दिल्ली और महाराष्ट्र में SIR के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी हो गई है। दिल्ली में 47.56 लाख और महाराष्ट्र में करीब 2.07 करोड़ नाम सूची से बाहर हैं। प्रभावित मतदाता 30 सितंबर तक दावा या आपत्ति दर्ज करा सकते हैं।
नई दिल्ली: दिल्ली और महाराष्ट्र में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) के तहत प्रारूप मतदाता सूची जारी होने के बाद बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट रोल में नहीं मिले हैं। दिल्ली में करीब 47.56 लाख और महाराष्ट्र में लगभग 2.07 करोड़ नाम फिलहाल प्रारूप सूची में शामिल नहीं हैं। चुनाव आयोग की प्रक्रिया के तहत ऐसे मतदाताओं को अपने नाम को लेकर दावा या आपत्ति दर्ज कराने का मौका दिया गया है।
31 अगस्त को जारी हुई प्रारूप मतदाता सूची
SIR प्रक्रिया के तहत दिल्ली और महाराष्ट्र में 31 अगस्त 2026 को ड्राफ्ट वोटर रोल जारी किया गया। दिल्ली में कुल करीब 1.45 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं में से 47,56,722 नाम प्रारूप सूची में नहीं दिखाई दिए हैं।
महाराष्ट्र में भी लगभग 2.07 करोड़ मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट रोल में शामिल नहीं हैं। बड़ी संख्या में नामों के बाहर रहने से दोनों राज्यों में मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा तेज हो सकती है।
हालांकि, ड्राफ्ट सूची से नाम बाहर होने का अर्थ यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति का मतदाता अधिकार स्थायी रूप से समाप्त हो गया है। चुनाव आयोग की प्रक्रिया में ऐसे लोगों को निर्धारित अवधि के भीतर अपना दावा प्रस्तुत करने और जरूरत पड़ने पर आपत्ति दर्ज कराने का अवसर दिया गया है।
नाम ड्राफ्ट सूची में क्यों नहीं आए?
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, कई मामलों में मतदाताओं से संबंधित फॉर्म समय पर जमा नहीं हो पाए। इसके अलावा डिजिटाइजेशन से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों और मतदाता रिकॉर्ड के सत्यापन के दौरान सामने आई विभिन्न परिस्थितियों के कारण भी कुछ नाम प्रारूप सूची में शामिल नहीं हो सके।
ऐसे मामलों में अनुपस्थित मतदाता, दूसरे स्थान पर स्थानांतरित हो चुके लोग, मृत मतदाता, एक से अधिक जगह दर्ज नाम यानी डुप्लिकेट रिकॉर्ड और विदेशी नागरिकों से जुड़े मामले शामिल हो सकते हैं।
प्रारूप मतदाता सूची का उद्देश्य रिकॉर्ड को अंतिम रूप देना नहीं, बल्कि सत्यापन और सुधार के लिए एक आधार तैयार करना है। इसलिए जिन लोगों को लगता है कि उनका नाम गलती से छूट गया है, वे दावा दाखिल कर सकते हैं।
30 सितंबर तक दावा और आपत्ति का मौका
दिल्ली और महाराष्ट्र में जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट रोल में नहीं हैं, उनके लिए 30 सितंबर 2026 तक दावा या आपत्ति दर्ज कराने की समय सीमा तय की गई है।
मतदाताओं के लिए यह अवधि बेहद महत्वपूर्ण है। जिन लोगों को लगता है कि वे पात्र मतदाता हैं लेकिन उनका नाम प्रारूप सूची में नहीं है, उन्हें निर्धारित प्रक्रिया के तहत संबंधित चुनाव अधिकारियों के सामने अपना दावा पेश करना होगा।
इसी तरह यदि किसी मतदाता को प्रारूप सूची में किसी गलत या अपात्र नाम के शामिल होने पर आपत्ति है, तो वह भी निर्धारित समय के भीतर शिकायत दर्ज करा सकता है।
दावे और आपत्तियों की जांच के बाद चुनाव अधिकारियों द्वारा रिकॉर्ड को अपडेट किया जाएगा। इस प्रक्रिया का उद्देश्य अंतिम मतदाता सूची को अधिक सटीक और सत्यापित बनाना है।
29 अक्टूबर तक दावे-आपत्तियों का निपटारा
चुनाव आयोग की निर्धारित समयसीमा के अनुसार दावों और आपत्तियों के निपटारे की प्रक्रिया 29 अक्टूबर 2026 तक पूरी की जाएगी।
इस दौरान संबंधित अधिकारियों द्वारा दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच की जाएगी। जिन मतदाताओं के दावे सही पाए जाएंगे, उनके नाम अंतिम सूची में शामिल किए जा सकते हैं। वहीं, जांच के बाद अपात्र पाए जाने वाले रिकॉर्ड को हटाया जा सकता है।
इसके बाद 4 नवंबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी। यानी 31 अगस्त की ड्राफ्ट सूची को अंतिम सूची नहीं माना जाना चाहिए।
दिल्ली में 47.56 लाख नामों पर क्यों नजर?
दिल्ली में कुल मतदाता संख्या के मुकाबले 47.56 लाख नामों का ड्राफ्ट सूची में नहीं होना महत्वपूर्ण आंकड़ा है। राजधानी में बड़ी संख्या में लोगों का एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाना, किराये के मकानों में रहने वाली आबादी और पुराने मतदाता रिकॉर्ड में बदलाव जैसे कारक मतदाता सूची के सत्यापन को जटिल बना सकते हैं।
SIR का उद्देश्य मतदाता सूची में मौजूद रिकॉर्ड को अपडेट करना और पात्र मतदाताओं को सूची में बनाए रखना है। इसी प्रक्रिया में ऐसे रिकॉर्ड की भी पहचान की जाती है जो स्थानांतरण, मृत्यु, दोहराव या अन्य कारणों से अब प्रासंगिक नहीं रह गए हैं।
इसलिए ड्राफ्ट रोल में नाम न मिलने वाले प्रत्येक व्यक्ति के मामले का अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।
महाराष्ट्र में 2.07 करोड़ नाम ड्राफ्ट रोल से बाहर
महाराष्ट्र में लगभग 2.07 करोड़ नामों का प्रारूप सूची में नहीं होना भी बड़ा आंकड़ा है। राज्य देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्यों में शामिल है और यहां मतदाताओं की संख्या भी बहुत अधिक है।
बड़ी संख्या में नामों के बाहर रहने के पीछे भी रिकॉर्ड सत्यापन, फॉर्म से जुड़ी कमियां, डिजिटाइजेशन और मतदाताओं के स्थानांतरण जैसे कारण हो सकते हैं।
महाराष्ट्र में भी प्रभावित मतदाताओं के पास 30 सितंबर तक दावा या आपत्ति दर्ज कराने का अवसर है। इसके बाद चुनाव अधिकारियों द्वारा मामलों की जांच की जाएगी और अंतिम सूची तैयार की जाएगी।
16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में SIR का तीसरा चरण
चुनाव आयोग ने 14 मई को SIR के तीसरे चरण की घोषणा की थी। इस चरण में दिल्ली और महाराष्ट्र के अलावा 16 राज्यों तथा तीन केंद्र शासित प्रदेशों को शामिल किया गया है।
पूरी प्रक्रिया 30 मई से 23 दिसंबर 2026 तक चलने वाली है। इस चरण में लगभग 36.73 करोड़ मतदाताओं के रिकॉर्ड के सत्यापन की प्रक्रिया की जा रही है।
इस अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और यह सुनिश्चित करना है कि उसमें पात्र मतदाताओं के नाम मौजूद रहें तथा मृत, स्थानांतरित या डुप्लिकेट रिकॉर्ड की पहचान की जा सके।
जिन राज्यों में यह प्रक्रिया चल रही है, उनमें कुछ राज्यों में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। पंजाब, उत्तराखंड और मणिपुर जैसे राज्यों के लिए मतदाता सूची का सही और अद्यतन होना चुनावी प्रक्रिया के लिहाज से विशेष महत्व रखता है।
पहले और दूसरे चरण में कई राज्य शामिल हुए
SIR की प्रक्रिया इससे पहले भी अलग-अलग चरणों में कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में की जा चुकी है। पहले और दूसरे चरण के तहत 10 राज्य और तीन केंद्र शासित प्रदेश कवर किए गए थे।
इन चरणों में मतदाता रिकॉर्ड के सत्यापन और सूची के पुनरीक्षण का काम किया गया। अलग-अलग राज्यों में इस प्रक्रिया की समयसीमा और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार प्रशासनिक प्रक्रिया में अंतर रहा।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण और किसी चुनाव के परिणाम के बीच सीधा संबंध स्थापित करना उचित नहीं है। SIR का प्राथमिक उद्देश्य मतदाता रिकॉर्ड को अपडेट करना है।
SIR को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज
मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण की प्रक्रिया का राजनीतिक महत्व भी बढ़ जाता है, खासकर उन राज्यों में जहां आगामी वर्षों में विधानसभा या लोकसभा चुनाव होने हैं।
विपक्षी दलों की ओर से समय-समय पर यह चिंता जताई जाती रही है कि सत्यापन प्रक्रिया में पात्र मतदाताओं के नाम गलती से बाहर नहीं होने चाहिए। दूसरी ओर, चुनाव प्रशासन का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक विश्वसनीय बनाना और अपात्र या दोहराए गए रिकॉर्ड को हटाना है।
यही कारण है कि दावा और आपत्ति की प्रक्रिया को महत्वपूर्ण सुरक्षा व्यवस्था माना जाता है। इसके जरिए मतदाताओं को ड्राफ्ट सूची में संभावित त्रुटियों को सुधारने का अवसर मिलता है।
मतदाताओं के लिए क्या जरूरी है?
ड्राफ्ट सूची में नाम नहीं मिलने वाले मतदाताओं को सबसे पहले यह जांचना चाहिए कि उनका रिकॉर्ड किस कारण से सूची में शामिल नहीं हुआ है। यदि वे पात्र मतदाता हैं, तो उन्हें 30 सितंबर की समयसीमा से पहले दावा दाखिल करना चाहिए।
मतदाताओं को संबंधित चुनाव कार्यालय द्वारा निर्धारित प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी लेकर ही आवेदन करना चाहिए। गलत जानकारी या अधूरे दस्तावेजों के कारण दावा प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
अंतिम सूची 4 नवंबर को जारी होने के बाद मतदाताओं के लिए अपने नाम की स्थिति दोबारा जांचना महत्वपूर्ण होगा।
4 नवंबर को साफ होगी अंतिम तस्वीर
फिलहाल दिल्ली में 47,56,722 और महाराष्ट्र में करीब 2.07 करोड़ नामों का ड्राफ्ट रोल में नहीं होना प्रारंभिक स्थिति को दर्शाता है। इन आंकड़ों में दावा और आपत्ति की प्रक्रिया के बाद बदलाव संभव है।
29 अक्टूबर तक मामलों के निपटारे और 4 नवंबर को अंतिम मतदाता सूची जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कितने नाम दोबारा जोड़े गए और कितने रिकॉर्ड अंतिम रूप से बाहर रखे गए।
इसलिए अभी ड्राफ्ट सूची के आंकड़ों को अंतिम मतदाता संख्या नहीं माना जा सकता। आने वाले दो महीनों में दावा, आपत्ति, सत्यापन और सुधार की प्रक्रिया इस पूरे अभियान का सबसे महत्वपूर्ण चरण होगी।










