दिल पर असर डालने वाला ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम, जानें कारण और लक्षण

ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम अचानक भावनात्मक तनाव से होता है। सीने में दर्द, सांस की तकलीफ और तेज धड़कन लक्षण हैं। समय पर इलाज से पूर्ण ठीक होना संभव है।

ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम एक अस्थायी लेकिन गंभीर हार्ट कंडीशन है, जो अचानक भावनात्मक या मानसिक तनाव के बाद होती है। इसमें दिल की मांसपेशियां कमजोर पड़ जाती हैं और इसके लक्षण हार्ट अटैक जैसे दिख सकते हैं। समय पर पहचान और इलाज से मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है।

ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम: अचानक गहरे भावनात्मक आघात के बाद होने वाली यह स्थिति दिल की पंपिंग क्षमता को अस्थायी रूप से प्रभावित करती है। दिल्ली स्थित राजीव गांधी हॉस्पिटल के कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. अजीत जैन के अनुसार, इसे टैकोत्सुबो कार्डियोमायोपैथी कहा जाता है। यह समस्या किसी अपने की मौत, धोखा, नौकरी छूटने जैसे तनावपूर्ण हालात में सामने आ सकती है। सीने में दर्द, सांस की दिक्कत और तेज धड़कन इसके प्रमुख लक्षण हैं, जो अक्सर हार्ट अटैक से भ्रम पैदा करते हैं। सही समय पर जांच और इलाज से दिल सामान्य रूप से काम करने लगता है।

ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम क्या है और क्यों होता है

राजीव गांधी हॉस्पिटल में कार्डियोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ डॉ. अजीत जैन बताते हैं कि इस स्थिति को मेडिकल भाषा में टैकोत्सुबो कार्डियोमायोपैथी कहा जाता है। इसमें दिल की मांसपेशियां कुछ समय के लिए कमजोर हो जाती हैं और हार्ट ठीक से खून पंप नहीं कर पाता।

अचानक भावनात्मक झटका जैसे किसी अपने की मौत, प्यार में धोखा, नौकरी जाना या बड़ा जीवन परिवर्तन इसका प्रमुख कारण बन सकता है। तनाव के दौरान शरीर में स्ट्रेस हार्मोन तेजी से बढ़ते हैं, जो दिल की कार्यक्षमता को अस्थायी रूप से प्रभावित करते हैं। 50 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं में इसका जोखिम ज्यादा देखा गया है।

लक्षण जो हार्ट अटैक जैसे लग सकते हैं

ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम के लक्षण अक्सर हार्ट अटैक से मिलते-जुलते होते हैं। मरीज को सीने में तेज दर्द, सांस लेने में दिक्कत, अचानक धड़कन बढ़ना, चक्कर आना या अत्यधिक कमजोरी महसूस हो सकती है।

कुछ मामलों में पसीना आना, मितली या उल्टी की शिकायत भी होती है। यही कारण है कि इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। सही जांच के बाद डॉक्टर तय करते हैं कि यह हार्ट अटैक है या ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम, क्योंकि दोनों का इलाज अलग होता है।

बचाव और समय पर इलाज क्यों जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार, तनाव प्रबंधन इस समस्या से बचाव का सबसे अहम तरीका है। नियमित योग, ध्यान, हल्की एक्सरसाइज, संतुलित आहार और पूरी नींद दिल को मजबूत रखने में मदद करती है।

अगर लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है। हल्के लेकिन बार-बार होने वाले लक्षण भी नजरअंदाज नहीं करने चाहिए। समय पर इलाज मिलने पर दिल की मांसपेशियां सामान्य स्थिति में लौट सकती हैं और स्थायी नुकसान से बचा जा सकता है।

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