Gautam Adani अडाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी ने अमेरिका में करीब दो साल तक चले कानूनी मामलों के समाप्त होने के बाद अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि बीता समय मुश्किल जरूर था, लेकिन उन्हें हमेशा विश्वास था कि आखिरकार सच्चाई की जीत होगी।
बिजनेस न्यूज़: अडाणी समूह के चेयरमैन गौतम अडाणी ने अमेरिका में उनके खिलाफ चले कानूनी मामलों के समाप्त होने और अदालत के फैसले के बाद कहा कि बीते दो साल उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहे, लेकिन उन्हें हमेशा भरोसा था कि अंततः सच सामने आएगा। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को अपनी सच्चाई साबित करने के लिए संघर्ष करना पड़ सकता है और ऐसी परिस्थितियों में धैर्य व साहस बनाए रखना जरूरी होता है।
गौतम अडाणी ने यह बात कर्मचारियों और साझेदारों के साथ आयोजित ‘अपनी बात, अपनों के साथ’ कार्यक्रम के दूसरे संस्करण में कही। इस दौरान उन्होंने 2023 की हिंडनबर्ग रिसर्च रिपोर्ट के बाद पैदा हुए विवादों और अमेरिका में उनसे जुड़े कानूनी मामलों पर भी अपने विचार रखे। अडाणी का बयान ऐसे समय आया है जब न्यूयॉर्क की एक संघीय अदालत में उनसे और उनके भतीजे सागर अडाणी से जुड़े आपराधिक आरोपों को खारिज किए जाने के बाद इन मामलों को लेकर नई चर्चा शुरू हुई।
‘सच के लिए लड़ना पड़ता है’
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अडाणी ने कहा कि कठिन समय में सही होने का विश्वास ही व्यक्ति को आगे बढ़ने की ताकत देता है। उनके अनुसार, सच्चाई के पक्ष में खड़े रहने के लिए संघर्ष करना पड़ता है और यह रास्ता हमेशा आसान नहीं होता। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को विश्वास है कि उसने कोई गलत काम नहीं किया है, तो उसे मुश्किल परिस्थितियों से डरने के बजाय मजबूती से उनका सामना करना चाहिए। अडाणी ने अपने अनुभव को संघर्ष, धैर्य और विश्वास की सीख के रूप में प्रस्तुत किया।
उनका कहना था कि पिछले दो वर्षों में कई चुनौतियां सामने आईं, लेकिन उन्हें विश्वास था कि कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से तथ्यों की जांच होगी और सच स्पष्ट होगा। अदालत के फैसले के बाद उन्होंने अमेरिकी कानूनी व्यवस्था में अपना भरोसा और मजबूत होने की बात कही।
हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद बढ़ा था विवाद
गौतम अडाणी ने अपने संबोधन में 2023 में Hindenburg Research की रिपोर्ट के बाद उत्पन्न विवाद का भी उल्लेख किया। रिपोर्ट आने के बाद अडाणी समूह की कंपनियों के शेयरों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला था और समूह की कारोबारी गतिविधियों तथा कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर सवाल उठे थे।इसके बाद विभिन्न स्तरों पर जांच और कानूनी प्रक्रियाओं की चर्चा हुई।
अमेरिका में दर्ज मामलों ने भी इस विवाद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में बनाए रखा। अडाणी ने कहा कि इस पूरे दौर ने उन्हें धैर्य बनाए रखने और संस्थागत प्रक्रिया पर भरोसा रखने का महत्व समझाया।

कानूनी व्यवस्था पर भरोसा हुआ और मजबूत
अडाणी के मुताबिक, हालिया कानूनी घटनाक्रम ने न्यायिक और कानूनी संस्थाओं में उनका भरोसा और मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि कानूनी प्रक्रिया कभी-कभी लंबी और कठिन हो सकती है, लेकिन तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष फैसला मिलने की व्यवस्था पर विश्वास बनाए रखना जरूरी है। उन्होंने इस अनुभव को केवल अपनी व्यक्तिगत लड़ाई तक सीमित नहीं बताया, बल्कि इसे उन सभी लोगों के लिए संदेश के रूप में रखा जो जीवन या करियर में कठिन परिस्थितियों का सामना कर रहे हैं।
अडाणी के अनुसार, चुनौतियों के समय घबराहट में फैसले लेने के बजाय धैर्य के साथ परिस्थितियों का सामना करना अधिक महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने कहा कि संघर्ष के दौरान व्यक्ति की दृढ़ता और आत्मविश्वास की असली परीक्षा होती है।
युवाओं को दिया मेहनत और संयम का संदेश
अपने संबोधन में गौतम अडाणी ने भारत के युवाओं को लेकर भी बात की। उन्होंने कहा कि देश के युवा ऊर्जा और क्षमता से भरपूर हैं तथा मेहनत करने की उनमें अपार ताकत है। हालांकि, सफलता के लिए केवल कड़ी मेहनत ही नहीं, बल्कि धैर्य और संयम भी आवश्यक हैं। उन्होंने अपने शुरुआती जीवन के संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि जब उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की थी, तब उनके पास सीमित संसाधन थे। इसके बावजूद लगातार मेहनत और अपने काम के प्रति प्रतिबद्धता के जरिए उन्होंने आगे बढ़ने की कोशिश की।
उनका संदेश था कि त्वरित सफलता की अपेक्षा करने के बजाय युवाओं को लंबी अवधि के लक्ष्य, अनुशासन और लगातार प्रयास पर ध्यान देना चाहिए। अडाणी ने कहा कि कठिन परिश्रम का कोई वास्तविक विकल्प नहीं होता।












