IndusInd बैंक में अकाउंटिंग अनियमितताओं पर SFIO ने जांच शुरू की। Q4FY25 में 2,329 करोड़ का नुकसान दर्ज हुआ। डेरिवेटिव और माइक्रोफाइनेंस में गलत प्रविष्टियों का खुलासा, पूर्व एमडी-सह सीईओ ने जिम्मेदारी ली।
IndusInd Bank: निजी क्षेत्र के इंडसइंड बैंक (IndusInd Bank) में अकाउंटिंग गड़बड़ियों की जांच अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है। सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (SFIO) ने इस सप्ताह बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों से बातचीत की और बैंक से अकाउंटिंग से जुड़ी विशेष जानकारी लिखित रूप में मांगी जाएगी। SFIO कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) के अधीन काम करने वाली एजेंसी है और इसका उद्देश्य वित्तीय अनियमितताओं और धोखाधड़ी की जांच करना है।
RBI और SFIO को की गई सूचना
बैंक ने नियामकीय फाइलिंग में बताया कि रिजर्व बैंक (RBI) के मास्टर निर्देशों के तहत किसी भी 1 करोड़ रुपये या उससे अधिक की धोखाधड़ी की जानकारी RBI के साथ-साथ SFIO को देना अनिवार्य है। इसी क्रम में 2 जून 2025 को बैंक ने आंतरिक डेरिवेटिव ट्रेड्स, अन्य परिसंपत्तियों और देनदारियों में अप्रमाणित बैलेंस, और माइक्रोफाइनेंस ब्याज व शुल्क आय से जुड़ी जानकारियां SFIO को दी।
MCA के आदेश के तहत SFIO जांच
कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय (MCA) ने बैंक में अकाउंटिंग में गंभीर अनियमितताओं के चलते SFIO को जांच का आदेश दिया। यह कदम बैंक के वैधानिक ऑडिट और फॉरेंसिक रिपोर्ट्स के आधार पर उठाया गया, जिसमें जनहित से जुड़े गंभीर मुद्दों का हवाला दिया गया। वहीं, मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने शुरुआती जांच में धन हेराफेरी के कोई ठोस सबूत न मिलने पर अपनी जांच बंद करने की तैयारी शुरू कर दी है।
Q4FY25 में नुकसान दर्ज
इंडसइंड बैंक ने जनवरी-मार्च तिमाही (Q4FY25) में ₹2,329 करोड़ का शुद्ध घाटा दर्ज किया। यह घाटा मुख्य रूप से डेरिवेटिव और माइक्रोफाइनेंस पोर्टफोलियो से जुड़ी गलत अकाउंटिंग प्रविष्टियों को वापस लेने और प्रावधान बढ़ाने के कारण हुआ।
मार्च 2025 में गड़बड़ी का खुलासा
बैंक ने मार्च 2025 में आंतरिक समीक्षा के बाद डेरिवेटिव पोर्टफोलियो में गड़बड़ियों का खुलासा किया। जांच में पाया गया कि FY16 से FY24 के बीच कई डेरिवेटिव लेनदेन अकाउंटिंग दिशानिर्देशों के अनुरूप नहीं किए गए। इससे काल्पनिक (नोशनल) आय को लाभ-हानि खाते में दर्ज किया गया और एसेट्स के रूप में दिखाया गया। बैंक ने FY25 में कुल 1,959.98 करोड़ रुपये की संचित नोशनल आय को लिख-ऑफ किया। साथ ही, अन्य परिसंपत्तियों और देनदारियों में 595 करोड़ रुपये की अप्रमानित बैलेंस को समायोजित किया गया।
माइक्रोफाइनेंस में हेरफेर
बैंक की समीक्षा में यह भी पाया गया कि माइक्रोफाइनेंस पोर्टफोलियो में 673.82 करोड़ रुपये की ब्याज आय और 172.58 करोड़ रुपये की शुल्क आय को गलत तरीके से मान्यता दी गई थी। इन प्रविष्टियों को उलटने से Q4FY25 में 422.56 करोड़ रुपये का नकारात्मक असर पड़ा। इसके अलावा कुछ लोन को गलत तरीके से स्टैंडर्ड एसेट के रूप में क्लासिफाई किया गया और उस पर ब्याज दर्ज किया गया। सुधार के बाद इन लोन पर 95 प्रतिशत प्रावधान किया गया, जिसकी कुल राशि 1,791 करोड़ रुपये रही। इस प्रावधान और ब्याज आय की वापसी से लाभ-हानि खाते पर 1,969 करोड़ रुपये का प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
पूर्व प्रबंधन ने जिम्मेदारी स्वीकारी
इस संकट के बीच बैंक के पूर्व एमडी और सीईओ सुमंत कथपालिया और पूर्व डिप्टी सीईओ अरुण खुराना ने डेरिवेटिव पोर्टफोलियो में करीब 1,960 करोड़ रुपये के नुकसान की जिम्मेदारी ली और पद छोड़ दिया। मौजूदा प्रबंधन ने उनके द्वारा प्राप्त बोनस की रिकवरी (clawback) की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।











