उत्तराखंड में गढ़ भोज दिवस 7 अक्टूबर को, श्रीनगर में पीएम मोदी करेंगे राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित

उत्तराखंड में 7 अक्टूबर को गढ़ भोज दिवस मनाया जाएगा। श्रीनगर के रामलीला मैदान में PM मोदी राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित करेंगे।

उत्तराखंड में पारंपरिक फसलों और स्थानीय खाद्य संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए 7 अक्टूबर को गढ़ भोज दिवस मनाया जाएगा। श्रीनगर के रामलीला मैदान में होने वाले राज्य स्तरीय कार्यक्रम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संबोधित करेंगे।

श्रीनगर गढ़वाल: उत्तराखंड की पारंपरिक फसलों, स्थानीय व्यंजनों और खाद्य विरासत को बढ़ावा देने के लिए 7 अक्टूबर को गढ़ भोज दिवस मनाया जाएगा। राज्य स्तरीय मुख्य कार्यक्रम श्रीनगर के रामलीला मैदान में सुबह 11 बजे आयोजित होगा। कार्यक्रम को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संबोधित करेंगे। आयोजन में स्थानीय उत्पादों को बाजार से जोड़ने, किसानों की आय बढ़ाने और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने पर जोर रहेगा।

श्रीनगर में होगा राज्य स्तरीय आयोजन

उत्तराखंड की पारंपरिक खाद्य संस्कृति और स्थानीय कृषि उत्पादों को नई पहचान देने के उद्देश्य से गढ़ भोज दिवस का राज्य स्तरीय आयोजन श्रीनगर में किया जाएगा। कार्यक्रम 7 अक्टूबर को सुबह 11 बजे रामलीला मैदान में आयोजित होगा।

गढ़ भोज अभियान वर्ष 2000 से संचालित किया जा रहा है। आयोजक द्वारिका प्रसाद सेमवाल के अनुसार, यह अभियान अब उत्तराखंड की खाद्य संस्कृति को नई पीढ़ी से जोड़ने और स्थानीय उत्पादों, किसानों तथा पारंपरिक कृषि को बढ़ावा देने वाले जनअभियान का रूप ले चुका है।

कार्यक्रम के दौरान राज्यभर के विद्यालयों और शिक्षण संस्थानों में भी विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इनमें पारंपरिक अनाज, स्थानीय व्यंजन और खाद्य परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन से जुड़ी गतिविधियां शामिल होंगी।

स्थानीय उत्पादों और किसानों पर रहेगा फोकस

गढ़ भोज दिवस के आयोजन का एक प्रमुख उद्देश्य उत्तराखंड में पैदा होने वाली पारंपरिक फसलों और स्थानीय खाद्य उत्पादों को बाजार से जोड़ना है। इसके जरिए किसानों की आय बढ़ाने और स्थानीय उत्पादों की मांग को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा।

आयोजकों के अनुसार, पारंपरिक अनाज और स्थानीय खाद्य पदार्थ केवल भोजन का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि वे उत्तराखंड की कृषि, संस्कृति और स्थानीय अर्थव्यवस्था से जुड़े हुए हैं।

अभियान के सहयोगी डॉ. अरविंद दरमोड़ा ने कहा कि गढ़ भोज को उत्तराखंड की मिट्टी, खेती, संस्कृति, जैव विविधता, स्वास्थ्य और स्थानीय आजीविका की सामूहिक विरासत के रूप में देखा जाना चाहिए।

गढ़ भोज को मिड-डे मील से जोड़ने की पहल

गढ़ भोज अभियान के तहत पारंपरिक स्थानीय भोजन को विद्यालयों से जोड़ने के प्रयास भी किए जा रहे हैं। इसमें गढ़ भोज को मिड-डे मील से जोड़ने और पारंपरिक फसलों के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जा रहा है।

इसके जरिए बच्चों को स्थानीय और पारंपरिक खाद्य पदार्थों से परिचित कराने के साथ स्थानीय किसानों और उत्पादकों को भी बाजार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन और राष्ट्र सेवा के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर उनकी सार्वजनिक यात्रा और राष्ट्र सेवा से जुड़े विषयों की जानकारी भी साझा की जाएगी।

आयोजक द्वारिका प्रसाद सेमवाल ने प्रधानमंत्री के संबोधन को अभियान के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि यह पारंपरिक भोजन को स्थानीय थाली और अर्थव्यवस्था से जोड़ने के दो दशक से अधिक समय से किए जा रहे प्रयासों से जुड़ा अवसर है।

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