ग्रामीण भारत को बड़ा आर्थिक बूस्ट: पंचायतों को मिला 4.35 लाख करोड़ का अनुदान, ‘आत्मनिर्भर गांव’ की दिशा में बड़ा कदम

ग्रामीण भारत के विकास को नई गति देते हुए पंचायतों को ₹4.35 लाख करोड़ का बड़ा अनुदान दिया गया है। यह कदम ‘आत्मनिर्भर गांव’ की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ग्रामीण निकायों के लिए इस बार केंद्रीय वित्त आयोग (केंद्रीय वित्त आयोग) ने बड़ा फैसला लेते हुए 4.35 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड अनुदान जारी किया है, जो पिछली बार के 2.36 लाख करोड़ रुपये की तुलना में लगभग दोगुना है।

Rural India: भारत में ग्रामीण विकास को नई दिशा देने के लिए केंद्र सरकार ने पंचायतों को रिकॉर्ड स्तर पर वित्तीय सहायता प्रदान की है। केंद्रीय वित्त आयोग की सिफारिशों के तहत इस बार ग्राम पंचायतों और अन्य ग्रामीण निकायों को कुल लगभग 4.35 लाख करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया है। यह राशि पिछली वित्तीय अवधि के 2.36 लाख करोड़ रुपये की तुलना में लगभग दोगुनी है, जिसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।

‘आत्मनिर्भर गांव’ की दिशा में बड़ा कदम

केंद्रीय पंचायती राज सचिव Vivek Bharadwaj ने इस फैसले को ग्रामीण भारत के लिए ऐतिहासिक बताया है। उन्होंने कहा कि यह पहल प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत विजन से प्रेरित है और इसका उद्देश्य गांवों को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाना है। उनके अनुसार, इस वित्तीय सहायता से पंचायतों को न केवल विकास कार्यों को तेज करने में मदद मिलेगी, बल्कि वे अपनी आय के नए स्रोत भी विकसित कर सकेंगी।

इस अनुदान में से लगभग 87 हजार करोड़ रुपये विशेष रूप से पंचायतों की आय बढ़ाने के लिए निर्धारित किए गए हैं। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है। सरकार ने एक प्रोत्साहन प्रणाली भी तैयार की है, जिसके तहत यदि कोई ग्राम पंचायत या जिला परिषद अपनी आय में कम से कम 2.5% की वृद्धि करती है, तो उसे अतिरिक्त अनुदान दिया जाएगा। इससे पंचायतों को स्वावलंबी बनने के लिए प्रेरित किया जाएगा।

महिलाओं की भागीदारी और प्रशासनिक सुधार

भारत की पंचायत व्यवस्था में लगभग 25 लाख निर्वाचित प्रतिनिधि हैं, जिनमें करीब 14 लाख महिलाएं शामिल हैं। यह स्थानीय शासन में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है। हालांकि, कुछ स्थानों पर “प्रधान-पति” जैसी प्रथाओं को लेकर चिंता जताई गई है, जहां महिला प्रतिनिधियों की जगह उनके परिजन निर्णय लेते हैं। इस समस्या के समाधान के लिए एक विशेष समिति गठित की गई है, जो सुधारात्मक सुझाव देगी और राज्यों को आवश्यक कदम उठाने की सिफारिश करेगी।

केंद्रीय सचिव ने यह भी बताया कि देश के अलग-अलग हिस्सों में पंचायतों की कार्यक्षमता में अंतर देखा गया है। विशेष रूप से दक्षिण भारत के राज्यों में पंचायतों की आय सृजन क्षमता अधिक पाई गई है। उदाहरण के तौर पर, Andhra Pradesh ने संपत्ति कर के माध्यम से 1000 करोड़ रुपये से अधिक की आय अर्जित की है, जबकि Karnataka ने लगभग 1,350 करोड़ रुपये की वसूली की है।

स्वामित्व योजना से जमीन पर अधिकार

ग्रामीण विकास को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार की स्वामित्व योजना के तहत अब तक 3.30 लाख से अधिक गांवों में ड्रोन आधारित सर्वेक्षण पूरा किया जा चुका है। इस योजना के तहत गांवों के डिजिटल नक्शे तैयार किए गए हैं, जिन्हें राज्य सरकारों को सौंपा गया है। दावे और आपत्तियों के निपटारे के बाद ग्रामीणों को उनकी संपत्ति के कानूनी अधिकार दिए जाते हैं, जिससे भूमि विवादों में कमी आने की उम्मीद है।

डिजिटल गवर्नेंस को बढ़ावा देने के लिए देश की लगभग 2.55 लाख ग्राम पंचायतें अब ई-ग्राम स्वराज पोर्टल से जुड़ चुकी हैं। इस प्लेटफॉर्म पर पंचायतों की योजनाएं, खर्च, ऑडिट और लेखा-जोखा एक ही जगह दर्ज किया जाता है। इसके अलावा “मेरी पंचायत” मोबाइल ऐप के जरिए नागरिक पंचायतों के खर्च और विकास कार्यों की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इस ऐप को अब तक 1 करोड़ से अधिक लोग डाउनलोड कर चुके हैं, जो ग्रामीण प्रशासन में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

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