190 रुपए की HIV किट ₹45 लाख में खरीदी: JLNMCH में खरीदारी पर सवाल, स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की सुनवाई

भागलपुर के JLNMCH में HIV किट की खरीद को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। 190 रुपए की किट महंगे दाम पर खरीदने के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने सुनवाई शुरू की।
190 रुपए की HIV किट ₹45 लाख में खरीदी: JLNMCH में खरीदारी पर सवाल, स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की सुनवाई
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भागलपुर के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (JLNMCH) में HIV जांच से जुड़ी किट की खरीद को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। आरोप है कि करीब 190 रुपए कीमत वाली HIV किट को लगभग 45 लाख रुपए में खरीदा गया। खरीदारी में कथित अनियमितता की शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले की सुनवाई शुरू कर दी है।

मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर खरीद प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जिस किट की बाजार कीमत काफी कम थी, उसकी खरीद के लिए सरकारी राशि का बड़ा हिस्सा खर्च किया गया। अब विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि खरीद किस प्रक्रिया के तहत हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन अधिकारी या कर्मचारी थे।

स्वास्थ्य विभाग की सुनवाई शुरू होने के बाद संबंधित अधिकारियों से खरीद से जुड़े दस्तावेज और रिकॉर्ड मांगे जा सकते हैं। इनमें टेंडर प्रक्रिया, सप्लायर से संबंधित दस्तावेज, स्वीकृति आदेश, बिल, भुगतान और किट की वास्तविक कीमत से जुड़े रिकॉर्ड शामिल हो सकते हैं।

यदि 190 रुपए प्रति किट की दर और 45 लाख रुपए की कुल खरीद राशि का दावा सही पाया जाता है तो बड़ी संख्या में किट खरीदे जाने की बात सामने आती है। हालांकि वास्तविक संख्या, प्रति किट भुगतान और खरीद प्रक्रिया की स्थिति दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

HIV जांच किट अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में मरीजों की जांच के लिए महत्वपूर्ण होती हैं। सरकारी अस्पताल में ऐसी सामग्री की खरीद निर्धारित नियमों और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत किए जाने की अपेक्षा होती है। खरीद में किसी भी तरह की वित्तीय अनियमितता होने पर सरकारी धन के दुरुपयोग का सवाल उठ सकता है।

स्वास्थ्य विभाग अब यह भी देख सकता है कि खरीद से पहले बाजार दर का आकलन किया गया था या नहीं। साथ ही यह जांच की जा सकती है कि किट की खरीद के लिए किस अधिकारी ने अनुमति दी थी और भुगतान किस स्तर पर स्वीकृत हुआ।

मामले में सप्लायर की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है। यदि खरीद प्रक्रिया में किसी खास कंपनी या एजेंसी को लाभ पहुंचाने का आरोप है तो उससे जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा सकती है। विभाग यह देखेगा कि टेंडर में कितनी कंपनियों ने हिस्सा लिया था और चयन किन आधारों पर किया गया।

अस्पताल प्रशासन के रिकॉर्ड में किट की उपलब्धता और इस्तेमाल का भी मिलान किया जा सकता है। कितनी किट खरीदी गईं, कितनी अस्पताल में पहुंचीं, कितनी मरीजों की जांच में इस्तेमाल हुईं और कितनी अभी स्टॉक में हैं—इन सभी बिंदुओं की जांच से खरीद की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

मामले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा सुनवाई शुरू किए जाने के बाद अब संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा। अधिकारियों से खरीद प्रक्रिया से जुड़े सवालों का जवाब मांगा जा सकता है। इसके बाद उपलब्ध दस्तावेजों और बयानों के आधार पर विभाग आगे की कार्रवाई तय करेगा।

अगर जांच में खरीद प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन या सरकारी राशि के गलत इस्तेमाल की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई हो सकती है। गंभीर वित्तीय अनियमितता सामने आने पर मामला आगे जांच एजेंसियों तक भी जा सकता है।

हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि कथित तौर पर 190 रुपए की कीमत वाली किट के लिए 45 लाख रुपए की पूरी राशि किस आधार पर तय हुई। यह भी जांच का विषय है कि 190 रुपए बताई जा रही कीमत किस स्रोत या दर सूची पर आधारित है और अस्पताल ने खरीद के समय किस दर को स्वीकार किया था।

स्वास्थ्य विभाग की सुनवाई इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे खरीद प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज आधिकारिक तौर पर सामने आ सकते हैं। जांच के बाद ही यह तय होगा कि मामला वास्तव में वित्तीय अनियमितता का है या खरीद मूल्य को लेकर कोई तकनीकी अथवा प्रक्रिया संबंधी अंतर है।

JLNMCH भागलपुर का प्रमुख सरकारी चिकित्सा संस्थान है और यहां बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे संस्थान में दवाओं, जांच किट और अन्य चिकित्सा सामग्री की खरीद में पारदर्शिता बेहद जरूरी होती है।

फिलहाल स्वास्थ्य विभाग ने मामले की सुनवाई शुरू कर दी है। 190 रुपए की HIV किट को 45 लाख रुपए में खरीदे जाने के आरोप की जांच अब दस्तावेजों और संबंधित अधिकारियों के जवाब के आधार पर आगे बढ़ेगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि खरीद में वास्तव में कितना वित्तीय नुकसान हुआ और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

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