देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में से एक HDFC Bank ने बड़ा फैसला लेते हुए भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और पूर्व वित्त सचिव राजीव कुमार को अपना पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त किया है।
HDFC Bank Chairman: देश के सबसे बड़े निजी बैंकों में शामिल HDFC बैंक ने अपने नेतृत्व ढांचे में बड़ा बदलाव किया है। बैंक के बोर्ड ने भारत के पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) और पूर्व वित्त सचिव राजीव कुमार को अगले तीन वर्षों के लिए पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही उन्हें चार साल के लिए एडिशनल इंडिपेंडेंट डायरेक्टर के रूप में भी नियुक्त किया गया है, जिसकी प्रभावी शुरुआत 30 जून 2026 से मानी जा रही है। हालांकि, यह नियुक्ति अभी शेयरधारकों की मंजूरी और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की अंतिम स्वीकृति के अधीन है।
कौन हैं राजीव कुमार?
राजीव कुमार 1984 बैच के IAS अधिकारी रह चुके हैं और प्रशासनिक सेवा में उनका लंबा अनुभव रहा है। अपने करियर के दौरान उन्होंने केंद्र सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं।
- भारत सरकार के वित्त सचिव (Finance Secretary) – 2017 से 2020
- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सेंट्रल बोर्ड सदस्य
- स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) बोर्ड सदस्य
- भारत के 25वें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC)
मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनावों का सफल संचालन किया, जिसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक चुनावों में से एक माना जाता है।
बैंकिंग और आर्थिक नीतियों में अहम भूमिका

वित्त सचिव के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान राजीव कुमार ने कई बड़े आर्थिक और बैंकिंग सुधारों में भूमिका निभाई। इनमें शामिल हैं:
- सरकारी बैंकों के मर्जर की प्रक्रिया
- ₹3 लाख करोड़ से अधिक के बैंक रीकैपिटलाइजेशन प्रोग्राम
- वित्तीय प्रणाली को मजबूत करने से जुड़े नीतिगत सुधार
उनका अनुभव बैंकिंग गवर्नेंस और पब्लिक फाइनेंस दोनों क्षेत्रों में व्यापक माना जाता है।
HDFC Bank में नेतृत्व परिवर्तन क्यों महत्वपूर्ण?
HDFC बैंक हाल के वर्षों में बड़े कॉर्पोरेट ट्रांजिशन से गुजर रहा है, खासकर HDFC लिमिटेड के साथ विलय के बाद। ऐसे में बैंक के शीर्ष नेतृत्व में स्थिरता और मजबूत गवर्नेंस को बेहद अहम माना जा रहा है। पूर्व चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे के बाद यह पद खाली था, जिससे बैंक में अस्थायी अनिश्चितता की स्थिति बन गई थी।
मार्च 2026 में तत्कालीन चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने अपने इस्तीफे का कारण नैतिकता और मूल्यगत असहमति बताया था। अपने पत्र में उन्होंने कहा था कि बैंक में कुछ कार्यप्रणालियाँ और घटनाएं उनके व्यक्तिगत नैतिक सिद्धांतों से मेल नहीं खातीं, जिसके कारण उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया।











