झुंझुनूं के 19 वर्षीय अग्निवीर प्रदीप कुमार का रांची में ड्यूटी के दौरान स्विमिंग पूल में डूबने से निधन हो गया। घटना से परिवार और गांव में शोक की लहर है। राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई और हजारों लोग तिरंगा यात्रा में शामिल हुए।
झुंझुनूं: राजस्थान के झुंझुनूं जिले से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है, जहां भारतीय सेना में कार्यरत 19 वर्षीय अग्निवीर प्रदीप कुमार का ड्यूटी के दौरान हुए एक हादसे में निधन हो गया। झारखंड के रांची स्थित सैन्य यूनिट में तैनात प्रदीप कुमार की स्विमिंग पूल में डूबने से मौत हो गई। उनके निधन की खबर से न केवल परिवार बल्कि पूरे गांव और क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई।
झुंझुनूं जिले के चिमनपुरा (बाड़ेट) गांव के रहने वाले प्रदीप कुमार भारतीय सेना में शामिल होने के बाद अपने सपनों को पूरा कर रहे थे। परिवार और ग्रामीणों के अनुसार, उनमें बचपन से ही देश सेवा का गहरा जज्बा था और सेना में भर्ती होना उनका सबसे बड़ा सपना था।
हादसे से कुछ घंटे पहले पिता से हुई थी बातचीत
परिजनों के अनुसार, 16 जून को हादसे वाले दिन प्रदीप ने अपने पिता से फोन पर बातचीत की थी। बातचीत के दौरान उन्होंने बताया था कि वह अपनी ड्यूटी पर तैनात हैं और पूरी तरह सुरक्षित हैं। पिता के मुताबिक, बेटे ने सामान्य रूप से परिवार का हालचाल पूछा और भरोसा दिलाया कि सब कुछ ठीक है। इसके बाद उन्होंने अपनी मां से भी बात की और घर की स्थिति के बारे में जानकारी ली। किसी को अंदाजा नहीं था कि यह परिवार और प्रदीप के बीच आखिरी बातचीत साबित होगी। कुछ ही समय बाद रांची स्थित सैन्य परिसर में एक दुखद दुर्घटना हुई, जिसमें प्रदीप की जान चली गई। हादसे की सूचना मिलने के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
सैन्य अधिकारियों ने दी हादसे की जानकारी
प्रदीप के पिता ने बताया कि शाम को यूनिट के एक वरिष्ठ अधिकारी का फोन आया। प्रारंभिक सूचना में बताया गया कि प्रदीप के साथ स्विमिंग पूल में एक गंभीर दुर्घटना हुई है और डॉक्टर उन्हें बचाने का प्रयास कर रहे हैं। परिवार को पहले उम्मीद बंधाई गई कि स्थिति नियंत्रण में आ सकती है, लेकिन कुछ समय बाद दोबारा फोन आया और अधिकारियों ने भारी मन से बताया कि तमाम कोशिशों के बावजूद प्रदीप को बचाया नहीं जा सका। यह खबर सुनते ही परिवार सदमे में आ गया। गांव में भी यह सूचना तेजी से फैल गई और लोगों ने शोक व्यक्त करना शुरू कर दिया।
देश सेवा का सपना लेकर सेना में शामिल हुए थे प्रदीप
प्रदीप कुमार केवल 19 वर्ष के थे, लेकिन उनके सपने और लक्ष्य बेहद बड़े थे। परिवार के अनुसार, वह पढ़ाई में भी काफी प्रतिभाशाली थे। उन्होंने 12वीं कक्षा में 92 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे और उनके सामने कई करियर विकल्प मौजूद थे। पिता चाहते थे कि बेटा किसी अन्य प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करे और उच्च शिक्षा प्राप्त करे। हालांकि प्रदीप का लक्ष्य शुरू से स्पष्ट था। वह सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करना चाहते थे।
परिवार के सदस्यों का कहना है कि प्रदीप अक्सर कहा करते थे कि उनका जीवन देश के लिए समर्पित है और वह राष्ट्र सेवा के लिए ही अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। उनकी इसी दृढ़ इच्छा के चलते उन्होंने सेना का रास्ता चुना और अप्रैल 2025 में भारतीय सेना में शामिल हुए।
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प्रशिक्षण पूरा कर पहली बार घर लौटे थे
सेना में भर्ती होने के बाद प्रदीप ने सफलतापूर्वक अपना प्रशिक्षण पूरा किया था। प्रशिक्षण समाप्त होने के बाद वह कुछ समय पहले छुट्टी लेकर अपने गांव आए थे। परिवार और गांव के लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया था। उन्होंने अपने माता-पिता से वादा किया था कि अगले अवकाश में फिर घर आएंगे और परिवार के साथ समय बिताएंगे। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। जिस बेटे के लौटने का परिवार इंतजार कर रहा था, वह तिरंगे में लिपटकर अपने गांव पहुंचा।
अंतिम यात्रा में उमड़ा जनसैलाब
अग्निवीर प्रदीप कुमार का पार्थिव शरीर जब उनके पैतृक गांव पहुंचा तो पूरा क्षेत्र शोक और गर्व की भावनाओं से भर गया। गांव और आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे। उनकी स्मृति में लगभग 10 किलोमीटर लंबी तिरंगा यात्रा निकाली गई, जिसमें हजारों लोग शामिल हुए। यात्रा के दौरान देशभक्ति के नारों और श्रद्धांजलि संदेशों से पूरा वातावरण गूंज उठा। लोगों ने हाथों में तिरंगा लेकर अपने वीर सपूत को अंतिम विदाई दी। स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और युवाओं ने भी बड़ी संख्या में भाग लेकर सम्मान प्रकट किया।
राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार
प्रदीप कुमार का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। भारतीय सेना की टुकड़ी ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया और सैन्य परंपराओं के अनुरूप अंतिम सलामी अर्पित की। इस दौरान उपस्थित लोगों की आंखें नम थीं। परिवार के सदस्य, ग्रामीण और प्रशासनिक अधिकारी सभी इस भावुक क्षण के साक्षी बने। सेना के जवानों ने अपने साथी को अंतिम श्रद्धांजलि दी और राष्ट्र के प्रति उनकी निष्ठा एवं समर्पण को याद किया।
दादी की हालत देख भावुक हुए लोग
अंतिम विदाई के दौरान एक मार्मिक दृश्य भी देखने को मिला। अपने पोते को तिरंगे में लिपटा देखकर प्रदीप की दादी भावुक हो गईं और उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिवार के अन्य सदस्यों को भी संभालना मुश्किल हो रहा था। गांव के लोगों ने परिवार को सांत्वना देने का प्रयास किया, लेकिन युवा बेटे को खोने का दर्द हर किसी के चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था।
झुंझुनूं की वीर परंपरा में जुड़ा एक और नाम
राजस्थान का झुंझुनूं जिला लंबे समय से भारतीय सशस्त्र बलों में अपने योगदान के लिए जाना जाता है। यहां के हजारों युवा सेना में सेवा दे रहे हैं और देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
प्रदीप कुमार का नाम भी अब उन युवाओं की सूची में शामिल हो गया है जिन्होंने राष्ट्र सेवा के मार्ग को चुना और अपने कर्तव्य का निर्वहन करते हुए जीवन खो दिया। उनकी कहानी केवल एक सैनिक की नहीं, बल्कि उस युवा पीढ़ी की भी कहानी है जो देश सेवा को सर्वोच्च सम्मान मानती है।
देशभक्ति और समर्पण की मिसाल बन गए प्रदीप
महज 19 वर्ष की उम्र में प्रदीप कुमार ने जिस समर्पण और साहस का परिचय दिया, वह युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। उनका सपना देश की सेवा करना था और उन्होंने उसी मार्ग पर चलते हुए अपना जीवन राष्ट्र को समर्पित कर दिया।
आज उनका परिवार गहरे दुख में है, लेकिन साथ ही उन्हें इस बात का गर्व भी है कि उनका बेटा देश की वर्दी पहनकर सेवा कर रहा था। प्रदीप कुमार की स्मृति आने वाले वर्षों तक झुंझुनूं और पूरे राजस्थान में सम्मान के साथ याद की जाएगी।








