मानसून शुरू होते ही पूर्वी सिंहभूम में डेंगू रोकथाम अभियान तेज कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने जिले के 15 क्षेत्रों को संवेदनशील घोषित कर विशेष निगरानी, जागरूकता कार्यक्रम और प्रशिक्षण अभियान शुरू किया है।
जमशेदपुर: मानसून की दस्तक के साथ पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग डेंगू को लेकर सतर्क हो गया है। पिछले वर्षों में सामने आए मामलों को देखते हुए इस बार जिले के 15 क्षेत्रों को डेंगू के लिए संवेदनशील घोषित किया गया है। स्वास्थ्य विभाग ने विशेष मॉनिटरिंग व्यवस्था लागू करते हुए जनजागरूकता और रोकथाम अभियान को तेज कर दिया है।
15 क्षेत्रों को घोषित किया गया संवेदनशील
स्वास्थ्य विभाग ने जिले के जिन इलाकों को डेंगू के लिहाज से सबसे अधिक जोखिम वाला माना है, उनमें मानगो, गोलमुरी, बारीडीह-एग्रिको, बागबेड़ा, सिदगोड़ा, बिरसानगर, बिष्टुपुर, छोटा गोविंदपुर, जुगसलाई, कदमा, परसुडीह, साकची, सोनारी, टेल्को और चाकुलिया शामिल हैं। इन क्षेत्रों में हर वर्ष डेंगू के मामलों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक रहती है, इसलिए यहां विशेष निगरानी और एंटी-लार्वा गतिविधियों पर जोर दिया जा रहा है।

विभागीय आंकड़ों के अनुसार जुलाई से डेंगू के मामलों में वृद्धि शुरू हो जाती है, जबकि अगस्त से नवंबर के बीच संक्रमण अपने उच्च स्तर पर पहुंच जाता है। यही वजह है कि स्वास्थ्य विभाग ने मानसून के शुरुआती दौर से ही तैयारियां तेज कर दी हैं।
मानगो, टेल्को और चाकुलिया में सबसे अधिक खतरा
पिछले वर्षों के रिकॉर्ड बताते हैं कि मानगो, कदमा, टेल्को और चाकुलिया डेंगू के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल रहे हैं। वर्ष 2024 में सबसे अधिक 225 मामले मानगो क्षेत्र से सामने आए थे। इसके अलावा टेल्को में 131, चाकुलिया में 105 और कदमा में 100 मरीजों की पुष्टि हुई थी।
वर्ष 2023 में जिले में डेंगू के कुल 1,476 मामले दर्ज किए गए थे। इसी दौरान चिकुनगुनिया के 80 और जापानी इंसेफ्लाइटिस (जेई) के 4 मामले भी सामने आए थे। हालांकि राहत की बात यह है कि वर्ष 2026 में अब तक जिले में डेंगू का कोई पुष्ट मामला दर्ज नहीं किया गया है।
बच्चों पर विशेष फोकस, शुरू हुआ जागरूकता अभियान
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 14 वर्ष तक के बच्चों में डेंगू संक्रमण का खतरा सबसे अधिक देखा गया है। वर्ष 2023 में 0 से 14 वर्ष आयु वर्ग के लगभग 19.5 प्रतिशत बच्चे डेंगू से प्रभावित हुए थे। इसके मुकाबले अन्य आयु वर्गों में संक्रमण का प्रतिशत अपेक्षाकृत कम रहा।
इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने स्कूलों में विशेष जागरूकता कार्यक्रम चलाने का निर्णय लिया है। बच्चों और अभिभावकों को डेंगू के लक्षण, बचाव और साफ-सफाई के महत्व के बारे में जानकारी दी जाएगी, ताकि संक्रमण को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सके।
रोकथाम के लिए तैयार किया गया माइक्रो प्लान
डेंगू नियंत्रण अभियान को प्रभावी बनाने के लिए पूरे शहर को साकची, मानगो और जुगसलाई नामक तीन प्रमुख सेक्टरों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक सेक्टर की निगरानी की जिम्मेदारी अलग-अलग अधिकारियों को सौंपी गई है।
इसके साथ ही मल्टी पर्पस वर्कर्स (एमपीडब्ल्यू) को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जबकि सहिया कर्मियों का प्रशिक्षण जारी है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी चिकित्सा अधिकारियों को भी अलर्ट मोड में रहने और संदिग्ध मामलों की तत्काल पहचान एवं रिपोर्टिंग के निर्देश दिए हैं।
विभाग का कहना है कि समय रहते जागरूकता, नियमित निगरानी और सामुदायिक सहयोग के जरिए डेंगू के संभावित खतरे को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। इसलिए लोगों से घरों और आसपास पानी जमा न होने देने तथा मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाने की अपील की गई है।










