करवा चौथ का पर्व आज गुरुवार 29 अक्टूबर को पूरे देश में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से निर्जला व्रत रखती हैं। सुबह सरगी ग्रहण करने के बाद व्रत शुरू होता है और महिलाएं दिनभर भोजन तथा पानी से परहेज करती हैं। शाम को भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और करवा माता की पूजा की जाती है। इसके बाद चंद्रमा के दर्शन कर अर्घ्य देने और पति के हाथों जल ग्रहण करने के साथ व्रत पूरा किया जाता है। इस पर्व को लेकर घरों में सुबह से ही तैयारियां शुरू हो गई हैं और बाजारों में भी पूजा सामग्री, साज शृंगार के सामान तथा मिठाइयों की खरीदारी देखने को मिल रही है।
भागलपुर में करवा चौथ की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 4 मिनट से 6 बजकर 20 मिनट तक निर्धारित बताया गया है। इस दौरान महिलाएं विधि विधान से पूजा कर सकती हैं और व्रत कथा सुन सकती हैं। वहीं भागलपुर में चंद्रमा के उदय का अनुमानित समय शाम 7 बजकर 46 मिनट बताया गया है। चंद्र दर्शन के बाद महिलाएं चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख समृद्धि की कामना करेंगी। वास्तविक चंद्र दर्शन का समय मौसम और स्थानीय परिस्थितियों के कारण अलग महसूस हो सकता है।
करवा चौथ की शुरुआत सुबह सरगी खाने की परंपरा से होती है। कई परिवारों में सास अपनी बहू को सरगी देती हैं, जिसमें फल, मिठाइयां, सूखे मेवे और अन्य खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं। इसके बाद महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं। दिनभर पूजा की तैयारियां की जाती हैं और शाम को महिलाएं पारंपरिक वस्त्र पहनकर पूजा में शामिल होती हैं। कई जगह महिलाएं एक साथ बैठकर करवा चौथ की कथा सुनती हैं और पूजा की थाली सजाती हैं। परिवार की परंपरा के अनुसार पूजा सामग्री में करवा, दीपक, रोली, चावल, फूल, मिठाई और जल रखा जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार करवा चौथ का व्रत पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में सुख शांति के लिए रखा जाता है। इस दिन माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। भगवान गणेश की आराधना भी की जाती है। महिलाएं पूजा के दौरान व्रत कथा सुनती हैं और चंद्रमा के दर्शन की प्रतीक्षा करती हैं। चांद निकलने के बाद छलनी से चंद्र दर्शन करने और फिर पति का चेहरा देखने की परंपरा कई क्षेत्रों में प्रचलित है। इसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर पति के हाथों पानी पीकर व्रत खोला जाता है।
बिहार के अलग अलग शहरों में चंद्रोदय और पूजा के समय में अंतर हो सकता है। इसलिए महिलाओं को अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा और चंद्र दर्शन का समय देखना चाहिए। पटना में चंद्रोदय का अनुमानित समय शाम 7 बजकर 52 मिनट बताया गया है, जबकि मुजफ्फरपुर में करीब 7 बजकर 50 मिनट और गया में करीब 7 बजकर 55 मिनट का समय दिया गया है। बादलों के कारण चंद्रमा दिखाई देने में देरी हो सकती है, इसलिए केवल निर्धारित समय के आधार पर चांद दिखाई देने की पुष्टि नहीं की जा सकती।
करवा चौथ के अवसर पर बाजारों में भी रौनक बनी हुई है। महिलाएं पूजा की थाली, करवा, छलनी, दीपक, साड़ी, चूड़ियां, मेहंदी और अन्य श्रृंगार सामग्री खरीद रही हैं। कई घरों में शाम की पूजा के लिए विशेष तैयारियां की जा रही हैं। हालांकि, निर्जला व्रत रखने वाले लोगों को अपनी सेहत का ध्यान रखना चाहिए। किसी को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी हो तो व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना उचित है। पूजा की विधि और परंपराएं परिवार तथा क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकती हैं, इसलिए स्थानीय रीति रिवाज का पालन किया जाता है।








