जनगणना 2027 के लिए तैयार अनुदेश पुस्तिका में भारत की आजादी और दो ऐतिहासिक घटनाओं के वर्ष गलत लिखे होने का मामला सामने आया है। गृह मंत्रालय से जुड़ी इस पुस्तिका की गलतियों ने प्रशिक्षण ले रहे कर्मचारियों को हैरान कर दिया है।
गोरखपुर: जनगणना 2027 की तैयारियों के बीच कर्मचारियों को दी गई प्रशिक्षण पुस्तिका में ऐतिहासिक तथ्यों से जुड़ी गंभीर गलतियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें भारत की स्वतंत्रता का वर्ष 1947 के बजाय 1942 दर्ज है। इसी तरह पाकिस्तान के साथ युद्ध और बांग्लादेश की आजादी के साल भी सही नहीं लिखे गए हैं। सरकारी स्तर पर प्रकाशित प्रशिक्षण सामग्री में ऐसी गलतियों ने दस्तावेज की जांच और संपादन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तीन ऐतिहासिक घटनाओं के साल गलत लिखे मिले
जनगणना के लिए तैयार की गई अनुदेश पुस्तिका में भारत के इतिहास से जुड़ी तीन प्रमुख घटनाओं की तारीखों में अंतर मिला है। इसमें देश की स्वतंत्रता का वर्ष 1942 बताया गया है, जबकि भारत को 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश शासन से आजादी मिली थी।
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पुस्तिका में भारत-पाकिस्तान युद्ध का साल 1964 दर्ज किया गया है। वास्तविकता में दोनों देशों के बीच युद्ध 1965 में हुआ था। इसी तरह बांग्लादेश की मुक्ति का वर्ष 1972 लिखा गया है, जबकि बांग्लादेश ने 1971 में पाकिस्तान से स्वतंत्रता प्राप्त की थी।
ये गलतियां उस सामग्री में सामने आई हैं, जिसे जनगणना कर्मचारियों को काम की प्रक्रिया समझाने के लिए तैयार किया गया है।
22 अक्टूबर से शुरू हुआ कर्मचारियों का प्रशिक्षण
जनगणना की प्रक्रिया समझाने के लिए 22 अक्टूबर 2026 से प्रशिक्षण शुरू किया गया है। इसमें अधिकारी, कर्मचारी और शिक्षक भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें जनसंख्या गणना से जुड़े नियमों और काम करने के तरीकों की जानकारी दी जा रही है।
इसी उद्देश्य से प्रकाशित अनुदेश पुस्तिका में 171 पृष्ठों तक प्रशिक्षण से संबंधित जानकारी दी गई है। इसमें जनगणना के दौरान अपनाई जाने वाली प्रक्रिया और कर्मचारियों के लिए जरूरी दिशा-निर्देश शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रशिक्षण सामग्री पढ़ते समय ऐतिहासिक वर्षों में अंतर सामने आने पर कई कर्मचारी हैरान रह गए। सवाल यह है कि आधिकारिक उपयोग के लिए तैयार दस्तावेज में ऐसी गलतियां कैसे रह गईं।
गृह मंत्रालय के अंतर्गत प्रकाशित हुई पुस्तिका
यह अनुदेश पुस्तिका भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त कार्यालय, नई दिल्ली की ओर से प्रकाशित की गई है।
पुस्तिका के तीसरे पृष्ठ पर भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण का संदेश दिया गया है। इसमें जनगणना के उद्देश्य और उससे जुड़े कार्यों की जानकारी शामिल है। संदेश पर 17 सितंबर 2026 की तारीख दर्ज है।
दस्तावेज में कॉपीराइट संबंधी निर्देश भी दिए गए हैं। इनके अनुसार, कार्यालय की पूर्व अनुमति के बिना पुस्तिका के किसी हिस्से की नकल करने, संग्रहित करने या किसी माध्यम से आगे भेजने पर प्रतिबंध है।
जनगणना और विकास से जुड़े संदेश भी शामिल
पुस्तिका में जनगणना के महत्व को समझाने वाले संदेश भी दिए गए हैं। इसके पिछले हिस्से में 'जनगणना से जनकल्याण' का नारा लिखा है। वहीं, प्रत्येक पृष्ठ के निचले हिस्से में 'हमारी जनगणना, हमारा विकास' का संदेश दिखाई देता है।
इन संदेशों के जरिए जनगणना को देश की विकास योजनाओं से जोड़कर प्रस्तुत किया गया है। जनगणना से मिलने वाले आंकड़े आबादी की स्थिति समझने और सरकारी योजनाओं की जरूरत तय करने में मदद करते हैं।
सरकारी जानकारी के अनुसार, जनगणना 2027 देश की 16वीं और स्वतंत्रता के बाद आठवीं जनगणना होगी। यह प्रक्रिया जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत संचालित की जाती है।
प्रशिक्षण सामग्री की जांच पर उठे सवाल
जनगणना जैसे बड़े सरकारी अभियान में कर्मचारियों को सही और स्पष्ट जानकारी मिलना जरूरी है। प्रशिक्षण पुस्तिका में ऐतिहासिक घटनाओं के वर्ष गलत होने से सामग्री तैयार करने और उसकी अंतिम जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
हालांकि, इन गलतियों का जनगणना के आंकड़ों या सर्वेक्षण प्रक्रिया पर कोई सीधा असर पड़ने की पुष्टि नहीं हुई है। उपलब्ध रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट नहीं है कि संबंधित कार्यालय ने पुस्तिका में सुधार के लिए कोई निर्देश जारी किया है या नहीं।









