कॉकरोच-जनता पार्टी आंदोलन पर बनेगी फिल्म: जयपुर में ‘द एक्सीडेंटल कॉकरोच पार्टी’ की घोषणा

गोविंद देव ‘ब्रह्म’ ने CJP आंदोलन पर आधारित फिल्म ‘द एक्सीडेंटल कॉकरोच पार्टी’ की घोषणा की। फिल्म में छात्र आंदोलन, पेपर लीक और राजनीतिक पहलुओं को दिखाएंगे

जयपुर में गोविंद देव ‘ब्रह्म’ ने CJP आंदोलन पर आधारित फिल्म ‘द एक्सीडेंटल कॉकरोच पार्टी’ बनाने की घोषणा की। उनका कहना है कि फिल्म पेपर लीक से जुड़े छात्र आंदोलन और उससे जुड़े कथित राजनीतिक पहलुओं को रचनात्मक रूप में प्रस्तुत करेगी।

जयपुर: राजस्थान की राजधानी जयपुर में गोवंश अखाड़ा के प्रमुख गोविंद देव ‘ब्रह्म’ ने छात्र आंदोलन और कॉकरोच-जनता पार्टी (CJP) से जुड़े घटनाक्रम पर आधारित नई फिल्म ‘द एक्सीडेंटल कॉकरोच पार्टी’ बनाने की घोषणा की है। उनका दावा है कि यह फिल्म आंदोलन के दौरान सामने आए घटनाक्रमों के साथ-साथ उन पहलुओं को भी दर्शाएगी, जो आम जनता की नजरों से दूर रहे।

मीडिया से बातचीत में गोविंद देव ‘ब्रह्म’ ने कहा कि फिल्म का उद्देश्य किसी छात्र आंदोलन का विरोध करना नहीं, बल्कि आंदोलन के दौरान कथित रूप से हुई राजनीतिक गतिविधियों और विवादित पहलुओं को एक सिनेमाई रूप में प्रस्तुत करना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पेपर लीक से प्रभावित छात्रों की मांगें पूरी तरह उचित थीं, लेकिन उनका मानना है कि आंदोलन का इस्तेमाल कुछ अन्य उद्देश्यों के लिए भी किया गया।

छात्रों की मांगों को बताया जायज

गोविंद देव ‘ब्रह्म’ ने कहा कि पेपर लीक जैसे मामलों ने हजारों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है और इस मुद्दे पर छात्रों का विरोध पूरी तरह न्यायसंगत था। उन्होंने कहा कि जिन युवाओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में वर्षों का समय लगाया और बाद में पेपर लीक की वजह से निराश हुए, उनकी पीड़ा वास्तविक है। उन्होंने कहा कि फिल्म छात्रों की समस्याओं को नकारने के लिए नहीं बनाई जा रही, बल्कि यह दिखाने का प्रयास करेगी कि आंदोलन के दौरान किन परिस्थितियों ने विवाद को और बड़ा बनाया।

फिल्म में आंदोलन की ‘अनदेखी परतें’ दिखाने का दावा

गोविंद देव ‘ब्रह्म’ के अनुसार फिल्म का मुख्य विषय आंदोलन के पीछे मौजूद उन कथित घटनाओं और परिस्थितियों को सामने लाना है, जिनकी चर्चा सार्वजनिक रूप से कम हुई। उनका दावा है कि आंदोलन से जुड़े कुछ लोगों ने उन्हें ऐसे अनुभव साझा किए हैं, जिनसे यह संकेत मिलता है कि यदि आंदोलन कुछ और दिनों तक चलता तो हालात और गंभीर हो सकते थे। हालांकि उन्होंने इन दावों के समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया। ऐसे में फिल्म में दिखाई जाने वाली घटनाओं को दर्शकों के सामने एक रचनात्मक प्रस्तुति के रूप में देखा जाएगा।

क्या फिल्म में राजनीतिक पहलू भी होंगे?

एक सवाल के जवाब में गोविंद देव ‘ब्रह्म’ ने कहा कि फिल्म में आंदोलन से जुड़े राजनीतिक पहलुओं का भी उल्लेख होगा। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी एक दल या व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि यह दिखाना है कि किसी वास्तविक छात्र आंदोलन का इस्तेमाल राजनीतिक एजेंडा आगे बढ़ाने के लिए किया जा सकता है या नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म में छात्रों की मांगों और उनके संघर्ष को समान महत्व दिया जाएगा ताकि कहानी संतुलित ढंग से प्रस्तुत की जा सके।

शिक्षा व्यवस्था और पेपर लीक पर भी रहेगा फोकस

गोविंद देव ‘ब्रह्म’ का कहना है कि फिल्म केवल आंदोलन तक सीमित नहीं रहेगी। इसमें पेपर लीक की समस्या, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, युवाओं की मानसिक स्थिति और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को भी शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कई छात्रों ने परीक्षा अनियमितताओं के कारण मानसिक तनाव झेला है और कुछ मामलों में आत्महत्या जैसी दुखद घटनाएं भी सामने आईं। फिल्म इन सामाजिक पहलुओं को भी संवेदनशीलता के साथ दिखाने का प्रयास करेगी।

पोस्टर जारी, जल्द शुरू होगी निर्माण प्रक्रिया

जयपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान गोविंद देव ‘ब्रह्म’ ने फिल्म का पोस्टर भी जारी किया। उन्होंने बताया कि पटकथा पर काम शुरू हो चुका है और जल्द ही कलाकारों तथा निर्माण प्रक्रिया से जुड़ी अन्य जानकारियां साझा की जाएंगी। फिल्म की रिलीज़ डेट, निर्देशक, कलाकारों और निर्माण संस्था के बारे में फिलहाल कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

गोविंद देव ‘ब्रह्म’ का फिल्मी सफर

गोविंद देव ‘ब्रह्म’ ने बताया कि उनका मूल क्षेत्र लेखन रहा है और वे पहले भी कई टेलीविजन तथा फिल्म परियोजनाओं से जुड़े रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने रियलिटी शो ‘राखी का स्वयंवर’ की स्क्रिप्ट पर काम किया था। इसके अलावा किन्नर समुदाय पर आधारित फिल्म ‘अधूरी ख्वाहिश’ का लेखन और निर्माण भी किया, जिसे विभिन्न मंचों पर सराहना मिली। उन्होंने बताया कि बाद में उनकी रुचि आध्यात्म और सनातन विषयों की ओर बढ़ी और अब वे सामाजिक तथा सांस्कृतिक विषयों पर कार्य कर रहे हैं।

फिल्म को लेकर बढ़ सकती है बहस

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि छात्र आंदोलन जैसे संवेदनशील विषय पर बनने वाली किसी भी फिल्म को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं। समर्थक इसे घटनाओं का एक वैकल्पिक दृष्टिकोण मान सकते हैं, जबकि आलोचक फिल्म में प्रस्तुत तथ्यों और दावों पर सवाल उठा सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी वास्तविक घटना पर आधारित फिल्म में तथ्यात्मक संतुलन और जिम्मेदार प्रस्तुति महत्वपूर्ण होती है, ताकि दर्शकों को घटनाओं का व्यापक संदर्भ समझने का अवसर मिल सके।

आगे क्या?

फिलहाल फिल्म की केवल घोषणा हुई है। आने वाले समय में इसकी कहानी, कलाकार, शूटिंग और रिलीज़ से जुड़ी अधिक जानकारी सामने आने की उम्मीद है। यह देखना दिलचस्प होगा कि फिल्म वास्तविक घटनाओं को किस रूप में प्रस्तुत करती है और दर्शकों तथा विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया कैसी रहती है।

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