नालंदा के सदर अस्पताल में सांस से जुड़ी बीमारियों से परेशान मरीजों के लिए राहत की खबर है। अस्पताल में आधुनिक कंप्यूटराइज्ड स्पाइरोमीटर मशीन की सुविधा शुरू की गई है। इस मशीन के जरिए अब मरीजों के फेफड़ों की कार्यक्षमता और सांस लेने से जुड़ी समस्याओं की जांच की जा सकेगी। खास बात यह है कि अस्पताल में आने वाले मरीजों को यह जांच सुविधा मुफ्त में उपलब्ध कराई जाएगी। इससे सांस की बीमारी की शुरुआती पहचान और समय पर इलाज शुरू करने में मदद मिलेगी।
सदर अस्पताल की ओपीडी में हर दिन बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। इनमें करीब 40 मरीज ऐसे होते हैं, जिन्हें सांस लेने में परेशानी, लगातार खांसी, सीने में जकड़न या फेफड़ों से संबंधित दूसरी शिकायतें रहती हैं। ऐसे मरीजों के लिए स्पाइरोमीटर जांच काफी उपयोगी साबित हो सकती है। डॉक्टरों की सलाह के बाद जरूरत पड़ने पर मरीजों की इस मशीन से जांच की जाएगी।
स्पाइरोमीटर एक ऐसी मशीन है, जिसके जरिए यह पता लगाया जाता है कि व्यक्ति कितनी मात्रा में हवा फेफड़ों में ले सकता है और कितनी तेजी से उसे बाहर निकाल सकता है। सांस से जुड़ी कई बीमारियों की जांच और निगरानी में इसका इस्तेमाल किया जाता है। खासकर अस्थमा और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज यानी COPD जैसी स्थितियों में फेफड़ों की कार्यक्षमता का आकलन करने के लिए यह जांच महत्वपूर्ण मानी जाती है।
अब तक कई मरीजों को इस तरह की जांच के लिए बड़े अस्पतालों या निजी जांच केंद्रों का रुख करना पड़ता था। इससे उन्हें अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता था और कई बार जांच में देरी भी हो जाती थी। सदर अस्पताल में मशीन उपलब्ध होने के बाद आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को सबसे ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार ओपीडी में आने वाले मरीजों को जांच के लिए भेज सकेंगे।
अस्पताल में प्रतिदिन सांस संबंधी शिकायत लेकर आने वाले मरीजों की संख्या को देखते हुए यह सुविधा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बदलते मौसम, धूल, धुआं, प्रदूषण और अन्य कारणों से लोगों में सांस संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं। लंबे समय से खांसी रहने, सांस फूलने या थोड़ी सी मेहनत के बाद सांस लेने में परेशानी होने वाले मरीजों को समय रहते जांच कराने की सलाह दी जाती है।
कंप्यूटराइज्ड स्पाइरोमीटर की मदद से जांच के आंकड़े डिजिटल रूप में दर्ज किए जा सकते हैं। इससे डॉक्टरों को मरीज के फेफड़ों की स्थिति समझने में सुविधा होती है। जरूरत पड़ने पर आगे के इलाज और नियमित निगरानी के दौरान इन रिपोर्टों की तुलना भी की जा सकती है। इससे बीमारी की स्थिति में हो रहे बदलाव को समझने में चिकित्सकों को मदद मिल सकती है।
अस्पताल प्रशासन की ओर से इस सुविधा को मरीजों तक पहुंचाने की तैयारी की गई है। ओपीडी में जांच के लिए आने वाले मरीजों में जिन लोगों को सांस से जुड़ी परेशानी होगी, उन्हें डॉक्टर की सलाह के आधार पर स्पाइरोमीटर जांच की सुविधा दी जाएगी। जांच के बाद रिपोर्ट के आधार पर चिकित्सक मरीज को आवश्यक दवा और आगे के उपचार के संबंध में सलाह देंगे।
विशेषज्ञों के अनुसार सांस की बीमारी को लंबे समय तक नजरअंदाज करना कई बार परेशानी बढ़ा सकता है। शुरुआत में मामूली लगने वाली सांस फूलने या लगातार खांसी की समस्या बाद में गंभीर रूप ले सकती है। ऐसे में समय पर जांच कराकर बीमारी की सही वजह का पता लगाना जरूरी है। स्पाइरोमीटर जैसी जांच से फेफड़ों की कार्यक्षमता के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
नालंदा सदर अस्पताल में इस सुविधा के शुरू होने से जिले के मरीजों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर जांच की सुविधा मिलने लगेगी। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों के लिए यह राहत की बात है, क्योंकि उन्हें सामान्य जांच के लिए भी दूसरे बड़े चिकित्सा संस्थानों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। मुफ्त जांच होने के कारण आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर इलाज का अतिरिक्त बोझ भी कम होगा।
अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब 40 मरीज सांस से जुड़ी शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में स्पाइरोमीटर जांच की मांग बढ़ने की संभावना है। डॉक्टरों का कहना है कि जिन मरीजों को बार-बार सांस लेने में परेशानी होती है, सीढ़ियां चढ़ने या थोड़ी दूरी चलने पर सांस फूलती है, लगातार खांसी रहती है या पहले से सांस की बीमारी है, उन्हें चिकित्सकीय सलाह के अनुसार जांच करानी चाहिए।
इस आधुनिक मशीन की सुविधा शुरू होने के बाद अब सदर अस्पताल में सांस के मरीजों की जांच व्यवस्था पहले की तुलना में बेहतर होने की उम्मीद है। मरीजों को मुफ्त जांच मिलने के साथ डॉक्टरों को भी बीमारी का आकलन करने में मदद मिलेगी। इससे समय पर उपचार शुरू करने और मरीजों की स्थिति पर नजर रखने में सुविधा होगी।
कुल मिलाकर नालंदा सदर अस्पताल में कंप्यूटराइज्ड स्पाइरोमीटर की शुरुआत सांस संबंधी बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए अहम सुविधा है। रोजाना बड़ी संख्या में सांस के मरीजों के ओपीडी पहुंचने के बीच यह मशीन जांच की प्रक्रिया को आसान बनाएगी। मुफ्त सुविधा मिलने से मरीजों को निजी केंद्रों पर होने वाला खर्च बचाने में भी मदद मिलेगी और फेफड़ों से जुड़ी समस्याओं की पहचान अस्पताल में ही की जा सकेगी।









