डोनल्ड ट्रंप की 19 फरवरी को होने वाली गाजा पीस बोर्ड बैठक में यूरोप के बड़े देशों ने शामिल होने से इनकार किया। फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन और इटली ने दूरी बनाए रखी, जिससे इस वैश्विक शांति पहल को सीमित समर्थन मिला।
Trump News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की गाजा पीस बोर्ड की बैठक को आयोजित होने में अब केवल कुछ दिन बचे हैं, लेकिन इस वैश्विक शांति पहल को यूरोप से अपेक्षित समर्थन नहीं मिल रहा है। 19 फरवरी को होने वाली इस बैठक के लिए ट्रंप ने करीब 60 देशों को न्योता भेजा था, लेकिन यूरोप के बड़े देशों ने इस बैठक से दूरी बनाई है। फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, इटली और स्वीडन ने बैठक में शामिल होने से मना कर दिया है।
यूरोप में सीमित सहभागिता
ट्रंप ने यूरोप के 15 देशों को गाजा पीस बोर्ड की बैठक में भाग लेने का न्योता दिया था। हालांकि अब तक केवल तीन देशों ने बैठक में शामिल होने की पुष्टि की है। हंगरी, बुल्गारिया और कोसोवो यूरोप से वे देश हैं जो इस बैठक में हिस्सा लेने को तैयार हैं। ब्रिटेन, फ्रांस और इटली जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के न शामिल होने से इस पहल को यूरोप में सीमित समर्थन प्राप्त हो रहा है।
विश्लेषकों का कहना है कि यूरोप के कई देशों का इस बैठक से दूरी बनाना राजनीतिक और कूटनीतिक कारणों से जुड़ा है। उन्हें लगता है कि इस बैठक में अमेरिका के एकतरफा एजेंडे के कारण निष्पक्ष निर्णय नहीं हो सकते। इसके चलते ट्रंप की वैश्विक शांति पहल को यूरोप से अपेक्षित समर्थन नहीं मिल रहा है।
गाजा पीस बोर्ड की महत्वाकांक्षा

ट्रंप ने जनवरी 2026 के अंत में गाजा पीस बोर्ड की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि यह मंच गाजा के पुनर्निर्माण की निगरानी करेगा और आगे चलकर वैश्विक संघर्षों के समाधान में भूमिका निभाएगा। उनका उद्देश्य था कि यह बोर्ड गाजा और आसपास के क्षेत्र में स्थायी शांति और आर्थिक पुनर्निर्माण सुनिश्चित करे।
हालांकि, बैठक में यूरोप से सीमित सहभागिता के कारण इस पहल की वैश्विक प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं। यूरोपीय देशों के बाहर रहने से ट्रंप की योजना में रणनीतिक चुनौती उत्पन्न हो सकती है।
एशियाई देशों की स्थिति
ट्रंप ने एशियाई देशों में पाकिस्तान, इंडोनेशिया, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और कजाकिस्तान को भी न्योता भेजा है। इनमें पाकिस्तान और इंडोनेशिया ने बैठक में भाग लेने के संकेत दिए हैं। वहीं, सऊदी अरब और यूएई ने अभी तक औपचारिक रूप से अपनी भागीदारी की पुष्टि नहीं की है।
भारत, चीन और जापान ने इस बैठक में शामिल होने के संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। एशियाई देशों की भागीदारी इस पहल की सफलता के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि क्षेत्रीय सहयोग के बिना गाजा पीस बोर्ड की योजना की प्रभावशीलता सीमित रह सकती है।
गाजा पीस बोर्ड का उद्देश्य सिर्फ गाजा के पुनर्निर्माण तक सीमित नहीं है। ट्रंप की योजना इसे एक वैश्विक मंच के रूप में विकसित करने की है, जो विभिन्न संघर्ष क्षेत्रों में मध्यस्थता कर सके। अमेरिकी राष्ट्रपति का मानना है कि यह पहल मध्य पूर्व में स्थायी शांति की दिशा में एक नया रास्ता खोल सकती है।











