टैरिफ वार्निंग के बीच भारत को मिली BRICS की कमान, अमेरिका की रणनीति पर बड़ा झटका

भारत 1 जनवरी 2026 से BRICS की अध्यक्षता संभालने जा रहा है। वैश्विक मंच पर विकास, सहयोग और आर्थिक रणनीति में भारत की भूमिका बढ़ेगी।

भारत 1 जनवरी 2026 से BRICS समूह की अध्यक्षता संभालेगा। यह वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका का संकेत है। अध्यक्षता के दौरान भारत सतत विकास, आर्थिक सहयोग और वैश्विक शासन सुधार पर ध्यान केंद्रित करेगा।

BRICS: भारत 1 जनवरी, 2026 से आधिकारिक रूप से ब्रिक्स (BRICS) समूह की अध्यक्षता संभालने जा रहा है। ब्रिक्स प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जिसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। इस समूह का उद्देश्य विकास, व्यापार, वित्त और वैश्विक शासन सुधार जैसे क्षेत्रों में वैश्विक दक्षिण के देशों के बीच सहयोग को बढ़ावा देना है। BRICS की अध्यक्षता सदस्य देशों के बीच प्रतिवर्ष बारी-बारी से होती है।

11 और 12 दिसंबर को ब्राजीलिया में हुई ब्रिक्स शेरपाओं की बैठक के बाद भारत को 2026 के लिए BRICS की अध्यक्षता सौंप दी गई। इस वक्त यह जिम्मेदारी ऐसे समय मिल रही है जब वैश्विक व्यापार और कूटनीति में अनिश्चितता बढ़ी हुई है। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ और व्यापार धमकियों के बीच भारत की BRICS अध्यक्षता को सिर्फ औपचारिक बदलाव नहीं बल्कि रणनीतिक और राजनीतिक महत्व का प्रतीक माना जा रहा है।

ब्राजील से भारत को सौंपा गया अध्यक्षता का प्रतीक

चौथे BRICS शेरपा सम्मेलन के समापन सत्र के दौरान 12 दिसंबर, 2025 को ब्राजील ने आधिकारिक रूप से अध्यक्षता भारत को सौंप दी। ब्राजील के शेरपा राजदूत मॉरीशियो लिरियो ने भारत के शेरपा राजदूत सुधाकर दलेला को BRICS की प्रतीकात्मक गदा सौंपी। यह गदा समूह में नेतृत्व और जिम्मेदारी के हस्तांतरण का प्रतीक है। यद्यपि यह समारोह दिसंबर में हुआ, लेकिन ब्राजील औपचारिक रूप से 31 दिसंबर, 2025 तक BRICS का अध्यक्ष बना रहेगा।

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भारत ने अपने अध्यक्ष पद के दौरान समूह की गतिविधियों में लचीलापन, इनोवेशन, सहयोग और सतत विकास के मूल सिद्धांतों पर पूरी तरह फोकस रखने का संकल्प लिया है। BRICS के भीतर यह नेतृत्व परिवर्तन वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाता है।

BRICS क्या है और इसका उद्देश्य

BRICS एक समूह है जो प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं को जोड़ता है। इसमें शामिल देश हैं ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका। इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक दक्षिण के देशों के बीच सहयोग बढ़ाना, आर्थिक विकास को बढ़ावा देना, वित्तीय सहयोग और वैश्विक शासन सुधार पर काम करना है। अध्यक्षता प्रतिवर्ष बारी-बारी से सदस्य देशों में जाती है, जिससे सभी देशों को समूह की गतिविधियों में नेतृत्व और दिशा देने का अवसर मिलता है।

ब्राजील की अध्यक्षता के प्रमुख क्षेत्र

ब्राजील ने अपनी अध्यक्षता के दौरान छह प्रमुख क्षेत्रों को प्राथमिकता दी थी। इनमें वैश्विक स्वास्थ्य सहयोग, जलवायु परिवर्तन, व्यापार, निवेश और वित्त, शांति और सुरक्षा के लिए बहुपक्षीय ढांचा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के शासन और BRICS का संस्थागत विकास शामिल थे। इन क्षेत्रों में भारत अब अपने अध्यक्षता काल में नई पहल और सुधारों पर ध्यान देगा।

वैश्विक मंच पर भारत की रणनीति

भारत ने साफ कर दिया है कि BRICS की अध्यक्षता के दौरान उसका फोकस सतत विकास, आर्थिक सहयोग और वैश्विक शासन सुधार पर रहेगा। अमेरिकी टैरिफ धमकियों और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बावजूद भारत ने कहा है कि BRICS के भीतर सभी निर्णय पारदर्शी, संतुलित और विकासमुखी होंगे। भारत की यह अध्यक्षता वैश्विक दक्षिण के देशों के बीच सहयोग को मजबूती देने का अवसर है।

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