दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लरिश स्टे होटल आग मामले में जांच में खुलासा हुआ कि लाइसेंस कर्मचारी के नाम पर था और होटल में 6 की जगह 25 कमरे चल रहे थे। इस हादसे में 21 लोगों की मौत हो गई और कई लोग घायल हुए।
नई दिल्ली: दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में स्थित फ्लरिश स्टे होटल में लगी भीषण आग ने 21 लोगों की जान ले ली, जबकि दर्जनों लोग घायल हो गए। यह हादसा सुबह करीब 8:30 बजे हुआ, जब होटल के अंदर अचानक धुआं फैल गया और कुछ ही मिनटों में पूरी इमारत आग की चपेट में आ गई।
घटना के बाद से जांच एजेंसियां लगातार मामले की परतें खोलने में जुटी हैं। शुरुआती जांच में होटल संचालन, लाइसेंस और फायर सेफ्टी नियमों के उल्लंघन को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं।
लाइसेंस केवल 6 कमरों का, होटल में चल रहे थे 25 कमरे
जांच में सबसे बड़ा खुलासा यह सामने आया है कि होटल को बेड एंड ब्रेकफास्ट (B&B) श्रेणी में केवल 6 कमरों का लाइसेंस प्राप्त था। आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, पहली मंजिल पर 3 और दूसरी मंजिल पर 3 कमरे ही अनुमोदित थे।
हालांकि, पुलिस जांच में पता चला है कि इमारत में लगभग 25 कमरे अवैध रूप से संचालित किए जा रहे थे। इस भारी अनियमितता ने सुरक्षा मानकों और भीड़ नियंत्रण दोनों को गंभीर रूप से प्रभावित किया।
फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी बनी बड़ी वजह
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि होटल में बुनियादी अग्नि सुरक्षा व्यवस्था का पालन नहीं किया गया था। इमारत में न तो पर्याप्त वेंटिलेशन था और न ही आपातकालीन निकास की उचित व्यवस्था।
प्रत्यक्षदर्शियों और जांच अधिकारियों के अनुसार, आग लगने के बाद धुआं तेजी से पूरी इमारत में फैल गया, जिससे ऊपरी मंजिलों पर मौजूद लोगों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला।
लाइसेंस दस्तावेजों को लेकर बड़ा विवाद
इस मामले में होटल के अकाउंटेंट जय मिश्रा और मालिक लवकेश बजाज से पूछताछ की गई है। पूछताछ में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
जय मिश्रा ने दावा किया कि होटल का लाइसेंस बनवाने के लिए उनके दस्तावेजों का उपयोग किया गया था। साथ ही उसने यह भी कहा कि आग लगने की घटना के समय वह मौके पर मौजूद था, लेकिन कुछ समय बाद मेट्रो से शहर में घूमता रहा।
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अकाउंटेंट का दावा: सभी दस्तावेज आग में जल गए
जय मिश्रा ने पुलिस को बताया कि होटल से जुड़े सभी महत्वपूर्ण रिकॉर्ड—जैसे मेहमानों का रजिस्टर, पहचान दस्तावेज, लाइसेंस फाइलें और अन्य कागजात—आग में पूरी तरह नष्ट हो गए।
हालांकि, पुलिस इस दावे की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है और डिजिटल रिकॉर्ड, सरकारी पोर्टल्स और अन्य एजेंसियों से डेटा जुटाकर दस्तावेजों की पुष्टि करने का प्रयास कर रही है।
10 साल से चल रहा था संचालन और अंदरूनी भूमिका
जांच में यह भी सामने आया है कि जय मिश्रा पिछले लगभग 10 वर्षों से होटल प्रबंधन से जुड़ा हुआ था और उसे रोजमर्रा के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका दी गई थी।
सूत्रों के अनुसार, वह स्टाफ की ड्यूटी लगाने, मेहमानों के रिकॉर्ड रखने और अन्य प्रशासनिक कार्यों का भी जिम्मेदार था। उसे लगभग 35,000 रुपये मासिक वेतन दिया जाता था।
घटना के दिन का घटनाक्रम
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग लगने के तुरंत बाद होटल में अफरा-तफरी मच गई। कुछ ही मिनटों में धुआं इतना घना हो गया कि लोगों का बाहर निकलना लगभग असंभव हो गया।
फायर सर्विस, पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से कुल 58 लोगों को इमारत से बाहर निकाला गया, जिनमें कई गंभीर रूप से घायल थे।
मौत और घायल: अंतरराष्ट्रीय नागरिक भी शामिल
अस्पताल अधिकारियों के अनुसार, हादसे में 21 लोगों की मौत हुई, जिनमें 18 लोगों की मौत अस्पताल पहुंचने से पहले ही हो गई थी।
मृतकों में भारतीय नागरिकों के साथ-साथ 11 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं। इनमें अफ्रीकी देशों के 9 और तुर्कमेनिस्तान के 2 नागरिक बताए जा रहे हैं। घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है।
सुरक्षा चूक और संरचनात्मक खामियां
जांच रिपोर्ट में कई गंभीर सुरक्षा खामियों की ओर इशारा किया गया है:
इमारत में केवल एक ही मुख्य प्रवेश-निकास मार्ग था, जिससे आपात स्थिति में लोगों के बाहर निकलने की संभावना बेहद सीमित हो गई।
खिड़कियां बंद होने और वेंटिलेशन की कमी के कारण इमारत “चिमनी इफेक्ट” जैसी स्थिति में बदल गई, जिससे धुआं तेजी से ऊपर की ओर फैल गया।
फायर अलार्म, स्मोक डिटेक्टर और स्प्रिंकलर सिस्टम या तो मौजूद नहीं थे या काम नहीं कर रहे थे।
ग्राउंड फ्लोर पर एलपीजी सिलेंडरों का भंडारण भी बिना किसी सुरक्षा अलगाव के किया गया था, जिससे आग की तीव्रता और बढ़ गई।
सेंसर गेट और निकास मार्ग की विफलता
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि होटल का सेंसर आधारित मुख्य गेट घटना के दौरान बंद हो गया था, जिससे लोग बाहर नहीं निकल पाए। इस तकनीकी विफलता ने स्थिति को और भयावह बना दिया।
पुलिस जांच और संभावित लापरवाही की जांच
दिल्ली पुलिस अब यह जांच कर रही है कि होटल के लाइसेंसिंग और फायर सेफ्टी मंजूरी में किसी प्रकार की लापरवाही या मिलीभगत तो नहीं थी। अधिकारियों से लेकर स्थानीय निकायों तक की भूमिका की भी समीक्षा की जा रही है।









