इन्फोसिस बोर्ड के सामने बड़ा सवाल: क्या सलिल पारिख को मिलेगा तीसरा कार्यकाल या आएगा नया नेतृत्व

इन्फोसिस में CEO सलिल पारिख के कार्यकाल को लेकर चर्चा तेज है। 2027 से पहले कंपनी नेतृत्व, AI रणनीति और नए CEO विकल्प पर बड़ा फैसला ले सकती है।

इन्फोसिस में CEO सलिल पारिख के कार्यकाल को लेकर मंथन जारी है। 2027 से पहले कंपनी को तय करना होगा कि नेतृत्व में निरंतरता रखी जाए या नए CEO के साथ AI युग में बदलाव की रणनीति अपनाई जाए।

बिज़नेस न्यूज़: इन्फोसिस में इस समय कंपनी के नेतृत्व को लेकर बड़ा मंथन चल रहा है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सलिल पारिख का दूसरा कार्यकाल 31 मार्च 2027 को समाप्त होने वाला है। ऐसे में बोर्ड के सामने यह अहम सवाल खड़ा है कि तेजी से बदलते आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में कंपनी की कमान किसे सौंपी जाए। यह फैसला आने वाले समय में कंपनी की रणनीति और विकास की दिशा तय करेगा।

2027 बना निर्णायक साल

इन्फोसिस के लिए वर्ष 2027 कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर सलिल पारिख का कार्यकाल समाप्त होगा, वहीं गैर-कार्यकारी चेयरमैन नंदन निलेकणि की कंपनी में वापसी के 10 साल भी पूरे होंगे। पिछले कुछ वर्षों में कंपनी ने स्थिरता और पुनर्निर्माण का दौर देखा है और कठिन परिस्थितियों से उबरकर मजबूत स्थिति हासिल की है। अब कंपनी एक ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां उसे यह तय करना है कि वह स्थिरता को जारी रखे या बदलाव की ओर बढ़े।

तीसरे कार्यकाल की संभावना

उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार सलिल पारिख को तीसरा कार्यकाल दिया जा सकता है, हालांकि यह कार्यकाल छोटा हो सकता है जो एक से दो साल तक सीमित रहेगा। एक संभावना यह भी है कि उन्हें चेयरमैन की भूमिका दी जाए और कंपनी नए सीईओ की नियुक्ति करे। इस पर अंतिम फैसला जून में होने वाली सालाना आम बैठक में लिया जा सकता है, जो निवेशकों और बाजार के लिए बेहद अहम रहेगा।

रिटायरमेंट नीति की चुनौती

इन्फोसिस की नीति के अनुसार कार्यकारी निदेशक या प्रबंध निदेशक की सेवानिवृत्ति की उम्र 60 वर्ष निर्धारित है, जबकि सलिल पारिख इस सीमा को पार कर चुके हैं और मौजूदा कार्यकाल के अंत तक उनकी उम्र करीब 62 वर्ष हो जाएगी। हालांकि कंपनी की नामांकन और वेतन समिति शेयरधारकों की मंजूरी से कार्यकाल बढ़ा सकती है, जिसके लिए विशेष प्रस्ताव लाना जरूरी होता है और इसमें 75 प्रतिशत समर्थन अनिवार्य होता है।

इन्फोसिस बोर्ड के सामने बड़ा सवाल: क्या सलिल पारिख को मिलेगा तीसरा कार्यकाल या आएगा नया नेतृत्व

निरंतरता बनाम बदलाव का सवाल

कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह स्थिर नेतृत्व को जारी रखे या नए बदलाव को अपनाए। विशेषज्ञों का मानना है कि तीसरा कार्यकाल देने से यह संकेत जा सकता है कि कंपनी बड़े तकनीकी बदलावों की बजाय स्थिर संचालन को प्राथमिकता दे रही है, जिससे कुछ निवेशकों में सवाल उठ सकते हैं। वहीं दूसरी ओर सलिल पारिख के पास मजबूत नेतृत्व अनुभव, ग्राहकों का भरोसा और निवेशकों के साथ अच्छे संबंध हैं, जो अनिश्चित माहौल में कंपनी के लिए सकारात्मक साबित हो सकते हैं।

नए सीईओ का विकल्प

यदि कंपनी सलिल पारिख का कार्यकाल नहीं बढ़ाती है तो नया सीईओ नियुक्त करना एक अहम विकल्प होगा। कंपनी अपने किसी मौजूदा वरिष्ठ अधिकारी को शीर्ष पद पर पदोन्नत कर सकती है, जिससे अनुभव और निरंतरता दोनों का संतुलन बना रह सकता है। हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार किसी सीईओ को तीसरा कार्यकाल देना सामान्य नहीं होता और इससे यह संकेत मिल सकता है कि कंपनी ने भविष्य के नेतृत्व को तैयार करने में कमी रखी है।

सलिल पारिख का प्रदर्शन

सलिल पारिख ने जनवरी 2018 में कंपनी की कमान संभाली थी जब इन्फोसिस एक बड़े संकट से गुजर रही थी और आंतरिक विवादों के कारण उसकी छवि प्रभावित हुई थी। उनके नेतृत्व में कंपनी ने स्थिर और अनुशासित विकास हासिल किया और आय 2017-18 के 70,522 करोड़ रुपये से बढ़कर 31 मार्च 2025 तक 1.62 लाख करोड़ रुपये हो गई। इसी दौरान शुद्ध लाभ भी 16,029 करोड़ रुपये से बढ़कर 26,713 करोड़ रुपये तक पहुंच गया और कंपनी ने कई रणनीतिक अधिग्रहण भी किए।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर फोकस

इन्फोसिस ने हाल के वर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अपनी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है और कंपनी अपने बिजनेस मॉडल को नई तकनीकों के अनुसार ढाल रही है। हालिया आंकड़ों के अनुसार कंपनी की कुल आय में एआई से जुड़ा हिस्सा 5.5 प्रतिशत तक पहुंच गया है और आने वाले समय में इस क्षेत्र में बड़े अवसर देखने को मिल सकते हैं।

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