गिरिडीह में हाथी का हमला, दंपती पर टूटा कहर; दृष्टिबाधित पति की मौत, पत्नी गंभीर

गिरिडीह के पीरटांड़ में हाथी ने दंपती पर हमला किया। दृष्टिबाधित पति मंगरा मांझी की मौत हो गई, जबकि पत्नी बड़की देवी गंभीर घायल हैं और धनबाद रेफर की गईं।
गिरिडीह में हाथी का हमला, दंपती पर टूटा कहर; दृष्टिबाधित पति की मौत, पत्नी गंभीर
Photo Credit / Attribution: Google

गिरिडीह जिले के पीरटांड़ थाना क्षेत्र में मानव-हाथी संघर्ष की एक गंभीर घटना सामने आई है। मंगलवार रात क्षेत्र में विचरण कर रहे हाथी ने एक दंपती पर हमला कर दिया। इस घटना में दृष्टिबाधित मंगरा मांझी की मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी बड़की देवी गंभीर रूप से घायल हो गईं। घायल महिला को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए धनबाद रेफर किया गया है। घटना के बाद आसपास के गांवों में दहशत का माहौल है और ग्रामीणों में हाथियों की लगातार मौजूदगी को लेकर चिंता बढ़ गई है।

जानकारी के अनुसार, घटना पीरटांड़ थाना क्षेत्र के लेढ़वा-मंडलडीह इलाके में मंगलवार रात करीब 10 बजे हुई। मंगरा मांझी दृष्टिबाधित थे और रात में अपनी पत्नी बड़की देवी के साथ घर से बाहर निकले थे। इसी दौरान उनका सामना क्षेत्र में घूम रहे हाथी से हो गया। हाथी ने दोनों पर हमला कर दिया। हमले में मंगरा मांझी गंभीर रूप से घायल हो गए, जबकि उनकी पत्नी भी गंभीर रूप से चोटिल हो गईं। घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी।

पुलिस की मदद से दोनों को गिरिडीह सदर अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने जांच के बाद मंगरा मांझी को मृत घोषित कर दिया। बड़की देवी की हालत गंभीर बताई गई, जिसके बाद उन्हें बेहतर उपचार के लिए धनबाद रेफर किया गया। घटना की खबर फैलते ही गांव और आसपास के इलाके में शोक का माहौल बन गया। परिवार के लोगों के लिए यह घटना बेहद दुखद रही, क्योंकि एक ही हमले में परिवार ने अपना सदस्य खो दिया और उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गईं।

घटना को लेकर हाथियों की संख्या के बारे में अलग-अलग जानकारी सामने आई है। कुछ स्थानीय लोगों और परिजनों की ओर से इलाके में पांच-छह हाथियों की मौजूदगी की बात कही गई है, जबकि पुलिस के अनुसार दंपती पर हमला करने वाला हाथी झुंड से बिछड़ा हुआ बताया जा रहा है। वन विभाग की टीम घटना के बाद सक्रिय है और क्षेत्र में हाथी की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।

वन विभाग के अनुसार, पीरटांड़ क्षेत्र में पिछले कुछ समय से हाथियों की गतिविधियां बनी हुई हैं। झुंड से अलग हुए हाथी के गांवों के आसपास पहुंचने के कारण मानव-हाथी संघर्ष का खतरा बढ़ गया है। विभागीय टीम हाथियों की निगरानी करने और उन्हें आबादी वाले क्षेत्र से सुरक्षित तरीके से दूर करने के प्रयास में जुटी है। अधिकारियों की ओर से ग्रामीणों को भी लगातार सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है।

मंगरा मांझी की मौत की सूचना मिलने के बाद वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी मृतक के स्वजन से मिले। विभाग की ओर से तत्काल ₹50 हजार की अग्रिम मुआवजा राशि परिवार को दी गई। वन विभाग ने बताया कि निर्धारित प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज और सत्यापन पूरा होने के बाद मुआवजे की शेष ₹4 लाख राशि भी नियमानुसार दी जाएगी। इसके अतिरिक्त मृतक के आश्रित के नाम पर ₹5 लाख की राशि बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट किए जाने की प्रक्रिया भी बताई गई है। घायल बड़की देवी के इलाज और सहायता को लेकर भी विभागीय स्तर पर कार्रवाई की जा रही है।

इस घटना के बाद वन विभाग ने आसपास के गांवों के लोगों से विशेष सावधानी बरतने की अपील की है। विभाग का कहना है कि अगर किसी ग्रामीण को हाथियों के क्षेत्र में होने की जानकारी मिलती है तो उनके करीब जाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। हाथियों को घेरने, उन्हें उकसाने या भगाने का प्रयास भी खतरनाक हो सकता है। ग्रामीणों को ऐसी स्थिति में तुरंत वन विभाग को सूचना देने की सलाह दी गई है। खासकर रात के समय अकेले घर से बाहर निकलने से बचने को कहा गया है।

पीरटांड़ और आसपास के जंगल क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही पहले भी चिंता का विषय रही है। वन विभाग की टीमें हाथियों की गतिविधियों पर नजर रख रही हैं, लेकिन जंगल से सटे गांवों में हाथियों के पहुंचने की घटनाएं ग्रामीणों के लिए लगातार चुनौती बनी हुई हैं। खेतों, घरों और ग्रामीण रास्तों के आसपास हाथियों की मौजूदगी से लोगों को अपनी सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ रही है। विभाग की कोशिश है कि हाथियों को बिना नुकसान पहुंचाए आबादी वाले क्षेत्र से दूर किया जाए।

इसी बीच पीरटांड़ क्षेत्र के उदयपुर गांव में भी बुधवार सुबह हाथी के हमले में एक महिला के घायल होने की जानकारी सामने आई है। घायल महिला की पहचान कुंती देवी के रूप में हुई है। उन्हें इलाज के लिए गिरिडीह सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं से यह स्पष्ट है कि क्षेत्र में हाथियों की मौजूदगी ग्रामीणों के लिए गंभीर सुरक्षा चुनौती बनी हुई है।

ग्रामीणों के बीच इस बात को लेकर भी चिंता है कि रात के समय हाथियों की गतिविधियों का पता लगाना मुश्किल होता है। जंगल और गांवों के बीच आवाजाही वाले इलाकों में अचानक हाथी सामने आने से लोगों को संभलने का मौका नहीं मिल पाता। ऐसे में वन विभाग की ओर से जारी सतर्कता संबंधी निर्देशों का पालन करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ग्रामीणों को सलाह दी गई है कि हाथी दिखने पर भीड़ न लगाएं और सुरक्षित दूरी बनाए रखें।

मंगरा मांझी की मौत के बाद परिवार के सामने आर्थिक और पारिवारिक संकट भी खड़ा हो गया है। वन विभाग की ओर से तत्काल सहायता राशि देकर राहत देने की कोशिश की गई है। नियमानुसार आगे मिलने वाली मुआवजा राशि और आश्रित के नाम पर एफडी से परिवार को आर्थिक सहायता मिलने की उम्मीद है। वहीं बड़की देवी के इलाज के लिए विभागीय स्तर पर सहयोग की बात कही गई है।

पीरटांड़ में हुई यह घटना एक बार फिर जंगल से सटे ग्रामीण क्षेत्रों में मानव और वन्यजीव के बीच बढ़ते टकराव की चुनौती को सामने लाती है। एक तरफ हाथियों के प्राकृतिक आवास और सुरक्षित आवाजाही को बनाए रखना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर जंगल के आसपास रहने वाले ग्रामीणों की सुरक्षा भी महत्वपूर्ण है। ऐसे में हाथियों की निगरानी, ग्रामीणों को समय पर सूचना और खतरे वाले क्षेत्रों में सावधानी जैसे उपायों पर जोर दिया जा रहा है। वन विभाग की टीमें क्षेत्र में सक्रिय रहकर हाथियों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए हैं।

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