पितृपक्ष मेले में गयाजी की बदलेगी तस्वीर पहली बार हाईटेक मशीन से चमकेंगे देवघाट बिजली से चलेगी सफाई मशीन

गया के पितृपक्ष मेले में पहली बार इलेक्ट्रिक लिटर पिकर वैक्यूम क्लीनर से देवघाट और विष्णुपद मंदिर क्षेत्र की सफाई होगी। मशीन से कचरा उठाने में मिलेगी मदद।
पितृपक्ष मेले में गयाजी की बदलेगी तस्वीर पहली बार हाईटेक मशीन से चमकेंगे देवघाट बिजली से चलेगी सफाई मशीन
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गयाजी में चल रहे विश्वप्रसिद्ध पितृपक्ष मेले के दौरान श्रद्धालुओं को स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराने के लिए गया नगर निगम ने सफाई व्यवस्था को आधुनिक बनाने की पहल की है। इस बार देवघाट और विष्णुपद मंदिर के आसपास सफाई के लिए हाईटेक इलेक्ट्रिक लिटर पिकर वैक्यूम क्लीनर मशीन का इस्तेमाल शुरू किया गया है। नगर निगम के अनुसार, इस मशीन की मदद से कम समय में अधिक क्षेत्र की सफाई की जा सकेगी। खासकर उन जगहों पर इसका उपयोग किया जाएगा, जहां पिंडदान और तर्पण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मशीन के इस्तेमाल से बिखरे हुए कचरे को उठाने में सफाईकर्मियों को भी मदद मिलेगी।

गया के पितृपक्ष मेले का धार्मिक महत्व काफी अधिक है। हर साल देश के अलग-अलग राज्यों और विदेशों से भी लोग अपने पूर्वजों के पिंडदान और तर्पण के लिए यहां पहुंचते हैं। फल्गु नदी के किनारे स्थित देवघाट और भगवान विष्णु को समर्पित विष्णुपद मंदिर इस दौरान श्रद्धालुओं के प्रमुख केंद्र बने रहते हैं। सुबह से ही इन स्थानों पर लोगों की आवाजाही शुरू हो जाती है। पूजा-पाठ, तर्पण और पिंडदान के कारण घाटों तथा मंदिर के आसपास लगातार साफ-सफाई बनाए रखना नगर निगम के लिए बड़ी जिम्मेदारी होती है।

इसी जरूरत को देखते हुए नगर निगम ने इस बार पारंपरिक सफाई व्यवस्था के साथ आधुनिक मशीन का इस्तेमाल शुरू किया है। इलेक्ट्रिक लिटर पिकर वैक्यूम क्लीनर को देवघाट और विष्णुपद मंदिर क्षेत्र की सफाई के लिए लगाया गया है। मशीन की शुरुआत मेयर गणेश पासवान, नगर आयुक्त डॉ. गगन और पूर्व डिप्टी मेयर मोहन श्रीवास्तव ने पूजा-अर्चना के साथ की। इसके बाद मशीन को मौके पर चलाकर सफाई का काम शुरू कराया गया। इस पहल का उद्देश्य मेले के दौरान प्रमुख धार्मिक स्थलों पर जमा होने वाले छोटे और बिखरे कचरे को तेजी से हटाना है।

इस मशीन की खासियत यह है कि यह बैटरी से चलती है। इसके संचालन के दौरान धुआं नहीं निकलता, इसलिए इससे सफाई करने पर सीधे तौर पर धुएं से होने वाला प्रदूषण नहीं फैलता। मशीन में वैक्यूम सिस्टम दिया गया है, जिसकी मदद से सड़क, घाट और मंदिर के आसपास बिखरे कागज, पॉलीथिन, फूल-माला और दूसरे छोटे कचरे को उठाया जा सकता है। धार्मिक स्थलों पर पूजा के बाद कई तरह की सामग्री इधर-उधर रह जाती है। ऐसे में वैक्यूम आधारित मशीन सफाई के काम को अधिक व्यवस्थित बनाने में मदद कर सकती है।

पितृपक्ष मेले के दौरान श्रद्धालु अलग-अलग वेदियों और घाटों पर धार्मिक अनुष्ठान करते हैं। पूजा के बाद फूल, पत्ते, कागज और अन्य सामग्री आसपास जमा हो सकती है। श्रद्धालुओं की लगातार आवाजाही के कारण कई जगहों पर बार-बार सफाई करने की जरूरत पड़ती है। ऐसे में इलेक्ट्रिक मशीन से छोटे कचरे को उठाने का काम तेजी से किया जा सकता है। इससे सफाईकर्मियों को हर जगह हाथ से कचरा उठाने में लगने वाला समय बचाने में मदद मिलेगी और वे दूसरे हिस्सों की सफाई पर भी ध्यान दे सकेंगे।

नगर निगम का कहना है कि मशीन में जमा होने वाले कचरे को बाद में निर्धारित स्थान पर ले जाकर उसका निस्तारण किया जाएगा। इससे केवल कचरा उठाने ही नहीं, बल्कि उसके उचित प्रबंधन में भी मदद मिलने की उम्मीद है। हालांकि मेले की सफाई व्यवस्था में मशीन के साथ सफाईकर्मियों की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी। शौचालयों की सफाई, घाटों की धुलाई, कचरे का नियमित उठाव और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर निगरानी जैसे काम लगातार करने होंगे।

मेयर गणेश पासवान और नगर निगम के अधिकारियों की ओर से शुरू की गई इस पहल का मुख्य उद्देश्य श्रद्धालुओं को साफ-सुथरा वातावरण उपलब्ध कराना है। नगर आयुक्त डॉ. गगन के अनुसार, वैक्यूम सिस्टम वाली मशीन बिखरे कचरे को अपने भीतर जमा कर सकती है। इससे सफाई की प्रक्रिया अधिक सुविधाजनक होगी। नगर निगम को उम्मीद है कि भीड़भाड़ वाले इलाकों में इस तकनीक के इस्तेमाल से सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने में सहायता मिलेगी। 

इस वर्ष पितृपक्ष मेला 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान गया में श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या पहुंच रही है। मेले के पहले दिन सरकारी आंकड़ों के अनुसार करीब 65,200 श्रद्धालु पिंडदान और तर्पण के लिए पहुंचे थे। बारिश के बावजूद विष्णुपद मंदिर और फल्गु नदी के विभिन्न घाटों पर धार्मिक अनुष्ठान जारी रहे। इतनी बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने के कारण सफाई, पेयजल, शौचालय और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना जरूरी हो जाता है। 

प्रशासन और नगर निगम के सामने चुनौती केवल कचरा हटाने की नहीं, बल्कि पूरे मेला क्षेत्र में लगातार स्वच्छता बनाए रखने की है। देवघाट और विष्णुपद मंदिर के आसपास भीड़ बढ़ने पर सफाईकर्मियों को बार-बार एक ही स्थान पर काम करना पड़ता है। मशीन की मदद से छोटे कचरे को जल्दी उठाने में सहायता मिल सकती है। इसके साथ ही समय पर कचरा उठाव और तय स्थानों पर उसका निस्तारण सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा, ताकि घाटों और मंदिर परिसर के आसपास गंदगी जमा न हो।

मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए स्वच्छता का सीधा संबंध उनकी सुविधा और धार्मिक अनुभव से भी है। लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति और मोक्ष की कामना के साथ पिंडदान करने आते हैं। ऐसे में घाटों पर साफ रास्ते, स्वच्छ शौचालय और कचरे से मुक्त वातावरण उपलब्ध होना महत्वपूर्ण है। बारिश के दौरान फर्श पर पानी और फिसलन की समस्या भी हो सकती है, इसलिए नियमित सफाई के साथ पानी हटाने और रास्तों को सुरक्षित बनाए रखने की जरूरत बनी रहती है।

हाईटेक मशीन की शुरुआत को गया नगर निगम की सफाई व्यवस्था में एक नई पहल के रूप में देखा जा रहा है। इलेक्ट्रिक मशीन होने के कारण इसे चलाने के दौरान धुआं नहीं निकलता और वैक्यूम सिस्टम छोटे कचरे को उठाने में मदद करता है। यदि इसका नियमित और प्रभावी इस्तेमाल किया जाता है, तो देवघाट और विष्णुपद मंदिर के आसपास सफाईकर्मियों के काम को आसान बनाने में सहायता मिल सकती है। साथ ही, इस तकनीक के जरिए धार्मिक स्थलों की स्वच्छता बनाए रखने के प्रयासों को भी मजबूती मिलेगी।

फिलहाल नगर निगम ने मशीन के जरिए देवघाट और विष्णुपद मंदिर क्षेत्र में सफाई शुरू कर दी है। अब मेले के दौरान इसकी उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि इसे कितनी नियमितता से चलाया जाता है और कचरे का उठाव कितनी तेजी से होता है। मशीन के साथ सफाईकर्मियों की तैनाती, नियमित निरीक्षण और श्रद्धालुओं की ओर से स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग भी जरूरी रहेगा। नगर निगम की इस पहल का उद्देश्य साफ है—पितृपक्ष के दौरान गयाजी आने वाले श्रद्धालुओं को धार्मिक अनुष्ठान के लिए स्वच्छ और सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध कराना।

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