जम्मू-कश्मीर विधानसभा सत्र खत्म, अध्यक्ष ने कार्यवाही अनिश्चित काल के लिए की स्थगित

जम्मू-कश्मीर विधानसभा का नौ दिवसीय सत्र शुक्रवार को समाप्त हुआ। पांच सरकारी विधेयक पारित हुए, आठ गैर-सरकारी विधेयकों पर चर्चा हुई। विधानसभा सत्र अनिश्चित काल

जम्मू-कश्मीर विधानसभा का नौ दिवसीय सत्र शुक्रवार को समाप्त हुआ। पांच सरकारी विधेयक पारित किए गए जबकि 41 में से सिर्फ आठ गैर-सरकारी विधेयकों पर चर्चा हो सकी। विधानसभा अध्यक्ष ने सत्र को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया।

Jammu-Kashmir: जम्मू-कश्मीर विधानसभा का नौ दिवसीय सत्र शुक्रवार को समाप्त हो गया। विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने सदन की कार्यवाही को अनिश्चित काल के लिए स्थगित करने की घोषणा की। इस दौरान पांच सरकारी विधेयक पारित किए गए। वहीं, 41 गैर-सरकारी विधेयकों में से केवल आठ पर ही चर्चा हो सकी। सत्र में जम्मू-कश्मीर की चार राज्यसभा सीटों के चुनाव भी संपन्न हुए। हल्की नोकझोंक के अलावा सदन की कार्यवाही शांतिपूर्ण रही।

सरकारी विधेयक हुए पारित

विधानसभा सत्र में सरकार की ओर से लाए गए पांच विधेयक पारित किए गए। इन विधेयकों में प्रशासनिक सुधार, वित्त और सार्वजनिक हित से जुड़े विषय शामिल थे। सभी विधेयक बहुमत से पारित किए गए। विपक्ष ने कुछ बिंदुओं पर आपत्ति जरूर जताई, लेकिन अंततः विधेयक ध्वनिमत से पारित हो गए।

गैर-सरकारी विधेयकों पर सीमित चर्चा

सत्र के दौरान 41 गैर-सरकारी विधेयक सूचीबद्ध थे, पर उनमें से केवल आठ पर ही चर्चा हो सकी। चर्चा किए गए विधेयकों को या तो सरकार के आश्वासन के बाद वापस लिया गया या प्रारंभिक चरण में ही खारिज कर दिया गया। उधमपुर से विधायक पवन गुप्ता ने बाढ़ पीड़ितों के मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव रखा था, जिसे विधानसभा अध्यक्ष ने अस्वीकार कर दिया। इस फैसले के विरोध में भाजपा (BJP) के विधायकों ने सदन से वॉकआउट किया।

विधानसभा अध्यक्ष ने दिया धन्यवाद

सत्र के समापन पर विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने सभी विधायकों का सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि नौ दिनों के भीतर सदन ने निर्धारित कार्यों को पूरा किया है। अध्यक्ष ने उम्मीद जताई कि भविष्य में सदन की कार्यवाही और अधिक सार्थक व जनहितकारी होगी।

उपराज्यपाल मनोज सिन्हा का बयान

सत्र के दौरान उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा न होने को खराब प्रदर्शन का बहाना नहीं बनाया जा सकता। निर्वाचित सरकार के पास सभी अधिकार हैं और उसे जनता की बेहतरी के लिए काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पहले ही संसद में स्पष्ट कर चुके हैं कि परिसीमन (Delimitation) के बाद विधानसभा चुनाव होंगे और फिर राज्य का दर्जा बहाल किया जाएगा।

निर्वाचित सरकार के पास हैं सभी अधिकार

मनोज सिन्हा ने कहा कि सरकार को यह बहाना नहीं बनाना चाहिए कि पूर्ण राज्य का दर्जा न होने तक विकास कार्य नहीं किए जा सकते। निर्वाचित सरकार के पास नीतिगत और प्रशासनिक शक्तियां हैं, जिनका उपयोग जनता की भलाई के लिए किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि राजनीतिक भ्रम फैलाने से बेहतर है कि सरकार जमीन पर काम दिखाए।

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