झारखंड के हजारीबाग में कोयला खनन के खिलाफ बड़ा आंदोलन, बड़कागांव के हजारों ग्रामीणों ने समाहरणालय घेरा

हजारीबाग के बड़कागांव में कोल खनन के विरोध में हजारों विस्थापितों ने समाहरणालय घेरा। ग्रामीणों ने जमीन बचाने की मांग की और आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।

हजारीबाग के बड़कागांव में कोल खनन के खिलाफ हजारों विस्थापित ग्रामीणों ने समाहरणालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने अपनी उपजाऊ जमीन बचाने की मांग की और जबरन भूमि अधिग्रहण रोके जाने तक आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी।

हजारीबाग: झारखंड के हजारीबाग जिले में शुक्रवार को कोयला खनन परियोजनाओं के खिलाफ बड़े पैमाने पर जनआंदोलन देखने को मिला। बड़कागांव क्षेत्र के हजारों विस्थापित ग्रामीणों ने जिला समाहरणालय (कलेक्ट्रेट) का घेराव करते हुए जमीन अधिग्रहण और नए कोल ब्लॉकों के आवंटन का जोरदार विरोध किया।

इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में पुरुषों के साथ महिलाएं भी शामिल थीं, जिन्होंने पारंपरिक हथियारों और तख्तियों के साथ अपनी उपजाऊ जमीन बचाने की मांग उठाई।

बड़कागांव में कोयला परियोजनाओं पर बढ़ता विवाद

प्रदर्शनकारियों का मुख्य विरोध बड़कागांव पूर्वी क्षेत्र में नए कोल ब्लॉकों के आवंटन को लेकर है। ग्रामीणों का कहना है कि वे अपनी बहुफसलीय और उपजाऊ कृषि भूमि किसी भी स्थिति में निजी कंपनियों को नहीं सौंपेंगे।

जानकारी के अनुसार, इस क्षेत्र में कोल ब्लॉकों का आवंटन कई बड़ी कंपनियों को किया गया है, जिनमें शामिल हैं—

  • अडानी समूह
  • जेएसडब्ल्यू (JSW) समूह
  • एलएमडीवी (LMDV)
  • ग्रामीणों का आरोप है कि इन परियोजनाओं से उनकी आजीविका, कृषि और पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।

हजारों ग्रामीणों का समाहरणालय घेराव

प्रदर्शन के दौरान हजारों ग्रामीणों ने जिला मुख्यालय पहुंचकर समाहरणालय परिसर का घेराव किया। भीड़ में बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल थीं, जिन्होंने विरोध प्रदर्शन में सक्रिय भूमिका निभाई।

महिलाओं ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि वे अपनी जमीन किसी भी कीमत पर कोल कंपनियों को नहीं सौंपेंगी। कई प्रदर्शनकारी हाथों में तख्तियां लेकर शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ विरोध दर्ज करा रहे थे।

आंदोलन का नेतृत्व और ग्रामीणों की चेतावनी

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे स्थानीय प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन और कंपनियां जबरन भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी रखती हैं, तो आंदोलन और अधिक उग्र रूप ले सकता है।

ग्रामीणों ने कहा कि बड़कागांव पश्चिम क्षेत्र में पहले ही खनन गतिविधियों के कारण बड़े पैमाने पर विस्थापन और पर्यावरणीय क्षति हो चुकी है। अब वे पूर्वी क्षेत्र को उसी स्थिति में नहीं जाने देंगे।

कृषि भूमि और आजीविका पर संकट

प्रदर्शनकारियों ने बताया कि जिस भूमि को कोयला खनन के लिए अधिग्रहित करने की योजना है, वह अत्यंत उपजाऊ और बहुफसलीय कृषि क्षेत्र है।

यहां किसान सालभर में कई प्रकार की फसलें उगाते हैं, जिनमें शामिल हैं—

  • धान
  • गेहूं
  • दलहन
  • गन्ना (गुड़ उत्पादन के लिए)
  • हरी सब्जियां

यह कृषि व्यवस्था हजारों परिवारों की आजीविका का मुख्य आधार है। ग्रामीणों का कहना है कि खनन परियोजनाओं से न केवल उनकी जमीन छिन जाएगी, बल्कि वे रोजगार और खाद्य सुरक्षा दोनों से वंचित हो जाएंगे।

महिलाओं की सक्रिय भूमिका बनी आंदोलन की पहचान

इस प्रदर्शन की सबसे खास बात इसमें महिलाओं की बड़ी भागीदारी रही। ग्रामीण महिलाओं ने समाहरणालय के मुख्य द्वार पर खड़े होकर स्पष्ट कहा कि वे अपनी जमीन और भविष्य की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि खनन परियोजनाएं उनके पारंपरिक जीवन, खेती और सामाजिक संरचना को पूरी तरह प्रभावित कर देंगी।

पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर चिंताएं

ग्रामीणों ने कोयला खनन से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान पर भी गंभीर चिंता जताई। उनका कहना है कि बड़े पैमाने पर खनन से—

  • भूमि की उर्वरता खत्म हो जाएगी
  • जल स्रोत प्रभावित होंगे
  • वायु और ध्वनि प्रदूषण बढ़ेगा
  • जैव विविधता को नुकसान पहुंचेगा

स्थानीय लोगों का दावा है कि इन परियोजनाओं से क्षेत्र का पारिस्थितिकी संतुलन पूरी तरह बिगड़ सकता है।

प्रशासन को सौंपा गया ज्ञापन

प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने जिला प्रशासन को एक विस्तृत मांग पत्र सौंपा। इसमें मांग की गई है कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को तुरंत रोका जाए और स्थानीय लोगों की सहमति के बिना किसी भी प्रकार की खनन गतिविधि आगे न बढ़ाई जाए।

प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो आंदोलन राज्य स्तर पर और अधिक व्यापक रूप ले सकता है।

जिला प्रशासन और पुलिस की प्रतिक्रिया

इस बड़े प्रदर्शन के बाद जिला प्रशासन और पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई है। प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

अधिकारियों का कहना है कि सभी पक्षों से बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास किया जाएगा ताकि स्थिति नियंत्रण में रहे।

कोल परियोजनाओं और स्थानीय विरोध के बीच बढ़ता तनाव

झारखंड में कोयला खनन परियोजनाएं लंबे समय से विकास और विस्थापन के बीच बहस का केंद्र रही हैं। एक ओर इन्हें ऊर्जा और औद्योगिक विकास के लिए आवश्यक बताया जाता है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय समुदाय इन्हें अपनी जमीन, संस्कृति और जीवन पर खतरा मानते हैं।

हजारीबाग का यह आंदोलन इसी व्यापक विवाद का हिस्सा माना जा रहा है, जो आने वाले समय में और अधिक राजनीतिक और सामाजिक रूप ले सकता है।

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