राहुल गांधी ने नॉर्वे की पत्रकार का वीडियो शेयर कर पीएम मोदी पर सवालों से बचने का आरोप लगाया। वहीं पेट्रोल-डीजल कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए मोदी को ‘महंगाई मैन’ बताया।
नई दिल्ली: भारत की राजनीति में एक बार फिर केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बयानबाजी देखने को मिली है। कांग्रेस नेता Rahul Gandhi ने प्रधानमंत्री Narendra Modi पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें “कॉम्प्रोमाइज पीएम” बताया है। राहुल गांधी ने नॉर्वे दौरे के दौरान एक महिला पत्रकार द्वारा पूछे गए सवाल का वीडियो साझा किया, जिसमें प्रधानमंत्री बिना जवाब दिए आगे बढ़ते दिखाई देते हैं।
इसी बीच पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर भी कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कांग्रेस नेताओं ने प्रधानमंत्री मोदी को “महंगाई मैन” बताते हुए आम जनता पर बढ़ते आर्थिक बोझ का मुद्दा उठाया।
नॉर्वे की पत्रकार का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
विवाद की शुरुआत उस वीडियो से हुई, जिसे नॉर्वे की पत्रकार हेल लिंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किया। वीडियो में पत्रकार प्रधानमंत्री मोदी से सवाल पूछती दिखाई देती हैं।
पत्रकार ने कहा:
“प्रधानमंत्री मोदी, आप दुनिया की सबसे स्वतंत्र प्रेस से कुछ सवाल क्यों नहीं लेते? हालांकि वीडियो में प्रधानमंत्री बिना कोई जवाब दिए वहां से आगे बढ़ते नजर आते हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और राजनीतिक बहस का विषय बन गया।
राहुल गांधी का सीधा हमला
वीडियो साझा करते हुए राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर कटाक्ष किया। उन्होंने लिखा कि जब दुनिया एक ऐसे प्रधानमंत्री को सवालों से बचते हुए देखती है, तो इससे भारत की वैश्विक छवि प्रभावित होती है।
राहुल गांधी ने कहा कि अगर छिपाने के लिए कुछ नहीं है तो सवालों से डरने की जरूरत भी नहीं होनी चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विपक्ष आने वाले समय में प्रेस स्वतंत्रता और जवाबदेही के मुद्दे को और आक्रामक तरीके से उठाने की तैयारी कर रहा है।
कांग्रेस ने मोदी को बताया “महंगाई मैन”
इसी बीच केंद्र सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल की कीमतों में औसतन 90 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी किए जाने के बाद कांग्रेस ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया।
कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा कि “जनता पर महंगाई मैन मोदी का हंटर फिर चला।”
पार्टी ने दावा किया कि बीते कुछ दिनों में ईंधन की कीमतों में कई चरणों में वृद्धि की गई है, जिसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा।
खड़गे ने भी उठाए सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि पर केंद्र सरकार की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ा रही है, जबकि चुनिंदा लोगों को राहत दी जा रही है। खड़गे ने सवाल उठाया कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल खरीद से जुड़े विकल्प उपलब्ध हैं, तो फिर घरेलू बाजार में लगातार कीमतें क्यों बढ़ाई जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि किसी भी सरकारी फैसले का असर देश के 140 करोड़ नागरिकों पर पड़ता है, इसलिए सरकार की जवाबदेही तय होनी चाहिए।
“विदेशी छवि से ज्यादा जरूरी घरेलू जवाबदेही”
खड़गे ने अपने बयान में कहा कि केवल विदेशों में भारत की छवि मजबूत करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि देश के भीतर जनता के सवालों का जवाब देना भी जरूरी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने की कोशिश कर रही है, जबकि आम लोग महंगाई और आर्थिक दबाव से जूझ रहे हैं।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि विपक्ष आने वाले महीनों में महंगाई, बेरोजगारी और ईंधन कीमतों को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर सकता है।

राहुल गांधी पहले भी कर चुके हैं आलोचना
यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए हों।
10 मई को भी राहुल गांधी ने पश्चिम एशिया में बढ़ते संकट के बीच प्रधानमंत्री द्वारा की गई “सात अपीलों” को लेकर सरकार की आलोचना की थी।
उन्होंने कहा था कि जनता से लगातार त्याग मांगना सरकार की विफलता को दर्शाता है। राहुल गांधी ने तब कहा था कि:
- लोग सोना खरीदना कम करें
- विदेश यात्राएं कम करें
- पेट्रोल की खपत घटाएं
- खाद और खाद्य तेल का इस्तेमाल सीमित करें
- मेट्रो का इस्तेमाल बढ़ाएं
- घर से काम करें
उन्होंने इन सुझावों को आर्थिक संकट से निपटने में सरकार की असफलता बताया था।
वैश्विक मंचों पर प्रेस स्वतंत्रता का मुद्दा
नॉर्वे में सामने आया वीडियो केवल घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं रहा। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रेस स्वतंत्रता और राजनीतिक जवाबदेही को लेकर बहस तेज हुई है।
पश्चिमी देशों में पत्रकारों द्वारा नेताओं से सीधे सवाल पूछना लोकतांत्रिक परंपरा का हिस्सा माना जाता है। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी का बिना जवाब दिए आगे बढ़ना विपक्ष के लिए एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गया है।
हालांकि भाजपा और सरकार की ओर से इस मुद्दे पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पेट्रोल-डीजल कीमतों का आम जनता पर असर
भारत में ईंधन की कीमतों में हर बढ़ोतरी का असर परिवहन, खाद्य वस्तुओं और रोजमर्रा की जरूरतों पर पड़ता है।
विशेषज्ञों के अनुसार:
- ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ती है
- खाद्य पदार्थ महंगे होते हैं
- महंगाई दर पर दबाव बढ़ता है
मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों का बजट प्रभावित होता है
कांग्रेस लगातार यह आरोप लगाती रही है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का पूरा लाभ जनता तक नहीं पहुंचाती।
भाजपा और विपक्ष के बीच बढ़ती राजनीतिक टकराहट
विश्लेषकों का मानना है कि जैसे-जैसे चुनावी माहौल मजबूत होगा, केंद्र सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है।
एक तरफ भाजपा प्रधानमंत्री मोदी की वैश्विक छवि, विदेश नीति और विकास मॉडल को अपनी ताकत के रूप में पेश करती है, वहीं विपक्ष जवाबदेही, महंगाई और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को मुख्य मुद्दा बना रहा है।
सोशल मीडिया बना राजनीतिक युद्ध का केंद्र
इस पूरे विवाद में सोशल मीडिया की भूमिका भी अहम रही। राहुल गांधी, कांग्रेस, पत्रकारों और विभिन्न राजनीतिक समूहों द्वारा साझा किए गए वीडियो और पोस्ट लाखों लोगों तक पहुंचे।
राजनीतिक रणनीतिकारों का मानना है कि अब डिजिटल प्लेटफॉर्म भारतीय राजनीति का सबसे प्रभावशाली हथियार बन चुके हैं, जहां हर बयान और वीडियो तुरंत राष्ट्रीय बहस में बदल जाता है।











