कांवड़ पर ये कैसी आस्था? 12 दिनों में पहुंचे 4.80 करोड़ भक्त, छोड़ गए 7000 मीट्रिक टन कचरा

हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के दौरान 4.80 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालु पहुंचे। 7000 मीट्रिक टन कचरा जमा हुआ, सफाई व्यवस्था पर भारी दबाव पड़ा।
कांवड़ पर ये कैसी आस्था? 12 दिनों में पहुंचे 4.80 करोड़ भक्त, छोड़ गए 7000 मीट्रिक टन कचरा
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हरिद्वार में इस बार कांवड़ यात्रा ने श्रद्धालुओं की संख्या का नया रिकॉर्ड बनाया, लेकिन आस्था के इस बड़े आयोजन के बाद शहर में फैली गंदगी ने कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। करीब 12 से 13 दिनों की कांवड़ यात्रा के दौरान 4.80 करोड़ से ज्यादा शिवभक्त हरिद्वार पहुंचे और गंगाजल लेकर अपने-अपने क्षेत्रों के लिए रवाना हुए। इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने से शहर की अर्थव्यवस्था और धार्मिक गतिविधियों को बड़ा बढ़ावा मिला, लेकिन दूसरी तरफ घाटों, कांवड़ पटरी और मेला क्षेत्र में भारी मात्रा में कचरा भी जमा हुआ। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक करीब 7000 मीट्रिक टन कचरा एकत्र हुआ।

हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के दौरान देश के अलग-अलग राज्यों से शिवभक्त पहुंचे। हरकी पैड़ी और दूसरे गंगा घाटों पर स्नान करने के बाद श्रद्धालुओं ने गंगाजल भरा और अपनी यात्रा पर आगे बढ़े। इस दौरान शहर की सड़कों, बाजारों, घाटों और कांवड़ मार्गों पर लगातार भीड़ बनी रही। पुलिस और प्रशासन ने भीड़ नियंत्रण, यातायात और सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए।

श्रद्धालुओं की संख्या पिछले साल के मुकाबले भी बढ़ी है। वर्ष 2025 में करीब 4.52 करोड़ कांवड़ियों के हरिद्वार पहुंचने की जानकारी सामने आई थी, जबकि इस बार यह आंकड़ा करीब 4.80 करोड़ तक पहुंच गया। यानी पिछले साल की तुलना में करीब 28 लाख से ज्यादा श्रद्धालु इस बार हरिद्वार आए।

इतनी बड़ी भीड़ के कारण नगर निगम की सफाई व्यवस्था पर भी जबरदस्त दबाव पड़ा। यात्रा के दौरान निगम की टीमें लगातार घाटों, कांवड़ पटरी और मेला क्षेत्र से कूड़ा उठाती रहीं, लेकिन अंतिम दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या और वाहनों का दबाव इतना बढ़ गया कि कई क्षेत्रों में नियमित सफाई प्रभावित हुई।

रिपोर्ट के मुताबिक कांवड़ यात्रा के दौरान कुल मिलाकर करीब 7000 मीट्रिक टन कचरा जमा हुआ। इसमें प्लास्टिक की बोतलें, खाने-पीने की सामग्री की पैकिंग, कपड़े और दूसरी इस्तेमाल की गई वस्तुएं शामिल थीं। भारी मात्रा में जमा कचरे ने हरिद्वार की स्वच्छता व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी।

सबसे ज्यादा चिंता उन जगहों को लेकर सामने आई जहां श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या लगातार मौजूद थी। हरकी पैड़ी समेत कई घाटों और आसपास के क्षेत्रों में कूड़े के ढेर नजर आए। धार्मिक आस्था से जुड़े इन स्थानों पर इस तरह की गंदगी ने स्वच्छता के साथ-साथ पर्यावरण को लेकर भी सवाल खड़े किए।

सबसे चौंकाने वाली तस्वीरें कुछ चेंजिंग रूम से सामने आने की बात रिपोर्टों में कही गई है। सफाईकर्मियों के अनुसार कुछ जगहों पर पानी की बोतलों में पेशाब भरा हुआ मिला और बोतलें चेंजिंग रूम में छोड़ दी गईं। ऐसी घटनाओं ने धार्मिक आयोजन के दौरान सार्वजनिक सुविधाओं के इस्तेमाल और स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी पर सवाल खड़े किए हैं।

हालांकि, इतने बड़े धार्मिक आयोजन के बाद इतनी मात्रा में कचरा जमा होने को केवल श्रद्धालुओं की लापरवाही के रूप में देखना भी पर्याप्त नहीं होगा। करोड़ों लोगों के एक साथ पहुंचने वाले आयोजन में प्रशासन के सामने कचरा प्रबंधन, शौचालय, चेंजिंग रूम, पेयजल और सफाई जैसी सुविधाओं को बड़े स्तर पर संचालित करने की चुनौती रहती है। ऐसे में श्रद्धालुओं की जिम्मेदारी के साथ-साथ व्यवस्था की क्षमता और योजना भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

नगर निगम ने यात्रा समाप्त होने के बाद विशेष सफाई अभियान तेज कर दिया है। रिपोर्टों के अनुसार 30 जुलाई से 8 अगस्त के बीच करीब 5500 मीट्रिक टन कचरा पहले ही उठाया जा चुका था। इसके बाद अंतिम दो दिनों में भी बड़ी मात्रा में कचरा साफ किया गया।

अत्यधिक भीड़ के दौरान कूड़ा उठाने वाले वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हुई। कई स्थानों पर वाहनों के प्रवेश की जगह नहीं बची, जिसके कारण सफाईकर्मियों को श्रद्धालुओं की भीड़ कम होने का इंतजार करना पड़ा। भीड़ घटने के बाद रात में सफाई अभियान को तेज किया गया।

प्रशासन ने सफाई अभियान में अतिरिक्त कर्मचारियों और भारी मशीनरी का इस्तेमाल शुरू किया है। एक रिपोर्ट के अनुसार सफाई व्यवस्था को संभालने के लिए बुलडोजर जैसी मशीनों की भी मदद ली जा रही है और हरिद्वार को सामान्य स्थिति में लाने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

कचरे के निपटारे को लेकर भी प्रशासन अब अलग-अलग उपायों पर काम कर रहा है। कचरे को छांटकर रिसाइक्लिंग के लिए भेजने की योजना पर भी काम किया जा रहा है। इस्तेमाल किए गए कपड़ों को अलग कर उन्हें रीसाइक्लिंग के जरिए दोबारा उपयोगी सामग्री में बदलने की पहल की जा रही है।

कांवड़ यात्रा हरिद्वार के लिए केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि बड़े पैमाने पर आर्थिक गतिविधि का भी माध्यम है। करोड़ों श्रद्धालुओं के पहुंचने से होटल, धर्मशाला, भोजन, परिवहन, पूजा सामग्री और स्थानीय कारोबार से जुड़े लोगों को बड़े स्तर पर काम मिलता है। लेकिन इतने बड़े आयोजन के साथ पैदा होने वाले कचरे और पर्यावरणीय दबाव का समाधान भी जरूरी है।

गंगा घाटों पर जमा होने वाला कचरा विशेष चिंता का विषय है। गंगा केवल धार्मिक आस्था का केंद्र नहीं बल्कि करोड़ों लोगों के लिए जीवनदायिनी नदी भी है। ऐसे में गंगा के आसपास प्लास्टिक और दूसरे गैर-जैविक कचरे का जमा होना पर्यावरण के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

इस बार श्रद्धालुओं की रिकॉर्ड संख्या ने प्रशासन को यह सोचने का भी मौका दिया है कि आने वाले वर्षों में कांवड़ यात्रा के लिए कचरा प्रबंधन की व्यवस्था किस तरह और मजबूत की जाए। करोड़ों लोगों की भीड़ को देखते हुए केवल सफाई कर्मचारी बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। कचरा कम पैदा हो, इसके लिए स्रोत स्तर पर ही व्यवस्था करनी होगी।

श्रद्धालुओं के लिए पर्याप्त संख्या में डस्टबिन, मोबाइल टॉयलेट, चेंजिंग रूम और कचरा संग्रह केंद्र बनाए जाने के साथ इन सुविधाओं की नियमित निगरानी भी जरूरी है। अगर किसी क्षेत्र में कुछ घंटों के भीतर ही कचरा जमा होने लगे तो वहां तुरंत सफाई टीम भेजने की व्यवस्था होनी चाहिए।

दूसरी तरफ श्रद्धालुओं को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। धार्मिक यात्रा पर आने वाले लोगों से अपेक्षा की जाती है कि वे पूजा और आस्था के साथ उस स्थान की स्वच्छता का भी ध्यान रखें। प्लास्टिक की बोतलें, भोजन के पैकेट, कपड़े या दूसरी वस्तुएं खुले में छोड़ने के बजाय निर्धारित स्थान पर डालना जरूरी है।

चेंजिंग रूम जैसी सार्वजनिक सुविधाओं के इस्तेमाल में भी अनुशासन जरूरी है। किसी भी सुविधा को गंदा करने से न केवल सफाईकर्मियों का काम बढ़ता है, बल्कि दूसरे श्रद्धालुओं को भी परेशानी होती है। धार्मिक आयोजन की गरिमा बनाए रखने के लिए सार्वजनिक स्थानों के प्रति जिम्मेदार व्यवहार जरूरी है।

इस साल करीब 4.80 करोड़ श्रद्धालुओं का हरिद्वार पहुंचना आस्था के लिहाज से बड़ा आंकड़ा है। यह बताता है कि कांवड़ यात्रा का विस्तार लगातार हो रहा है। लेकिन श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ सुविधाओं और स्वच्छता व्यवस्था को भी उसी अनुपात में बढ़ाना होगा।

पिछले वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो कांवड़ यात्रा में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ी है। रिपोर्ट में 1986 में करीब चार लाख श्रद्धालुओं से शुरू होकर 2000 में एक करोड़ और 2018 में 3.76 करोड़ तक पहुंचने का आंकड़ा दिया गया है। 2024 में यह संख्या करीब 4.14 करोड़ और 2025 में 4.52 करोड़ रही, जबकि 2026 में 4.80 करोड़ से अधिक हो गई।

इस बढ़ती संख्या के साथ हरिद्वार को धार्मिक पर्यटन और बड़े आयोजनों के लिए अपनी बुनियादी व्यवस्था को भी लगातार अपग्रेड करना होगा। भीड़ प्रबंधन के साथ-साथ कचरा प्रबंधन, सार्वजनिक शौचालय, पार्किंग, पेयजल और स्वास्थ्य सुविधाएं भी आयोजन की सफलता का हिस्सा हैं।

पुलिस और प्रशासन ने इस बार इतनी बड़ी भीड़ के बावजूद यात्रा को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने का दावा किया है। लेकिन यात्रा के बाद जमा हुआ कचरा यह संकेत देता है कि आने वाले आयोजनों में पर्यावरण और स्वच्छता को लेकर और ठोस योजना की जरूरत है।

आस्था और स्वच्छता एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। बल्कि किसी धार्मिक स्थल के प्रति सच्ची श्रद्धा का एक हिस्सा यह भी है कि वहां की प्रकृति, नदी और सार्वजनिक स्थानों को नुकसान न पहुंचाया जाए। हरिद्वार में करोड़ों लोगों का आना अपने आप में बड़ी धार्मिक और सामाजिक घटना है, लेकिन इसके साथ शहर को साफ रखना भी श्रद्धालुओं और प्रशासन दोनों की साझा जिम्मेदारी है।

कुल मिलाकर, हरिद्वार में इस बार कांवड़ यात्रा के दौरान 4.80 करोड़ से ज्यादा शिवभक्त पहुंचे और रिकॉर्ड भीड़ के साथ करीब 7000 मीट्रिक टन कचरा जमा हुआ। प्रशासन अब विशेष सफाई अभियान के जरिए शहर और घाटों को साफ करने में जुटा है। यह आंकड़ा एक तरफ आस्था की विशालता दिखाता है, तो दूसरी तरफ श्रद्धालुओं और प्रशासन दोनों के लिए स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की बड़ी जिम्मेदारी भी सामने रखता है।

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