झारखंड के सिमडेगा जिले के जलडेगा प्रखंड में केवाईसी सत्यापन के दौरान विधवा पेंशन योजना में अनियमितता का मामला सामने आया। जांच में एक महिला को पति के जीवित होने के बावजूद पेंशन लेते पाया गया, जिसके बाद 43 हजार रुपये सरकारी खाते में वापस जमा कराए गए।
Simdega: झारखंड के जलडेगा प्रखंड में चल रहे केवाईसी सत्यापन अभियान के दौरान विधवा पेंशन योजना में कथित फर्जीवाड़े का मामला उजागर हुआ है। जांच में पता चला कि एक महिला वर्षों से पति के जीवित रहने के बावजूद विधवा पेंशन का लाभ ले रही थी। मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने राशि की वसूली कर सरकारी खाते में जमा करा दी है।
केवाईसी सत्यापन में सामने आया पेंशन योजना का मामला
झारखंड के सिमडेगा जिले के जलडेगा प्रखंड में सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों का सत्यापन किया जा रहा है। इसी प्रक्रिया के दौरान विधवा पेंशन योजना से जुड़ी एक अनियमितता का खुलासा हुआ। जांच में पाया गया कि टिनगिना पंचायत के पियोसोकरा गांव की रहने वाली सुषमा सुरीन पति के जीवित होने के बावजूद लंबे समय से विधवा पेंशन का लाभ प्राप्त कर रही थीं।
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अधिकारियों के अनुसार दस्तावेजों और लाभार्थी विवरण की जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया। इसके बाद संबंधित रिकॉर्ड की विस्तार से समीक्षा की गई, जिसमें पेंशन स्वीकृति और भुगतान संबंधी जानकारी की पुष्टि की गई।
चार वर्षों में खाते में पहुंचे 43 हजार रुपये
प्रशासनिक जांच में सामने आया कि सुषमा सुरीन का विधवा पेंशन आवेदन वर्ष 2021 में स्वीकृत हुआ था। रिकॉर्ड के अनुसार अगस्त 2022 से मार्च 2026 तक उनके बैंक खाते में पेंशन मद से कुल 43 हजार रुपये जमा किए गए। यह राशि नियमित रूप से योजना के तहत भेजी जाती रही।
स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार संबंधित महिला वर्तमान में झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) से जुड़े एक पद पर भी कार्यरत हैं। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पूरे मामले की जांच जारी है और सभी तथ्यों का सत्यापन किया जा रहा है।
प्रशासन ने वापस जमा कराई पूरी राशि
मामले की जानकारी मिलते ही प्रखंड प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई शुरू की। प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) डॉ. प्रवीण कुमार ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। इसके बाद पेंशन मद से प्राप्त पूरी 43 हजार रुपये की राशि सरकारी खाते में वापस जमा करा दी गई।
अधिकारियों का कहना है कि सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता बनाए रखने और पात्र लोगों तक लाभ पहुंचाने के लिए सत्यापन अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के दौरान कई मामलों की जांच की जा रही है ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता को समय रहते रोका जा सके।
अपात्र लाभार्थियों पर होगी कार्रवाई
प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि यदि जांच में कोई व्यक्ति योजना के लिए अपात्र पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही गलत तरीके से प्राप्त की गई सरकारी राशि की वसूली भी सुनिश्चित की जाएगी।
बीडीओ ने कहा कि सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद और पात्र लोगों को सहायता प्रदान करना है। इसलिए योजनाओं में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या गलत जानकारी देकर लाभ लेने के मामलों को गंभीरता से लिया जाएगा। फिलहाल मामले की विस्तृत जांच जारी है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
केवाईसी सत्यापन अभियान के चलते अब अन्य लाभार्थियों के दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। प्रशासन को उम्मीद है कि इससे योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और वास्तविक लाभार्थियों तक सरकारी सहायता प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगी।








