जंग के बीच भारत की अंतरराष्ट्रीय मदद, 3 देशों के लिए राहत का स्रोत

होर्मुज स्ट्रेट बंद होने पर भारत ने बांग्लादेश, श्रीलंका और अफगानिस्तान को ईंधन और मानवीय मदद पहुंचाकर संकटमोचक की भूमिका निभाई।

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध से होर्मुज स्ट्रेट बंद होने पर एशिया में ईंधन संकट पैदा हुआ। इस मुश्किल समय में भारत ने बांग्लादेश, श्रीलंका और अफगानिस्तान को तुरंत ईंधन और मानवीय मदद पहुंचाकर संकटमोचक की भूमिका निभाई। इससे पड़ोसी देशों को राहत मिली और भारत की ‘Neighbourhood First’ नीति मजबूत हुई।

संकटमोचक भारत: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तनातनी के चलते होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से एशिया के कई देशों में ईंधन संकट पैदा हुआ। इसी चुनौती के बीच भारत ने बांग्लादेश, श्रीलंका और अफगानिस्तान को तुरंत डीजल, पेट्रोल और मानवीय राहत भेजी। भारत ने अपनी घरेलू चुनौतियों को पीछे रखते हुए पड़ोसी देशों के लिए मदद का हाथ बढ़ाया, जिससे क्षेत्रीय सहयोग और ‘Neighbourhood First’ नीति को मजबूती मिली।

भारत ने बढ़ाया संकटमोचक का हाथ

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के चलते होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से एशिया के कई देशों में ईंधन संकट उत्पन्न हुआ। इस चुनौती के समय भारत ने बांग्लादेश, श्रीलंका और अफगानिस्तान को मदद पहुंचाकर संकटमोचक की भूमिका निभाई। भारत ने अपनी घरेलू चुनौतियों को भुलाकर तुरंत राहत पहुंचाई, जिससे पड़ोसी देशों को ऊर्जा और मानवीय सहायता मिली।

जंग के बीच भारत की अंतरराष्ट्रीय मदद, 3 देशों के लिए राहत का स्रोत

बांग्लादेश के लिए तत्काल ईंधन मदद

ईंधन की आपूर्ति बाधित होने से बांग्लादेश में बिजली कटौती और गारमेंट सेक्टर पर संकट गहरा गया। भारत ने भारत-बांग्लादेश मैत्री पाइपलाइन के जरिए 5,000 टन डीजल की आपूर्ति शुरू की और इसे लगातार बढ़ाया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, हर मामले में घरेलू उपलब्धता के आधार पर फैसला लिया गया। यह कदम दोनों देशों के बीच रिश्तों को नए सिरे से मजबूत करने में भी मददगार रहा।

श्रीलंका और अफगानिस्तान को भी राहत

श्रीलंका को ईंधन की भारी कमी और कीमतों में 33% की बढ़ोतरी का सामना करना पड़ा। भारत ने 28 मार्च को 20,000 मीट्रिक टन डीजल और 18,000 मीट्रिक टन पेट्रोल भेजकर संकट कम किया। अफगानिस्तान को बाढ़ और भूकंप के कारण मानवीय राहत भेजी गई, जिसमें किचन सेट, हाइजीन किट, स्लीपिंग बैग और तिरपाल शामिल थे। विदेश मंत्रालय ने इसे भारत की मानवीय प्रतिबद्धता और पड़ोसी देशों के साथ एकजुटता का उदाहरण बताया।

संकटमोचक भारत का संदेश

भारत की यह पहल दक्षिण एशिया में ‘Neighbourhood First’ नीति को मजबूती देती है और पड़ोसी देशों के साथ सहयोग का नया दृष्टिकोण दिखाती है। ऊर्जा संकट के समय तत्काल राहत प्रदान करके भारत ने अपनी क्षमता और संवेदनशील कूटनीति का परिचय दिया।

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