MLC विजयशांति ने हैदराबाद के बोराबंडा स्थित पोचम्मा मंदिर में देवी को बोनम अर्पित किया। उन्होंने तेलंगाना की खुशहाली और सुरक्षा के लिए प्रार्थना की। इस दौरान उन्होंने राज्य की स्थिति, भविष्य और तेलंगाना गठन में सोनिया गांधी की भूमिका पर भी बात की
हैदराबाद: तेलंगाना की विधान परिषद सदस्य और कांग्रेस नेता विजयशांति ने रविवार को हैदराबाद के बोराबंडा स्थित पोचम्मा मंदिर में देवी को बोनम अर्पित किया। उन्होंने राज्य की समृद्धि, शांति और सुरक्षा के लिए प्रार्थना की। इस दौरान उनके समर्थकों ने भी मंदिर पहुंचकर देवी को बोनम चढ़ाया। धार्मिक आयोजन के बाद विजयशांति ने मीडिया से बातचीत में तेलंगाना की मौजूदा स्थिति और राज्य के भविष्य को लेकर अपनी चिंता जाहिर की। MLC विजयशांति रविवार को हैदराबाद के बोराबंडा इलाके में स्थित पोचम्मा मंदिर पहुंचीं। यहां उन्होंने पारंपरिक तरीके से देवी को बोनम अर्पित किया और तेलंगाना के कल्याण की कामना की। बोनम तेलंगाना की एक प्रमुख पारंपरिक धार्मिक परंपरा है, जिसमें श्रद्धालु देवी को विशेष रूप से तैयार किया गया प्रसाद अर्पित करते हैं।
विजयशांति के मंदिर पहुंचने के दौरान उनके समर्थक भी मौजूद रहे। उन्होंने भी देवी को बोनम अर्पित किया और राज्य की खुशहाली के लिए प्रार्थना की। मंदिर परिसर में धार्मिक माहौल के बीच विजयशांति ने देवी से तेलंगाना की रक्षा और राज्य के लोगों के बेहतर भविष्य की कामना की। बोनम तेलंगाना की सांस्कृतिक पहचान से गहराई से जुड़ा हुआ है। खासकर हैदराबाद और तेलंगाना के कई हिस्सों में बोनालु उत्सव के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु स्थानीय देवी मंदिरों में पहुंचते हैं। इस दौरान देवी को बोनम अर्पित करने की परंपरा निभाई जाती है।
तेलंगाना की सुरक्षा और भविष्य को लेकर जताई चिंता
मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद विजयशांति ने मीडिया से बातचीत की। उन्होंने तेलंगाना की वर्तमान स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य में बुरी ताकतों का प्रवेश हो गया है। उन्होंने लोगों से राज्य की रक्षा और उसके भविष्य को लेकर सतर्क रहने की अपील की।
विजयशांति ने तेलंगाना की तुलना एक ऐसे सुनहरे अवसर से की, जिसकी देखभाल करने की जरूरत है। उन्होंने रूपक का इस्तेमाल करते हुए कहा कि तेलंगाना एक सुनहरी मुर्गी की तरह है, जिसे काटकर उसका लाभ उठाया जा रहा है। उनके इस बयान का उद्देश्य राज्य के संसाधनों और भविष्य को लेकर अपनी राजनीतिक चिंता जाहिर करना था। उन्होंने कहा कि तेलंगाना को कमजोर करने वाली ताकतों से सावधान रहने की जरूरत है। विजयशांति ने राज्य की जनता से भी अपील की कि वे तेलंगाना के हितों और भविष्य की रक्षा के लिए एकजुट रहें।
'बुरी ताकतों' से तेलंगाना की रक्षा की अपील
विजयशांति ने अपने संबोधन में राज्य को कथित तौर पर नुकसान पहुंचाने वाली ताकतों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि तेलंगाना के हितों की रक्षा करना सभी की जिम्मेदारी है। उनका कहना था कि राज्य के लोगों ने लंबे संघर्ष के बाद तेलंगाना हासिल किया है और अब इसकी उपलब्धियों को सुरक्षित रखना जरूरी है। उन्होंने देवी पोचम्मा से भी प्रार्थना की कि वह तेलंगाना को बुरी ताकतों से बचाएं और राज्य के लोगों पर अपना आशीर्वाद बनाए रखें। धार्मिक कार्यक्रम के दौरान उनकी यह प्रार्थना राजनीतिक संदेश से भी जुड़ी नजर आई, क्योंकि उन्होंने पूजा के बाद राज्य के भविष्य से जुड़े कई मुद्दों पर मीडिया से बात की।
विजयशांति ने तेलंगाना के विकास और लोगों के हितों को प्राथमिकता देने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने संकेत दिया कि राज्य के राजनीतिक और सामाजिक भविष्य को लेकर आने वाले समय में उनकी ओर से और भी स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने आ सकती है।
तेलंगाना गठन में सोनिया गांधी की भूमिका का जिक्र
मीडिया से बातचीत के दौरान विजयशांति ने कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी की भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि तेलंगाना राज्य के गठन में सोनिया गांधी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। तेलंगाना को अलग राज्य बनाने का आंदोलन लंबे समय तक राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चलता रहा था। अंततः 2014 में आंध्र प्रदेश के पुनर्गठन के बाद तेलंगाना भारत का 29वां राज्य बना था। राज्य गठन की प्रक्रिया में केंद्र की तत्कालीन कांग्रेस नेतृत्व वाली सरकार की भूमिका रही थी।
विजयशांति ने विशेष रूप से सोनिया गांधी के योगदान को रेखांकित किया और कहा कि तेलंगाना के गठन में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। उनका यह बयान तेलंगाना राज्य के निर्माण को लेकर कांग्रेस के राजनीतिक दावे और उसके ऐतिहासिक योगदान की ओर भी इशारा करता है।
सोनिया गांधी को लेकर विजयशांति का बयान
विजयशांति ने अपने बयान में यह भी कहा कि सोनिया गांधी तेलंगाना को लेकर आलोचनात्मक बातें कर रही हैं। उन्होंने संकेत दिया कि इस मुद्दे पर उचित समय आने पर जवाब दिया जाएगा। हालांकि, विजयशांति ने तत्काल किसी विस्तृत राजनीतिक प्रतिक्रिया की घोषणा नहीं की। उन्होंने कहा कि समय आने पर इसका जवाब दिया जाएगा। उनके इस बयान से यह संकेत मिलता है कि तेलंगाना के गठन और उसके बाद राज्य की राजनीतिक स्थिति को लेकर कांग्रेस के भीतर भी चर्चा का दौर जारी है।

विजयशांति के बयान में धार्मिक आस्था के साथ राजनीतिक संदेश भी नजर आया। उन्होंने एक तरफ पोचम्मा देवी से राज्य की रक्षा की प्रार्थना की, वहीं दूसरी तरफ तेलंगाना के राजनीतिक भविष्य और राज्य के हितों से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखी।
बोनम अर्पित करने की परंपरा
तेलंगाना में बोनम अर्पित करने की परंपरा का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है। बोनम को आम तौर पर देवी को समर्पित एक पारंपरिक प्रसाद के रूप में देखा जाता है। इसमें पकाया हुआ चावल और अन्य सामग्री विशेष रूप से तैयार कर देवी को अर्पित की जाती है।
हैदराबाद में बोनालु उत्सव के दौरान विभिन्न देवी मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस दौरान महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में बोनम लेकर मंदिर जाती हैं और देवी से परिवार तथा समाज की खुशहाली की प्रार्थना करती हैं। विजयशांति का बोराबंडा स्थित पोचम्मा मंदिर पहुंचना भी इसी धार्मिक परंपरा से जुड़ा कार्यक्रम था। उनके साथ समर्थकों की मौजूदगी ने इसे राजनीतिक और सामाजिक रूप से भी चर्चा का विषय बना दिया।
राज्य की खुशहाली के लिए की प्रार्थना
पूजा-अर्चना के दौरान विजयशांति ने तेलंगाना की शांति और समृद्धि के लिए प्रार्थना की। उन्होंने राज्य के लोगों की सुरक्षा और बेहतर भविष्य की कामना की। उनका कहना था कि तेलंगाना को नकारात्मक शक्तियों से बचाने के लिए देवी का आशीर्वाद जरूरी है।
उन्होंने राज्य के विकास और भविष्य को लेकर अपनी चिंता दोहराते हुए कहा कि तेलंगाना को उसके वास्तविक हितों के अनुसार आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने लोगों से राज्य की उपलब्धियों और उसके हितों की रक्षा करने की अपील की। धार्मिक आयोजन के बाद विजयशांति की मीडिया से बातचीत ने कार्यक्रम को राजनीतिक चर्चा से भी जोड़ दिया। उनके बयानों में तेलंगाना की राजनीति, राज्य गठन और कांग्रेस नेतृत्व की भूमिका जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
राजनीतिक संदेश के साथ समाप्त हुआ कार्यक्रम
विजयशांति का यह कार्यक्रम धार्मिक आस्था और राजनीतिक संदेश का मिश्रण रहा। उन्होंने पोचम्मा मंदिर में बोनम अर्पित कर तेलंगाना की खुशहाली की प्रार्थना की और इसके बाद राज्य के राजनीतिक भविष्य को लेकर अपनी राय रखी। उन्होंने तेलंगाना को कथित बुरी ताकतों से बचाने की अपील करते हुए कहा कि राज्य की रक्षा करना जरूरी है। साथ ही उन्होंने तेलंगाना गठन में सोनिया गांधी की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया और संकेत दिया कि सोनिया गांधी से जुड़े बयान पर उचित समय पर प्रतिक्रिया दी जाएगी।
कुल मिलाकर, बोराबंडा के पोचम्मा मंदिर में विजयशांति की पूजा और उसके बाद दिए गए बयान ने धार्मिक आयोजन को राजनीतिक चर्चा से जोड़ दिया। उनकी ओर से तेलंगाना की सुरक्षा, विकास और भविष्य को लेकर व्यक्त की गई चिंताओं के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ।











