चतरा के कौलेश्वरी पर्वत की तलहटी में सुगंधित फूलों की खेती शुरू करने की योजना है। उत्तरी वन प्रमंडल के प्रस्ताव से श्रद्धालुओं को स्थानीय पूजा फूल मिलेंगे और आसपास के ग्रामीणों की आय बढ़ाने का अवसर मिलेगा।
चतरा: कौलेश्वरी पर्वत की तलहटी में सुगंधित फूलों की बगिया विकसित करने की तैयारी की जा रही है। उत्तरी वन प्रमंडल ने आसपास के हटवरिया समेत तीन गांवों में बौनी फूलों की प्रजातियों की खेती को बढ़ावा देने का प्रस्ताव तैयार किया है। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को स्थानीय स्तर पर पूजा के फूल उपलब्ध कराने के साथ ग्रामीणों को रोजगार और अतिरिक्त आमदनी का अवसर देना है।
कौलेश्वरी पर्वत की तलहटी में फूलों की खेती की तैयारी

कौलेश्वरी पर्वत की तलहटी में प्रस्तावित फूलों की खेती के लिए उपयुक्त जमीन का चयन किया जाएगा। वन विभाग के अनुसार, गांवों में ट्रांसमिशन लाइन से गुजरने वाली उपयुक्त भूमि का इस्तेमाल करने की योजना है। यहां ऐसी बौनी प्रजातियों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिन्हें कम जगह में उगाया जा सके और जिनमें अच्छी सुगंध हो।
हटवरिया समेत तीन गांवों में शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट
योजना के तहत हटवरिया और दो अन्य आसपास के गांवों के ग्रामीणों को फूलों की खेती से जोड़ने की तैयारी है। इसे शुरुआती तौर पर पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया जाएगा। प्रस्ताव का अनुमोदन मिलने के बाद काम शुरू होने की बात कही गई है।
फूलों की स्थानीय उपलब्धता से कौलेश्वरी पर्वत आने वाले श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए यहीं से फूल खरीद सकेंगे। इससे बाहर से फूल लाने की जरूरत कम हो सकती है। ग्रामीण तैयार फूलों की बिक्री के अलावा उनसे माला और अन्य पूजा सामग्री तैयार कर भी आमदनी कर सकेंगे।
हारसिंगार, चंपा और रातरानी की प्रजातियां होंगी शामिल
प्रस्तावित बगिया में हारसिंगार, गोंडल, चंपा, रातरानी, मोगरा और मोंरा जैसी सुगंधित फूलों की प्रजातियां लगाने की योजना है। अलग-अलग मौसम में खिलने वाले फूलों से क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता बढ़ने की उम्मीद है।
फूलों की बगिया धार्मिक स्थल पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए अतिरिक्त आकर्षण बन सकती है। इसके साथ ही क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन के साथ प्राकृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने में भी यह पहल मददगार हो सकती है।
पर्यावरण संरक्षण के साथ बढ़ेगा पर्यटन
कौलेश्वरी पर्वत धार्मिक और प्राकृतिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र है। फूलों की खेती के दौरान पर्यावरण, वन्यजीव और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का ध्यान रखने की बात कही गई है। योजना सफल रहने पर भविष्य में इसे अन्य गांवों तक विस्तार देने की संभावना भी है।
हंटरगंज प्रखंड में स्थित कौलेश्वरी पर्वत को सनातन, बौद्ध और जैन धर्मावलंबियों की आस्था से जुड़ा स्थल माना जाता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार यहां हर साल चार से पांच हजार विदेशी पर्यटक आते हैं, जबकि सालभर में 15-16 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का दावा किया गया है। रामनवमी के दौरान यहां विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें आठ से दस लाख श्रद्धालुओं के शामिल होने की बात कही गई है।












