भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जून 2026 में होने वाले प्रतिष्ठित G7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए फ्रांस की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे। यह दौरा 15 से 17 जून के बीच प्रस्तावित है और इसे वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नई दिल्ली: नरेंद्र मोदी 15 से 17 जून के बीच फ्रांस में आयोजित G7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। उनकी इस महत्वपूर्ण विदेश यात्रा की पुष्टि हाल ही में हुई उच्चस्तरीय कूटनीतिक बैठकों के दौरान की गई है। इसी कड़ी में एस. जयशंकर ने फ्रांस के यूरोप एवं विदेश मामलों के मंत्री जीन-नोएल बैरो से जी7 विदेश मंत्रियों की बैठक के इतर मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय संबंधों और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई।
जयशंकर इस समय फ्रांस की दो दिवसीय यात्रा पर हैं, जहां वे विभिन्न कूटनीतिक कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। इस यात्रा को भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका
हालांकि भारत G7 समूह का स्थायी सदस्य नहीं है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उसे विशेष आमंत्रित देश के रूप में लगातार बुलाया जा रहा है। यह भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसकी मजबूत उपस्थिति को दर्शाता है। G7 दुनिया की प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जिसमें अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा शामिल हैं। ऐसे में इस मंच पर भारत की भागीदारी वैश्विक आर्थिक, राजनीतिक और रणनीतिक चर्चाओं में उसकी अहम भूमिका को और मजबूत करती है।
विदेश मंत्रियों की बैठक में भी भारत की सक्रियता
इससे पहले भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने G7 विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया। इस दौरान उनकी मुलाकात जीन-नोएल बैरो से हुई, जहां दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय और वैश्विक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की। फ्रांस के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि जयशंकर की भागीदारी इस बात का प्रमाण है कि फ्रांस अपनी G7 अध्यक्षता के दौरान भारत को एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में देख रहा है।
बैठक के दौरान पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और उसके वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ने वाले प्रभाव पर भी चर्चा हुई। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा एक प्रमुख चिंता का विषय रही। भारत और फ्रांस दोनों ने इस बात पर सहमति जताई कि ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित बनाए रखने के लिए आपसी समन्वय और सहयोग को मजबूत किया जाएगा।
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भारत-फ्रांस रणनीतिक संबंध
भारत और फ्रांस के बीच संबंध पिछले कुछ वर्षों में और अधिक मजबूत हुए हैं। फरवरी 2026 में इमैनुएल मैक्रों भारत दौरे पर आए थे, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता की थी। इस दौरान दोनों देशों ने “2026 भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष” की शुरुआत की और अपने संबंधों को “विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी” तक ले जाने पर सहमति जताई।
भारत इस समय ब्रिक्स समूह की अध्यक्षता भी कर रहा है, जो उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक महत्वपूर्ण मंच है। ऐसे में भारत का G7 जैसे विकसित देशों के समूह में सक्रिय भागीदारी करना उसकी संतुलित और बहुआयामी विदेश नीति को दर्शाता है। यह रणनीति भारत को वैश्विक दक्षिण (Global South) और विकसित देशों के बीच एक सेतु की भूमिका निभाने में सक्षम बनाती है।










