गॉल ब्लैडर (पित्त की थैली) में पथरी लंबे समय तक अनदेखी करने पर गंभीर स्वास्थ्य खतरे, जैसे कैंसर, का कारण बन सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, पथरी का आकार बड़ा होना या पांच साल से अधिक समय तक रहना जोखिम बढ़ाता है। शुरुआती पहचान और समय पर सर्जरी जीवन बचाने में अहम भूमिका निभाती है।
गॉल ब्लैडर कैंसर का बढ़ता खतरा: दिल्ली के मिनिमल एक्सेस सर्जन डॉ. सचिन आंबेकर के अनुसार, पित्त की थैली में पथरी लंबे समय तक अनदेखी करने से कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है। भारत में दुनियाभर के गॉल ब्लैडर कैंसर के 10 फीसदी मामले हैं, और खराब खानपान व प्रदूषित पानी इसे बढ़ावा देते हैं। शुरुआती लक्षण नजर आने पर अल्ट्रासाउंड और समय पर सर्जरी से बीमारी से बचाव संभव है।
गॉल ब्लैडर में पथरी और कैंसर का संबंध
गॉल ब्लैडर यानी पित्त की थैली में पथरी होने पर लंबे समय तक अनदेखा करना कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है। दिल्ली के मिनिमल एक्सेस सर्जन डॉ. सचिन आंबेकर के अनुसार, पथरी जब पांच साल से अधिक समय तक रहती है या इसका आकार 10 एमएम से बड़ा होता है, तो गॉल ब्लैडर की अंदरूनी परत में सूजन आ सकती है, जिससे कैंसर का खतरा रहता है।
भारत में गॉल ब्लैडर कैंसर के मामलों में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। सीसीओ जर्नल में प्रकाशित ‘Epidemiology of gallbladder cancer in India’ रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर के गॉल ब्लैडर कैंसर के 10 फीसदी मामले भारत से हैं। खराब खानपान और प्रदूषित पानी इसके प्रमुख कारण हैं।

पथरी क्यों बनती है और लक्षण क्या हैं
पित्त की थैली में पथरी शरीर में टूटे हुए रेड सेल्स से बनने वाले बिलीरुबीन के जमा होने से बनती है। शुरुआत में पथरी छोटी होती है और कोई लक्षण नहीं दिखते। धीरे-धीरे पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में लगातार दर्द, पीलिया, भूख कम होना और खुजली जैसी समस्याएं नजर आने लगती हैं।
डॉ. सचिन के अनुसार, कई लोग सालों तक पथरी का इलाज नहीं कराते और आयुर्वेदिक या घरेलू इलाज अपनाते हैं। लेकिन अचानक तेज दर्द या गंभीर लक्षण आने पर ही सर्जरी के लिए आते हैं। इस दौरान जांच में कैंसर की पुष्टि हो सकती है।
उपचार और सर्जरी में नई तकनीक
आज पित्त की थैली की पथरी निकालना आसान हो गया है। नई मिनिमल इनवेसिव तकनीकों से यह सर्जरी 10 मिनट से आधे घंटे के भीतर की जा सकती है। शुरुआती स्टेज में ऑपरेशन से पथरी और संभावित कैंसर के खतरे दोनों को रोका जा सकता है।
डॉ. रोहित कपूर, मैक्स अस्पताल, ऑन्कोलॉजी विभाग के अनुसार, कई मरीज आखिरी स्टेज में कैंसर के साथ आते हैं। ऐसे मामलों में इलाज कठिन होता है और जीवन बचाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
गॉल ब्लैडर स्टोन से बचाव के उपाय
- तला-भुना और हाई-फैट भोजन कम करें।
- पर्याप्त पानी पिएं और नियमित रूप से एक्सरसाइज करें।
- पेट में दर्द या असुविधा होने पर तुरंत अल्ट्रासाउंड कराएं।
गॉल ब्लैडर की पथरी अनदेखी करने पर गंभीर परिणाम ला सकती है, जिसमें कैंसर भी शामिल है। शुरुआती पहचान और समय पर सर्जरी जीवन बचाने में अहम भूमिका निभाती है।













