सुंदरबन में 10 हजार मैंग्रोव पौधों का रोपण, ग्रीन इंडिया चैलेंज ने बढ़ाया जलवायु संरक्षण अभियान

ग्रीन इंडिया चैलेंज ने सुंदरबन में 10 हजार मैंग्रोव पौधे लगाए। अभियान में 500 से अधिक लोगों और टाइगर विधवाओं ने भाग लेकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

इंटरनेशनल मैंग्रोव डे के अवसर पर ग्रीन इंडिया चैलेंज ने सुंदरबन में 10 हजार मैंग्रोव पौधों का रोपण किया। अभियान में 500 से अधिक स्वयंसेवकों और टाइगर विधवाओं ने हिस्सा लिया। यह पहल तटीय सुरक्षा, जैव विविधता और जलवायु संरक्षण की दिशा में अहम कदम है।

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के सुंदरबन में इंटरनेशनल मैंग्रोव डे के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण की एक बड़ी पहल सामने आई है। ग्रीन इंडिया चैलेंज के 9वें संस्करण के तहत सुंदरबन क्षेत्र में 10 हजार मैंग्रोव पौधे लगाए गए। इस अभियान का उद्देश्य दुनिया के सबसे बड़े ज्वारीय वन क्षेत्र को मजबूत करना, तटीय इलाकों को प्राकृतिक आपदाओं से बचाने में मदद करना और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करना है। सुंदरबन यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल है और यह क्षेत्र बंगाल की खाड़ी से आने वाले चक्रवातों के खिलाफ प्राकृतिक सुरक्षा कवच का काम करता है। यहां मौजूद मैंग्रोव वन न केवल पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि हजारों तटीय परिवारों की आजीविका का भी आधार हैं।

500 से अधिक लोगों ने लिया पौधारोपण अभियान में हिस्सा

इस विशेष अभियान में 500 से अधिक लोगों ने भाग लिया। इनमें मैंग्रोव आर्मी के सदस्य, स्थानीय ग्रामीण, महिला स्वयं सहायता समूह, वन विभाग के कर्मचारी और गांवों के स्वयंसेवक शामिल थे। ग्रीन इंडिया चैलेंज के संस्थापक और ग्रीन ग्लोबल आइकन जोगिनपल्ली संतोष कुमार के नेतृत्व में आयोजित इस अभियान का उद्देश्य केवल पौधारोपण तक सीमित नहीं था, बल्कि समुदायों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ना भी था। अभियान के दौरान लगाए गए 10 हजार मैंग्रोव पौधे आने वाले वर्षों में तटीय पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

टाइगर विधवाएं बनीं जंगल की संरक्षक

इस अभियान की सबसे खास बात यह रही कि इसमें सुंदरबन की टाइगर विधवाओं ने सक्रिय भागीदारी निभाई। ये वे महिलाएं हैं जिन्होंने मैंग्रोव क्षेत्रों में बाघों के हमलों में अपने परिवार के सदस्यों को खोया है। अक्सर सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों का सामना करने वाली इन महिलाओं ने इस अभियान में पीड़ित के रूप में नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षक के रूप में भाग लिया। उन्होंने मैंग्रोव पौधे लगाकर उस पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में योगदान दिया, जो उनके जीवन से गहराई से जुड़ा हुआ है। यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सामाजिक सशक्तिकरण का भी उदाहरण बनी।

मैंग्रोव क्यों हैं इतने महत्वपूर्ण

मैंग्रोव वन तटीय क्षेत्रों के लिए प्राकृतिक सुरक्षा दीवार की तरह काम करते हैं। ये समुद्री तूफानों, बाढ़ और तटीय कटाव से बचाव में मदद करते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, मैंग्रोव क्षेत्र कार्बन को संग्रहित करने में बेहद प्रभावी होते हैं और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एक हेक्टेयर मैंग्रोव वन उष्णकटिबंधीय वर्षावनों की तुलना में कई गुना अधिक कार्बन संग्रहित करने की क्षमता रखता है। इसके अलावा ये मछलियों और अन्य समुद्री जीवों के लिए प्राकृतिक प्रजनन स्थल भी होते हैं। सुंदरबन में रहने वाले लाखों लोगों की आजीविका मछली पालन, कृषि और वन संसाधनों पर निर्भर है। ऐसे में मैंग्रोव संरक्षण स्थानीय समुदायों के भविष्य से भी जुड़ा हुआ है।

जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से जूझ रहा सुंदरबन

सुंदरबन दुनिया के उन क्षेत्रों में शामिल है जो जलवायु परिवर्तन से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। समुद्र का बढ़ता जलस्तर, लगातार आने वाले चक्रवात, खारे पानी का बढ़ता प्रभाव और तटीय कटाव यहां के पर्यावरण और लोगों के जीवन के लिए बड़ी चुनौती बन चुके हैं। हर लगाया गया मैंग्रोव पौधा इस बदलते पर्यावरण के खिलाफ एक सुरक्षा कवच के रूप में काम कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बड़े पैमाने पर मैंग्रोव पुनर्स्थापना से तटीय क्षेत्रों की सहनशीलता बढ़ाई जा सकती है।

मैंग्रोव आर्मी की अहम भूमिका

इस अभियान में मैंग्रोव आर्मी के सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सुंदरबन में लंबे समय से संरक्षण कार्य कर रहे उमाशंकर मंडल को मैंग्रोव मैन ऑफ सुंदरबन के नाम से जाना जाता है। उनके मार्गदर्शन में स्थानीय समुदायों को मैंग्रोव संरक्षण और पौधों की देखभाल के लिए प्रेरित किया जा रहा है। अभियान के समन्वय में इग्नाइटिंग माइंड्स ऑर्गेनाइजेशन से जुड़े कृष्ण तेजा रेड्डी ने भी सहयोग किया।

ग्रीन इंडिया चैलेंज का विस्तार

ग्रीन इंडिया चैलेंज की शुरुआत वर्ष 2018 में हुई थी। यह अभियान तेलंगाना के हरित अभियान हरिता हरम से प्रेरित है। इसका उद्देश्य नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ना और बड़े स्तर पर पौधारोपण को बढ़ावा देना है। यह अभियान अब केवल एक राज्य तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में काम कर रहा है। सुंदरबन में मैंग्रोव रोपण इसी व्यापक अभियान का हिस्सा है। इस पहल के तहत लोगों को पौधे लगाने, उनकी देखभाल करने और अन्य लोगों को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करने का संदेश दिया जाता है।

एक अरब पेड़ लगाने का लक्ष्य

ग्रीन इंडिया चैलेंज ने भविष्य के लिए एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। संगठन का उद्देश्य 15 अक्टूबर 2031 तक एक अरब पेड़ लगाने का अभियान पूरा करना है। यह तारीख भारत रत्न डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जन्म शताब्दी से जुड़ी हुई है। संगठन का मानना है कि बड़े पैमाने पर नागरिक भागीदारी के जरिए जलवायु संकट से निपटने में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है।

पर्यावरण संरक्षण के साथ सामाजिक बदलाव की पहल

सुंदरबन में 10 हजार मैंग्रोव पौधों का रोपण केवल एक पर्यावरणीय कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह समुदायों को जोड़ने और उन्हें संरक्षण की जिम्मेदारी देने की पहल भी है। टाइगर विधवाओं की भागीदारी ने इस अभियान को एक मानवीय संदेश दिया है कि जिन लोगों ने जंगल से सबसे ज्यादा नुकसान झेला, वही अब उसकी सुरक्षा में सबसे आगे खड़े हैं। ग्रीन इंडिया चैलेंज की यह पहल आने वाले समय में तटीय क्षेत्रों के संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से लड़ाई में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकती है।

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