अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। हाल ही में दोनों देशों के बीच हुए समझौते के बावजूद ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि उसे अमेरिका पर बिल्कुल भरोसा नहीं है।
Iran-US Tensions: मध्य पूर्व में एक बार फिर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। हालिया कूटनीतिक प्रयासों और वार्ताओं के बावजूद ईरान और अमेरिका के बीच विश्वास का संकट बरकरार है। ईरानी संसद (मजलिस) के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने स्पष्ट कहा है कि ईरान को अमेरिका पर "रत्तीभर भी भरोसा नहीं" है और यदि वॉशिंगटन किसी समझौते से पीछे हटता है, तो तेहरान अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार है।
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान के साथ जारी संघर्षविराम (Ceasefire) को समाप्त मानते हुए संकेत दिया है कि दोनों देशों के बीच हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं। इन बयानों ने क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।
गालिबाफ का अमेरिका पर तीखा हमला
स्थानीय समयानुसार शुक्रवार को इंडोनेशिया की पीपुल्स कंसल्टेटिव असेंबली के स्पीकर अहमद मुजानी के साथ बैठक के बाद ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि ईरान किसी भी संभावित चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका पिछले महीने हुए मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) की शर्तों से पीछे हटता है या अपने वादों का पालन नहीं करता, तो ईरान "पूर्ण स्तर की रक्षा" (Full-Scale Defense) के लिए तैयार रहेगा।
गालिबाफ के अनुसार, ईरान की रक्षा तैयारियां लगातार जारी हैं और देश किसी भी संभावित सैन्य या राजनीतिक दबाव का मजबूती से जवाब देने की क्षमता रखता है।
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जेडी वेंस से बातचीत का किया उल्लेख
गालिबाफ ने यह भी दावा किया कि हालिया शांति वार्ताओं के दौरान उन्होंने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से सीधे कहा था कि ईरान को अमेरिका पर बिल्कुल भरोसा नहीं है। उनके अनुसार, किसी भी देश को अमेरिका के साथ वार्ता तभी करनी चाहिए जब वह अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा के लिए पूरी तरह तैयार हो। उन्होंने कहा कि ईरान हमेशा अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करता रहा है और भविष्य में भी अपनी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा।
गालिबाफ ने दोहराया कि यदि किसी भी समझौते का उल्लंघन होता है, तो ईरान अपने राष्ट्रीय हितों और नागरिकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक सभी कदम उठाएगा।
ट्रंप का बयान बढ़ा रहा है तनाव
ईरानी नेतृत्व की इन टिप्पणियों के समानांतर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच पर कहा कि ईरान ने अमेरिका के साथ बातचीत जारी रखने की इच्छा जताई है और अमेरिका इस प्रक्रिया के लिए तैयार है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच लागू संघर्षविराम अब प्रभावी नहीं माना जा सकता।
राष्ट्रपति ट्रंप के इस बयान को विश्लेषक अमेरिका की सख्त कूटनीतिक रणनीति और ईरान पर दबाव बनाए रखने के संकेत के रूप में देख रहे हैं। बढ़ते तनाव के बीच कतर ने एक बार फिर मध्यस्थ की भूमिका निभाने की पहल की है। कतर के प्रतिनिधि हाल ही में ईरान पहुंचे हैं, जहां उनका उद्देश्य दोनों देशों के बीच संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना और तनाव कम करने के लिए संभावित रास्ते तलाशना है।
राजनयिक सूत्रों के अनुसार, यह पहल अमेरिका के साथ समन्वय में की गई है। माना जा रहा है कि कतर दोनों पक्षों के बीच विश्वास बहाली और भविष्य की वार्ताओं के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने की कोशिश कर रहा है।









