Google के खिलाफ मामला, Epstein की पीड़िता ने लगाया डेटा लीक का आरोप

पीड़िता ने आरोप लगाया कि एपस्टीन केस दस्तावेज में निजी डेटा सुरक्षित नहीं रखा गया। Google और अमेरिकी सरकार पर डेटा प्राइवेसी उल्लंघन का मुकदमा।

जेफरी एपस्टीन केस की एक पीड़िता ने Google और अमेरिकी सरकार पर मुकदमा दायर किया है। आरोप है कि केस से जुड़े दस्तावेज जारी करते समय संवेदनशील व्यक्तिगत डेटा सुरक्षित नहीं रखा गया, जिससे नाम, ईमेल, फोन और तस्वीर जैसी जानकारी इंटरनेट और सर्च पर आसानी से उपलब्ध हो गई। यह मामला डेटा प्राइवेसी और टेक कंपनियों की जिम्मेदारी पर सवाल खड़ा करता है।

Data Privacy Alert: जेफरी एपस्टीन केस की एक पीड़िता ने Google और अमेरिकी सरकार पर मुकदमा दायर किया है। यह मामला अमेरिका में सामने आया, जिसमें पीड़िता ने दावा किया कि सरकार और Google ने केस से जुड़े दस्तावेज जारी करते समय संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी सुरक्षित नहीं रखी। इसमें नाम, ईमेल, फोन नंबर और तस्वीर जैसी जानकारियां शामिल हैं। मुकदमे का उद्देश्य डेटा सुरक्षा और टेक कंपनियों की जिम्मेदारी तय करना है, ताकि इंटरनेट पर फैल रहे संवेदनशील डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

डेटा लीक और संवेदनशील जानकारी

जेफरी एपस्टीन केस की एक पीड़िता ने Google और अमेरिकी सरकार पर मुकदमा दायर किया है। आरोप है कि केस से जुड़े दस्तावेज जारी करते समय पीड़ितों की निजी जानकारी सुरक्षित नहीं रखी गई और अब यह डेटा इंटरनेट और सर्च के जरिए आसानी से उपलब्ध है। इसमें नाम, ईमेल, फोन नंबर, पेशा और तस्वीर जैसी संवेदनशील जानकारियां शामिल हैं, जिससे पीड़ितों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।

वकीलों का कहना है कि सरकार ने दस्तावेज जारी करने में जल्दबाजी की और पारदर्शिता के नाम पर पीड़ितों की पहचान सुरक्षित रखना प्राथमिकता नहीं दी। मुकदमे में यह भी कहा गया कि Google ने दस्तावेजों को इंडेक्स और कैश कर डेटा फैलाव में भूमिका निभाई।

Google के खिलाफ मामला, Epstein की पीड़िता ने लगाया डेटा लीक का आरोप

AI और इंटरनेट पर डेटा फैलाव

मुकदमे में आरोप है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सर्च टूल्स अलग-अलग स्रोतों से जानकारी जोड़कर किसी व्यक्ति की पूरी प्रोफाइल तक दिखा सकते हैं। इससे पीड़ितों की लोकेशन, पहचान और संपर्क जानकारी जैसे संवेदनशील डेटा आसानी से एक्सेस हो सकते हैं।

पीड़िता के वकीलों ने बताया कि Google से कई बार अनुरोध किया गया कि इस डेटा को सर्च रिजल्ट से हटाया जाए, लेकिन अभी भी पूरी तरह से डी-इंडेक्स नहीं किया गया। सरकार ने कुछ डेटा हटाने की बात स्वीकार की, लेकिन अनएडिटेड दस्तावेज इंटरनेट पर बने हुए हैं।

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