भारत से विदाई पर भावुक हुए जर्मन राजदूत फिलिप एकरमैन, बोले- फिर लौटूंगा

German Ambassador Philipp Ackermann: भारत में अपने कार्यकाल के बाद जर्मन राजदूत फिलिप एकरमैन भावुक नजर आए। विदाई के मौके पर उन्होंने भारत से दोबारा लौटने की इ

भारत में जर्मनी के राजदूत फिलिप एकरमैन ने अपनी विदाई के मौके पर भारत के लिए भावुक संदेश साझा किया। चार साल तक भारत में सेवा देने के बाद अब वह अपनी अगली पोस्टिंग के लिए चीन के बीजिंग जा रहे हैं।

Philipp Ackermann: भारत में जर्मनी के राजदूत फिलिप एकरमैन ने देश में अपने चार साल के राजनयिक कार्यकाल के बाद भावुक विदाई संदेश दिया है। भारत में अपने अनुभवों को याद करते हुए उन्होंने देश की संस्कृति, विविधता, धार्मिक स्थलों और लोगों के प्रति अपने लगाव का जिक्र किया। एकरमैन ने कहा कि भारत में बिताया समय उनके लिए बेहद खास रहा और वह भविष्य में फिर भारत लौटना चाहेंगे।

चार साल भारत में राजदूत के तौर पर जिम्मेदारी संभालने के बाद अब फिलिप एकरमैन की अगली राजनयिक नियुक्ति चीन में हुई है। वह बीजिंग में जर्मनी के अगले राजनयिक मिशन का हिस्सा होंगे। भारत से रवाना होने से पहले उन्होंने अपने अनुभवों को साझा करते हुए देश के प्रति अपनी भावनाओं का खुलकर इजहार किया।

भारत को अलविदा कहते हुए भावुक हुए एकरमैन

अपने विदाई संदेश में फिलिप एकरमैन ने कहा कि भारत में बिताए चार साल उनके जीवन के यादगार वर्षों में शामिल रहेंगे। उन्होंने भारत को अलविदा कहते हुए संकेत दिया कि यह विदाई स्थायी नहीं है और वह आने वाले समय में दोबारा देश लौटना चाहेंगे। एकरमैन ने भारत के साथ अपने व्यक्तिगत जुड़ाव का जिक्र करते हुए कहा कि यहां रहना उनके लिए सौभाग्य की बात रही। भारत के प्रति अपनी भावनाओं को शब्दों में पूरी तरह व्यक्त करना उनके लिए आसान नहीं है।

उनकी विदाई ऐसे समय हो रही है जब भारत और जर्मनी के बीच आर्थिक, रणनीतिक, तकनीकी और कूटनीतिक संबंधों को लगातार विस्तार दिया जा रहा है। ऐसे में एकरमैन का चार साल का कार्यकाल दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रहा है।

भारत की विविधता ने किया प्रभावित

फिलिप एकरमैन ने भारत की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक उसकी विविधता को बताया। उनके मुताबिक, भारत को समझने के लिए केवल किसी एक शहर, क्षेत्र या संस्कृति को देखना पर्याप्त नहीं है। देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग परंपराएं, भाषाएं, खान-पान और जीवनशैली देखने को मिलती हैं।उन्होंने बताया कि भारत की यही विविधता उन्हें लगातार आकर्षित करती रही। 

यहां एक तरफ आधुनिक शहर और तकनीक हैं तो दूसरी तरफ सदियों पुरानी परंपराएं और सांस्कृतिक विरासत भी मौजूद है। एकरमैन के मुताबिक, भारत की खासियत यह है कि यहां अलग-अलग अनुभव एक साथ देखने को मिलते हैं। यही मिश्रण देश को उनके लिए खास बनाता है।

होली से लेकर फूलों और सजावट तक का जिक्र

भारत में अपने अनुभवों को याद करते हुए जर्मन राजदूत ने यहां के त्योहारों और रंगों का भी उल्लेख किया। उन्होंने खास तौर पर होली जैसे त्योहारों की जीवंतता और रंगों को याद किया। उनके अनुसार, भारत की संस्कृति केवल बड़े धार्मिक या ऐतिहासिक स्थलों तक सीमित नहीं है। रोजमर्रा की जिंदगी में दिखाई देने वाली सजावट, फूल-पौधे, त्योहारों की तैयारी और स्थानीय परंपराएं भी देश को अलग पहचान देती हैं। उन्होंने कहा कि भारत में रहते हुए उन्हें कई ऐसे अनुभव मिले, जिन्हें वह अपने साथ लेकर जा रहे हैं।

मंदिरों और मस्जिदों का भी किया जिक्र

फिलिप एकरमैन ने भारत के धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों की भी तारीफ की। उन्होंने मंदिरों और मस्जिदों समेत अलग-अलग धार्मिक स्थलों तथा पर्यटन स्थानों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की सांस्कृतिक विरासत काफी व्यापक है। उनके अनुसार, भारत में इतिहास, धर्म, संस्कृति और आधुनिकता कई स्तरों पर एक-दूसरे के साथ दिखाई देते हैं। अलग-अलग समुदायों और परंपराओं के बीच मौजूद विविधता ने उनके भारत अनुभव को और समृद्ध किया।

राजदूत ने यह भी बताया कि भारत में लंबे समय तक रहने के दौरान देश के कुछ हिस्सों और अनुभवों के साथ उनका भावनात्मक जुड़ाव हो गया। उनके लिए भारत सिर्फ एक राजनयिक पोस्टिंग नहीं रहा, बल्कि व्यक्तिगत अनुभवों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अध्याय बन गया। उन्होंने कहा कि भारत उन्हें आनंद देता रहा और यहां के लोगों, संस्कृति तथा वातावरण ने उनके कार्यकाल को यादगार बनाया।

अब चीन में होगी नई जिम्मेदारी

भारत में चार साल की राजनयिक जिम्मेदारी पूरी करने के बाद फिलिप एकरमैन अब बीजिंग में अपनी अगली पोस्टिंग संभालेंगे। चीन में उनका नया कार्यकाल जर्मनी की एशिया नीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। भारत से चीन की ओर उनका स्थानांतरण ऐसे समय में हो रहा है जब यूरोप और एशिया के बीच व्यापार, तकनीक, सुरक्षा और रणनीतिक संबंधों को लेकर वैश्विक स्तर पर चर्चा जारी है।

हालांकि, भारत से विदाई के दौरान एकरमैन का संदेश पूरी तरह कूटनीतिक औपचारिकताओं तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने अपने अनुभवों और भारत के प्रति व्यक्तिगत लगाव को खुलकर साझा किया।

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