यूरोपियन यूनियन (EU) ने 1 जनवरी 2026 से भारत के लिए लागू जनरलाइज्ड स्कीम ऑफ प्रेफरेंसेज (GSP) के लाभ को दो साल के लिए निलंबित करने के निर्णय को खत्म कर दिया है। इस कदम के बाद कुछ खबरें आई थीं कि इससे भारत के 87 प्रतिशत निर्यात पर अधिक शुल्क लग सकता है।
बिजनेस न्यूज़: यूरोपियन यूनियन (EU) द्वारा भारत के लिए जनरलाइज्ड स्कीम ऑफ प्रेफरेंसेज (GSP) के लाभ 1 जनवरी 2026 से अस्थायी रूप से निलंबित किए जाने के फैसले को लेकर फैली आशंकाओं पर भारत सरकार ने स्थिति साफ कर दी है। वाणिज्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस कदम का असर भारत के कुल निर्यात का मात्र 2.66% होगा, न कि 87% जैसा कि कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया था।
सरकार के मुताबिक, यूरोपीय संघ के नए GSP नियम 1 जनवरी 2026 से लागू होंगे और 31 दिसंबर 2028 तक प्रभावी रहेंगे। इन नियमों के तहत भारत सहित कुछ विकासशील देशों के लिए चुनिंदा टैरिफ रियायतों को निलंबित किया गया है। हालांकि, इसका वास्तविक प्रभाव सीमित दायरे तक ही रहेगा।
EU को भारत का निर्यात: वास्तविक तस्वीर
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में भारत से यूरोपीय संघ को कुल निर्यात लगभग €62.2 बिलियन रहा। इसमें से केवल €12.9 बिलियन का व्यापार EU के स्टैंडर्ड GSP फ्रेमवर्क के अंतर्गत आता था। नए नियमों के चलते लगभग €1.66 बिलियन का व्यापार GSP व्यवस्था से बाहर हो जाएगा। इसका अर्थ है कि कुल EU निर्यात के मुकाबले केवल 2.66% व्यापार ही प्रभावित होगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि GSP के तहत आने वाले अधिकांश उत्पाद पहले ही इस योजना से बाहर हो चुके थे, इसलिए इसके निलंबन का प्रभाव व्यापक नहीं है।

किन सेक्टर्स पर पड़ा असर?
EU के नए GSP रेगुलेशन के तहत भारत को 12 प्रमुख प्रोडक्ट कैटेगरी से “ग्रेजुएट” कर दिया गया है। इनमें शामिल हैं—
- मिनरल प्रोडक्ट्स
- इनऑर्गेनिक और ऑर्गेनिक केमिकल्स
- प्लास्टिक और रबर प्रोडक्ट्स
- टेक्सटाइल और उससे जुड़े उत्पाद
- पत्थर, प्लास्टर, सीमेंट और सिरेमिक
- कांच और कांच से बने उत्पाद
- मोती, कीमती धातुएं
- लोहा और स्टील
- मशीनरी
- मोटर वाहन और साइकिल
नए GSP ढांचे में कृषि उत्पादों (Agriculture Products) को शामिल नहीं किया गया है। वहीं, नॉन-एग्रीकल्चर सेक्टर में केवल लेदर उत्पादों के लिए GSP लाभ को दोबारा बहाल किया गया है।
GSP क्या है और क्यों होता है निलंबन?
जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज (GSP) एक एकतरफा व्यापार वरीयता योजना है, जिसके तहत EU विकासशील और सबसे कम विकसित देशों से आयात पर कम या शून्य सीमा शुल्क देता है। यह योजना गैर-पारस्परिक होती है, यानी इसके बदले लाभार्थी देश को EU को कोई विशेष रियायत देना जरूरी नहीं होता।
हालांकि, EU समय-समय पर किसी देश के निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता (Export Competitiveness) की समीक्षा करता है। यदि किसी देश के कुछ सेक्टर अत्यधिक प्रतिस्पर्धी हो जाते हैं, तो उन्हें GSP से “ग्रेजुएट” कर दिया जाता है। भारत के मामले में भी यही प्रक्रिया अपनाई गई है। वाणिज्य विभाग के अनुसार, WTO कानून के तहत GSP का कानूनी आधार 1979 का “इनेबलिंग क्लॉज” है, जो विकसित देशों को विकासशील देशों के साथ अलग और अधिक अनुकूल व्यवहार की अनुमति देता है।











