश्चिम एशिया में तनाव तेजी से बढ़ रहा है और हालात बिगड़ते जा रहे हैं।
ईरान/अमिका वॉर: मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है। ईरान, अमेरिका और इज़राइल से जुड़े हालिया सैन्य और राजनीतिक घटनाक्रमों ने क्षेत्रीय स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिका पर सीजफायर तोड़ने का आरोप लगाते हुए कहा है कि उसकी सैन्य कार्रवाइयों से पूरे क्षेत्र की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। वहीं, अमेरिका ने भी ईरानी ड्रोन और मिसाइल गतिविधियों पर जवाबी कार्रवाई के दावे किए हैं।
ईरान का आरोप: अमेरिका ने सीजफायर का उल्लंघन किया
ईरान के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बयान जारी करते हुए कहा कि अमेरिका ने सीरिक क्षेत्र और केश्म द्वीप पर स्थित ईरानी रडार और निगरानी केंद्रों पर हमला किया है। तेहरान का दावा है कि ये हमले उस सीजफायर समझौते का सीधा उल्लंघन हैं, जिसे हालिया तनाव को कम करने के लिए लागू किया गया था।
ईरान ने चेतावनी दी है कि इन हमलों के बाद जो भी हालात पैदा होंगे, उसकी पूरी जिम्मेदारी अमेरिका की होगी। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि वॉशिंगटन तनाव कम करने के बजाय सैन्य कार्रवाई को प्राथमिकता दे रहा है, जिससे क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात बन सकते हैं।
अमेरिका का जवाब: ड्रोन और रडार साइट्स पर कार्रवाई का दावा
दूसरी ओर, अमेरिका की सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने दावा किया है कि उसने होर्मुज स्ट्रेट के पास दो ईरानी ‘वन-वे अटैक ड्रोन’ को मार गिराया है। अमेरिकी सेना का कहना है कि ये ड्रोन अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात के लिए खतरा बन रहे थे।
इसके अलावा अमेरिका ने यह भी दावा किया है कि उसने केश्म आइलैंड स्थित रडार साइट्स को निशाना बनाया है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रही थीं। हालांकि, अमेरिका ने यह स्पष्ट नहीं किया कि इन कार्रवाइयों में किस प्रकार के हथियारों का उपयोग किया गया।
अमेरिकी प्रशासन ने यह भी कहा है कि उसके सैनिक क्षेत्र में किसी भी संभावित ईरानी हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
लेबनान में युद्ध जैसे हालात, इज़राइल के हमलों में बढ़ी तबाही
इस पूरे घटनाक्रम के बीच लेबनान की स्थिति भी बेहद गंभीर बनी हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इज़राइल के लगातार हवाई हमलों में अब तक हजारों लोगों की जान जा चुकी है और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं।
हालिया आंकड़ों के मुताबिक, 2 मार्च से शुरू हुए हमलों में अब तक 3,500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। शनिवार को हुए ताज़ा हमलों में दक्षिणी लेबनान में कई इलाकों को निशाना बनाया गया, जिसमें 10 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।
इन हमलों के बाद कई क्षेत्रों में लोगों को घर खाली करने के आदेश दिए गए हैं, जिससे मानवीय संकट और गहरा गया है। स्थानीय प्रशासन राहत और बचाव कार्यों में जुटा हुआ है, लेकिन लगातार हो रहे हमलों से स्थिति नियंत्रित करना मुश्किल हो रहा है।
हिजबुल्लाह का दावा: इज़राइली टैंकों और सैनिकों को निशाना बनाया
लेबनान स्थित संगठन हिजबुल्लाह ने दावा किया है कि उसके लड़ाकों ने दक्षिणी लेबनान में इज़राइल के मर्कावा टैंक और सैन्य ठिकानों पर हमला किया है। संगठन का कहना है कि वह लेबनान की रक्षा के लिए लगातार सैन्य कार्रवाई कर रहा है।
![]()
हिजबुल्लाह ने यह भी दावा किया कि उसने शनिवार को कम से कम 25 अलग-अलग सैन्य अभियानों को अंजाम दिया। हालांकि इज़राइल की ओर से इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है।
अमेरिका की फ्रीज संपत्तियों को लेकर नई योजना पर विचार
अमेरिका अब ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को लेकर एक नई रणनीति पर विचार कर रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रम्प प्रशासन इन संपत्तियों का उपयोग कुवैत, बहरीन और अन्य खाड़ी देशों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए कर सकता है।
अमेरिकी ट्रेजरी विभाग इस प्रस्ताव पर काम कर रहा है, जिसमें ईरान की जब्त संपत्तियों को क्षेत्रीय पुनर्निर्माण कार्यों में लगाने की योजना शामिल है। इस योजना के तहत भविष्य में संभावित हमलों से हुए नुकसान की भरपाई भी की जा सकती है।
हालांकि, इस प्रस्ताव पर अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और इसे लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद की संभावना जताई जा रही है।
यमन ने ईरानी हमलों की निंदा की
यमन ने कुवैत और बहरीन पर हुए कथित ईरानी हमलों की कड़ी निंदा की है। यमन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ऐसे हमले क्षेत्रीय संप्रभुता और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा हैं।
बयान में ईरान पर आरोप लगाया गया कि उसकी कार्रवाई आक्रामक और अस्थिरता फैलाने वाली है। यमन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वह मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को रोकने के लिए हस्तक्षेप करे।
ईरान-अमेरिका डील 24 अरब डॉलर पर अटकी
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच संभावित शांति समझौता अभी भी अटका हुआ है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, यह समझौता ईरान की लगभग 24 अरब डॉलर की फ्रीज संपत्तियों को जारी करने पर निर्भर है।
ईरान चाहता है कि शुरुआती चरण में कम से कम 12 अरब डॉलर जारी किए जाएं, जबकि अमेरिका इस मांग पर पूरी तरह सहमत नहीं है। इसी वजह से बातचीत आगे नहीं बढ़ पा रही है।










