झारखंड वेतन घोटाले की जांच तेज, रांची, रामगढ़ और देवघर के केस CID को सौंपे जाएंगे

झारखंड में अवैध वेतन निकासी घोटाले के रांची, रामगढ़ और देवघर से जुड़े तीन मामलों की जांच CID को सौंपी जाएगी। SIT अब कुल छह मामलों की जांच करेगी।

झारखंड में अवैध वेतन निकासी से जुड़े तीन और मामलों की जांच अब CID करेगी। रांची, रामगढ़ और देवघर के मामलों को टेकओवर कर विशेष जांच टीम जांच का दायरा बढ़ाएगी। इससे CID के पास कुल छह मामलों की जांच की जिम्मेदारी होगी।

रांची: झारखंड में करोड़ों रुपये के अवैध वेतन निकासी मामले की जांच का दायरा बढ़ने जा रहा है। अपराध अनुसंधान विभाग (CID) की विशेष जांच टीम अब रांची, रामगढ़ और देवघर से जुड़े तीन नए मामलों की जांच अपने हाथ में लेगी। ये मामले पशुपालन और स्वास्थ्य विभाग में कथित वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी धन के गबन से जुड़े हैं।

तीन नए मामलों की जांच CID को सौंपने की तैयारी

झारखंड में सामने आए अवैध वेतन निकासी घोटाले की जांच लगातार विस्तार ले रही है। बोकारो, हजारीबाग और चाईबासा में दर्ज मामलों की जांच पहले से कर रही CID की विशेष जांच टीम (SIT) अब रांची, रामगढ़ और देवघर में दर्ज मामलों को भी अपने अधिकार क्षेत्र में लेने की तैयारी कर रही है।

झारखंड वेतन घोटाले की जांच तेज, रांची, रामगढ़ और देवघर के केस CID को सौंपे जाएंगे

जानकारी के अनुसार, इन तीनों मामलों को टेकओवर करने के बाद CID थाना रांची में अलग-अलग प्राथमिकी दोबारा दर्ज की जाएगी। इसके साथ ही अवैध वेतन निकासी से जुड़े कुल छह मामलों की जांच CID के अधीन आ जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि विभिन्न जिलों में सामने आए मामलों के बीच संभावित संबंधों की भी जांच की जाएगी।

रांची में 2.94 करोड़ रुपये की अवैध निकासी का आरोप

रांची में पशुपालन विभाग से जुड़े एक मामले में करीब 2.94 करोड़ रुपये की अवैध वेतन निकासी का आरोप सामने आया था। यह मामला कांके स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल हेल्थ एंड प्रोडक्शन से जुड़ा है।

शिकायत के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2025-26 के बीच वेतन बिलों में कथित छेड़छाड़ कर सरकारी धन निजी खातों में ट्रांसफर किया गया। आरोप है कि संस्थान के लेखापाल और एक अन्य कर्मचारी ने मूल वेतन से संबंधित आंकड़ों में बदलाव कर बड़ी राशि निकाली।

मामले में एक आरोपी को पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है, जबकि दूसरा आरोपी अभी भी फरार बताया जा रहा है। अब इस पूरे प्रकरण की जांच CID द्वारा की जाएगी।

देवघर में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा गबन मामला

देवघर जिले के सारवां क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग से जुड़े मामले में लगभग 99 लाख रुपये से अधिक के गबन का आरोप है। इस मामले में एक तत्कालीन लेखा लिपिक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

जांच में आरोप लगाया गया कि वित्तीय वर्ष 2017-18 और 2018-19 के दौरान कई कर्मचारियों के नाम और बैंक खातों का उपयोग कर सरकारी राशि का अवैध भुगतान किया गया। इस मामले में आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है।

CID अब इस मामले को दोबारा दर्ज कर दस्तावेजों, बैंक लेनदेन और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड की विस्तृत जांच करेगी।

रामगढ़ में भी सामने आया था फर्जी निकासी का मामला

रामगढ़ जिले में पशुपालन विभाग के कार्यालय से करीब 34.25 लाख रुपये की कथित अवैध निकासी का मामला सामने आया था। विभागीय ऑडिट और प्रारंभिक जांच में अधिकारियों तथा कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका जताई गई थी।

स्थानीय स्तर पर मामला दर्ज होने के बाद इसकी जांच चल रही थी, लेकिन अब CID इसे अपने हाथ में लेकर जांच को आगे बढ़ाएगी। माना जा रहा है कि राज्यभर में सामने आए समान प्रकृति के मामलों के बीच संबंधों की भी पड़ताल की जाएगी।

SIT करेगी समन्वित जांच

CID अधिकारियों का मानना है कि अलग-अलग जिलों में सामने आए इन मामलों की जांच एक ही एजेंसी द्वारा किए जाने से वित्तीय अनियमितताओं के पूरे नेटवर्क का पता लगाने में मदद मिलेगी। विशेष जांच टीम दस्तावेजों, बैंक खातों, भुगतान रिकॉर्ड और विभागीय प्रक्रियाओं की गहन जांच करेगी।

जांच एजेंसी यह भी पता लगाएगी कि इन मामलों में केवल स्थानीय स्तर पर अनियमितताएं हुईं या फिर इसके पीछे कोई बड़ा संगठित नेटवर्क सक्रिय था। आने वाले दिनों में जांच के आधार पर और भी खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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