अब धान बेचने के बाद किसानों को भुगतान के लिए लंबे समय तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। सरकार ने साफ किया है कि धान की सरकारी खरीद के 24 घंटे के भीतर किसानों के खाते में भुगतान कर दिया जाएगा। इस फैसले से खासतौर पर छोटे और सीमांत किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
सरकारी व्यवस्था के तहत धान की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर की जा रही है। खरीद केंद्रों पर धान की तौल और गुणवत्ता जांच पूरी होते ही किसान का पूरा विवरण ऑनलाइन दर्ज किया जाएगा। इसके बाद भुगतान की राशि सीधे किसान के बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी। सरकार का दावा है कि पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाया गया है, ताकि भुगतान में किसी तरह की देरी न हो और बिचौलियों की भूमिका पूरी तरह खत्म की जा सके।
अब तक किसानों की सबसे बड़ी शिकायत यह रही है कि धान बेचने के बाद उन्हें हफ्तों या महीनों तक भुगतान का इंतजार करना पड़ता था। कई बार इसी देरी के कारण किसान मजबूरी में अपनी फसल निजी व्यापारियों को कम दाम पर बेच देते थे। लेकिन 24 घंटे के भीतर भुगतान की व्यवस्था लागू होने से किसानों का भरोसा सरकारी खरीद प्रणाली पर मजबूत होगा और उन्हें अपनी उपज का सही मूल्य समय पर मिल सकेगा।
इस फैसले का असर किसानों की आर्थिक स्थिति पर भी पड़ेगा। समय पर पैसा मिलने से वे कर्ज चुकाने, घर की जरूरतें पूरी करने और अगली फसल की तैयारी बिना किसी दबाव के कर सकेंगे। खासतौर पर रबी फसल की बुआई से पहले किसानों के पास नकदी उपलब्ध होने से खेती से जुड़ी कई परेशानियां कम हो सकती हैं।
सरकार ने खरीद केंद्रों को यह भी निर्देश दिया है कि किसानों को बेवजह परेशान न किया जाए। धान की तौल, नमी की जांच और कागजी प्रक्रिया में अनावश्यक देरी करने वाले केंद्रों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, भुगतान में अगर किसी तरह की तकनीकी दिक्कत आती है, तो उसके त्वरित समाधान के लिए निगरानी व्यवस्था और हेल्पडेस्क की भी व्यवस्था की जा रही है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला सिर्फ भुगतान व्यवस्था को ही नहीं सुधारेगा, बल्कि सरकारी खरीद प्रणाली को भी मजबूत बनाएगा। इससे किसान खुले बाजार में शोषण से बचेंगे और अधिक संख्या में सरकारी केंद्रों पर धान बेचने के लिए आगे आएंगे।
कुल मिलाकर, धान किसानों के लिए सरकार का यह निर्णय बड़ी राहत लेकर आया है। अगर 24 घंटे में भुगतान की यह व्यवस्था जमीन पर पूरी ईमानदारी और सख्ती के साथ लागू होती है, तो यह किसानों की आय, भरोसे और खेती से जुड़ी स्थिरता के लिए एक अहम कदम साबित हो सकती है।











