दून मेडिकल कॉलेज मेस घोटाले में कार्रवाई तेज, छात्रों ने अलग FIR दर्ज कराने का फैसला

दून मेडिकल कॉलेज मेस फीस घोटाले में निजी खाते में रकम जमा होने का खुलासा हुआ। छात्रों ने आरोपियों के खिलाफ अलग FIR दर्ज कराने का फैसला लिया।

दून मेडिकल कॉलेज में मेस फीस गड़बड़ी मामले में प्रशासन ने दोषियों पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है। जांच में फीस निजी खाते में जमा होने का खुलासा हुआ है। छात्रों ने भी आरोपियों के खिलाफ अलग से FIR दर्ज कराने का निर्णय लिया।

देहरादून: दून मेडिकल कॉलेज में मेस फीस से जुड़े वित्तीय गड़बड़ी मामले ने तूल पकड़ लिया है। प्रारंभिक जांच में छात्रों से वसूली गई फीस अधिकृत खाते के बजाय निजी खाते में जमा होने की बात सामने आई है। कॉलेज प्रशासन ने दोषियों के खिलाफ जल्द पुलिस कार्रवाई का आश्वासन दिया है, जबकि प्रभावित छात्रों ने भी अलग से एफआईआर दर्ज कराने का फैसला किया है।

मेस फीस निजी खाते में जमा कराने का खुलासा

दून मेडिकल कॉलेज में सामने आए मेस घोटाले की शुरुआती जांच में कई गंभीर अनियमितताएं उजागर हुई हैं। जांच में पता चला कि छात्रों से ली जा रही मेस फीस कॉलेज के आधिकारिक खाते में जमा न होकर मेस मैनेजर के निजी खाते में ट्रांसफर कराई जा रही थी।

बताया जा रहा है कि यह प्रक्रिया पिछले करीब सवा साल से जारी थी। मामले का खुलासा तब हुआ जब मूल मेस संचालक ने पिछले छह महीनों से भुगतान न मिलने की शिकायत कॉलेज प्रशासन से की।

खातों की जांच में लाखों रुपये गायब

शिकायत मिलने के बाद जब संबंधित खातों का मिलान किया गया, तो छात्रों की ओर से जमा की गई लाखों रुपये की रकम का हिसाब नहीं मिला। इसके बाद कॉलेज प्रशासन ने पूरे मामले की आंतरिक जांच शुरू की।

प्रारंभिक स्तर पर हॉस्टल प्रबंधन, वित्तीय विभाग और प्रशासनिक कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में बताई जा रही है। कॉलेज प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि जांच पूरी होने के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

छात्रों ने भी दर्ज कराने का लिया फैसला

मामले को लेकर सोमवार को कॉलेज परिसर में छात्रों की बैठक आयोजित की गई। संभावित विरोध प्रदर्शन की सूचना पर स्थानीय प्रशासन भी सतर्क रहा, हालांकि छात्रों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की बात कही।

बैठक में प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने छात्रों को भरोसा दिलाया कि दोषियों को किसी भी हाल में नहीं छोड़ा जाएगा। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि छात्रों से दोबारा पूरी राशि नहीं वसूली जाएगी, बल्कि केवल वास्तविक बकाया शुल्क ही लिया जाएगा।

इसके बाद छात्रों ने सामूहिक रूप से आरोपियों के खिलाफ अपनी ओर से अलग एफआईआर दर्ज कराने का निर्णय लिया है।

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