जन्माष्टमी के अवसर पर इस्कॉन टेंपल में आस्था और उत्सव का भव्य संगम देखने को मिला। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव में शामिल होने के लिए करीब 2 लाख भक्त मंदिर पहुंचे। सुबह से देर रात तक मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रही। भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन किए और जन्मोत्सव के धार्मिक अनुष्ठानों में हिस्सा लिया। मंदिर परिसर में 108 कलश से भगवान का जलाभिषेक किया गया, जबकि भगवान को 256 प्रकार के भोग अर्पित किए गए।
जन्माष्टमी के चलते मंदिर को विशेष रूप से सजाया गया था। रंग-बिरंगी रोशनी, फूलों और आकर्षक सजावट से मंदिर परिसर की भव्यता देखते ही बन रही थी। भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप को विशेष रूप से सजाया गया। दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। जैसे-जैसे दिन आगे बढ़ा, मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में भक्तों की संख्या बढ़ती गई।
भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों के बीच 108 कलश से जलाभिषेक कराया गया। भक्तों ने इस विशेष आयोजन में श्रद्धा के साथ हिस्सा लिया। मंदिर में श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन का सिलसिला लगातार चलता रहा। कृष्ण जन्म के समय मंदिर परिसर में विशेष आरती और पूजा का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
इस दौरान भगवान को 256 प्रकार के भोग भी लगाए गए। अलग-अलग तरह के व्यंजनों से भगवान श्रीकृष्ण को भोग अर्पित किया गया। जन्माष्टमी पर भोग की विशेष व्यवस्था भक्तों के लिए भी आकर्षण का केंद्र रही। मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन के साथ कृष्ण जन्मोत्सव का आनंद लिया और भगवान के जयकारे लगाए।
धार्मिक आयोजनों के साथ इस बार जन्माष्टमी समारोह में संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी खास आकर्षण रहे। बॉलीवुड के लोकप्रिय गायक बी प्राक ने लाइव परफॉर्मेंस दी। उनके गानों पर मंदिर परिसर में मौजूद श्रद्धालु और दर्शक झूमते नजर आए। भक्ति और संगीत के इस संगम ने जन्माष्टमी के उत्सव को और खास बना दिया।
बी प्राक की प्रस्तुति के दौरान बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम स्थल पर जुटे रहे। जैसे ही उन्होंने अपनी प्रस्तुति शुरू की, दर्शकों में उत्साह बढ़ गया। लोगों ने तालियों और जयकारों के साथ उनका स्वागत किया। उनके लाइव शो ने धार्मिक आयोजन के बीच मनोरंजन का रंग भी जोड़ दिया।
कार्यक्रम में अक्षरा की परफॉर्मेंस भी आकर्षण का केंद्र रही। उनकी प्रस्तुति पर दर्शक जमकर झूमे। मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के दौरान भक्तों और दर्शकों का उत्साह लगातार बना रहा। जन्माष्टमी के पारंपरिक धार्मिक कार्यक्रमों के साथ आधुनिक संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने पूरे आयोजन को उत्सव के बड़े मंच में बदल दिया।
मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की भारी संख्या को देखते हुए सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। दर्शन के लिए आने वाले लोगों की आवाजाही को व्यवस्थित रखने की कोशिश की गई। मंदिर परिसर में पुलिस और सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी रही। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए अलग-अलग स्थानों पर व्यवस्था की गई थी, ताकि श्रद्धालुओं को दर्शन के दौरान ज्यादा परेशानी न हो।
जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के दर्शन के लिए पहुंचे भक्तों में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी शामिल रहे। कई श्रद्धालु परिवार के साथ मंदिर पहुंचे। लोगों ने भगवान के बाल स्वरूप के दर्शन किए और पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर में कृष्ण भक्ति के गीतों और जयकारों से माहौल भक्तिमय बना रहा।
रात में जैसे-जैसे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का समय नजदीक आया, मंदिर में उत्साह और बढ़ता गया। भक्त जन्म के क्षण का इंतजार करते रहे। मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की घोषणा के साथ मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और आरती हुई। भक्तों ने जय श्रीकृष्ण और राधे-राधे के जयकारे लगाए। इस दौरान मंदिर परिसर में भक्ति का अलग ही माहौल देखने को मिला।
करीब 2 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने से यह आयोजन बड़े धार्मिक समारोह में बदल गया। एक ओर जहां भक्तों ने पूजा, अभिषेक और भोग के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की आराधना की, वहीं दूसरी ओर बी प्राक और अक्षरा की प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को सांस्कृतिक रंग दिया। इस वजह से जन्माष्टमी का आयोजन श्रद्धालुओं के साथ-साथ संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में रुचि रखने वाले लोगों के लिए भी खास रहा।
इस्कॉन टेंपल में आयोजित जन्माष्टमी समारोह ने धार्मिक आस्था, भक्ति संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को एक साथ जोड़ दिया। 108 कलश से जलाभिषेक, 256 भोग, विशेष पूजा और मध्यरात्रि जन्मोत्सव के साथ लाखों भक्तों ने भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद लिया। वहीं बी प्राक के लाइव शो और अक्षरा की परफॉर्मेंस ने पूरे आयोजन में उत्साह और उमंग का माहौल बनाए रखा।