G-RAM-G Bill पर सियासी संग्राम, संसद में TMC सांसदों का विरोध

G-RAM-G Bill के खिलाफ संसद परिसर में TMC सांसदों ने 12 घंटे का धरना दिया। गिरिराज सिंह ने विरोध को राजनीति बताते हुए मजदूर विरोधी करार दिया।

G-RAM-G Bill के पारित होने के बाद TMC सांसदों ने संसद परिसर में 12 घंटे का धरना दिया। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने विरोध को राजनीतिक बताया और कहा कि यह विधेयक मजदूरों के हित में है।

New Delhi: संसद के शीतकालीन सत्र के आखिरी दिनों में विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी G-RAM-G Bill को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया। विधेयक के पारित होने के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसदों ने संसद परिसर में 12 घंटे का धरना दिया। इस विरोध पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने तीखा पलटवार करते हुए कहा कि जो लोग इस बिल का विरोध कर रहे हैं, वे मजदूरों के दुश्मन हैं और उनका मकसद केवल राजनीति करना है।

धरने में टीएमसी के कई वरिष्ठ सांसद मौजूद रहे, वहीं इंडिया ब्लॉक के कुछ अन्य दलों के सांसद भी समर्थन में नजर आए। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर ग्रामीण रोजगार, महात्मा गांधी का नाम और केंद्र बनाम विपक्ष की राजनीति को चर्चा के केंद्र में ला दिया।

संसद परिसर में 12 घंटे का धरना

G-RAM-G Bill 2025 के लोकसभा और राज्यसभा से पारित होने के बाद टीएमसी सांसदों ने संसद परिसर में धरना शुरू किया। यह धरना लगातार 12 घंटे तक चला। इसमें टीएमसी की प्रमुख सांसद सागरिका घोष, डेरेक ओ’ब्रायन, सुष्मिता देव, डोला सेन, रितब्रता बनर्जी, मौसम नूर और प्रकाश चिक बराइक सहित कई नेता शामिल हुए।

धरने का मकसद सरकार के फैसले के खिलाफ विरोध दर्ज कराना और यह दिखाना था कि विपक्ष इस बिल को मजदूर और ग्रामीण भारत के खिलाफ मानता है। टीएमसी नेताओं का कहना है कि यह विधेयक MGNREGA जैसी ऐतिहासिक योजना की मूल भावना को कमजोर करता है।

गिरिराज सिंह का तीखा बयान

G-RAM-G Bill पर सियासी संग्राम, संसद में TMC सांसदों का विरोध

टीएमसी के धरने पर केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि यह विरोध पूरी तरह राजनीतिक है और इसका मजदूरों के हित से कोई लेना-देना नहीं है। गिरिराज सिंह ने कहा कि जो लोग इस G-RAM-G Bill का विरोध कर रहे हैं, वे मजदूरों के दुश्मन हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि अगर पहले 100 दिन के काम की गारंटी थी और अब 125 दिन की गारंटी दी जा रही है, तो इसमें गलत क्या है। उनके अनुसार, यह बदलाव सीधे तौर पर मजदूरों के हित में है। उन्होंने कहा कि चाहे विरोध करने वाले 12 घंटे धरने पर बैठें या 12 दिन, सच्चाई यही है कि यह विधेयक मजदूरों की भलाई के लिए लाया गया है।

सरकार का कहना है कि G-RAM-G Bill, पुराने MGNREGA ढांचे को और मजबूत करता है। इसमें रोजगार के गारंटीकृत दिनों की संख्या 100 से बढ़ाकर 125 कर दी गई है, जिससे ग्रामीण मजदूरों को ज्यादा काम और ज्यादा आय का अवसर मिलेगा।

सरकार यह भी दावा कर रही है कि यह योजना विकसित भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखकर बनाई गई है, ताकि ग्रामीण इलाकों में रोजगार के साथ-साथ आजीविका के नए साधन विकसित किए जा सकें।

डोला सेन का BJP पर हमला

टीएमसी सांसद डोला सेन ने धरने के दौरान भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि भाजपा स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा नहीं रही, इसलिए वह महात्मा गांधी जैसे स्वतंत्रता सेनानियों का सम्मान नहीं करती।

डोला सेन ने कहा कि जब संसद में G-RAM-G Bill पारित हुआ और MGNREGA से महात्मा गांधी का नाम हटाया गया, तो यह गांधीजी के विचारों और विरासत पर हमला है। उन्होंने इसे महात्मा गांधी की “दूसरी हत्या” तक बता दिया। उनका कहना था कि पहले नाथूराम गोडसे ने 1948 में महात्मा गांधी की हत्या की थी और अब गांधी का नाम हटाकर उसी सोच को आगे बढ़ाया जा रहा है।

महात्मा गांधी के नाम पर सियासत

G-RAM-G Bill को लेकर महात्मा गांधी के नाम पर सियासत तेज हो गई है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार जानबूझकर MGNREGA से गांधी का नाम हटाकर उनकी विरासत को कमजोर कर रही है।

वहीं सरकार और भाजपा नेताओं का कहना है कि नाम बदलने से योजना की भावना नहीं बदलती। उनके मुताबिक असली मुद्दा मजदूरों को ज्यादा काम और बेहतर अवसर देना है, न कि नाम को लेकर राजनीति करना।

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